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उत्तराखंड

कवायद: आधार के बाद अब आपके वाहन भी होंगे मोबाइल नंबर से लिंक, परिवहन विभाग का फ़रमान

उत्तराखंड- प्रदेश के वाहन मालिकों के लिए महत्वपूर्ण जानकारी…… परिवहन आयुक्त कार्यालय की ओर से निर्देश जारी किए गए हैं कि वाहन मालिकों को अपने वाहन की आरसी को मोबाइल नंबर से लिंक करवाना अनिवार्य हैं। जो वाहन मालिक अपने वाहन की आरसी को मोबाइल नंबर से लिंक नहीं करा पाए हैं, तो जल्द करें।

अब वाहनों के रजिस्ट्रेशन के लिए फोन नंबर मुख्य रूप से अनिवार्य कर दिया गया है। वाहन मालिकों के लिए आरसी को मोबाइल नंबर से लिंक कराने से कई फायदे होंगे।

मोबाइल नंबर के आरसी से लिंक होने के बाद गाड़ी से जुड़ी हर जानकारी वाहन मालिक को समय समय पर मिलती रहेगी। वाहन के चालान और उसके भुगतान संबंधी डिटेल भी भेजी जाएगी। ये नियम आपकी सुरक्षा के लिए ही है।

ऐसा ना करने वालों को भविष्य में कई मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। परिवहन विभाग के नियम के अनुसार नई गाड़ियों के रजिस्ट्रेशन में मोबाइल नंबर अति आवश्यक है। साथ ही जिन पुराने वाहन मालिकों के मोबाइल नंबर रजिस्टर्ड नहीं है या फिर मोबाइल नंबर बदल चुका हो, ऐसे लोग भी जल्द से जल्द अपने मोबाइल नंबर को आरसी से लिंक करा लें। अन्यथा भविष्य में परेशानी उठानी पड़ सकती है।

परिवहन विभाग के निर्देशों के अनुसार वाहन स्वामियों को समय रहते अपने मोबाइल नंबर अपडेट कराने होंगे। आयुक्त कार्यालय ने अपील की है कि वाहन मालिक पोर्टल के माध्यम से अपनी आरसी को मोबाइल नंबर से लिंक कर लें। ये व्यवस्था इसलिए की जा रही है ताकि वाहन के चालान पर 90 दिन के भीतर कार्रवाई हो सके।

नया नियम लागू होने के बाद तीन महीने के भीतर चालान पर कार्रवाई करनी होगी। ऐसा तभी संभव होगा जब वाहन चालक को समय रहते चालान की सूचना भेजी जाएगी। इसके लिए आरसी का मोबाइल नंबर से लिंक होना जरूरी है। अभी तक वाहनों के चालान छह से आठ महीने तक आरटीओ में लंबित पड़े रहते हैं। नया नियम लागू होने पर तीन महीने बाद चालान का निपटारा कोर्ट में होगा।

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तैयारी: डिग्री कॉलेज खुलेंगे नए दिशा निर्देशों के साथ, यूजीसी की नई एडवाइजरी

देहरादून। शिक्षा मंत्रालय ने स्टेट के डिग्री कॉलेजो में लागू यूजीसी द्वारा सुरक्षात्मक नियमों के पालन के लिए स्टेट और केंद्र सरकार के फैसलों पर छोड़ दिया है।

यूजीसी की नई नियमावली के अनुसार कॉलेज और विश्वविद्यालयों को चरणबद्ध तरीके से खोला जा सकता है।
जिसमे रिसर्च औऱ साइंस के छात्रों को पहले बुलाया जा सकता है। क्योंकि इन मे छात्रों की संख्या अन्य संकायों से कम होती है। इसके अलावा कक्षा में भाग लेने की अनिवार्यता को भी खत्म किया गया है, बल्कि छात्र ऑनलाइन माध्यम से क्लास में शामिल हो सकते हैं।

इसके अलावा यूजीसी के नियमानुसार कोरोना संक्रमण के लक्षण भर मात्र दिखने वाले छात्रों को कैम्पस औऱ छात्रावास में रहने की अनुमति भी नहीं दी जानी चाहिए।

यूजीसी के दिशानिर्देशों के मुताबिक कोरोना संक्रमण के लक्षण वाले छात्रों को कैंपस में रहने, यूनिवर्सिटी या कॉलेज हॉस्टल में रूम साझा करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।

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