Connect with us
IMG 20190503 114845

उत्तराखंड

भरतु की ब्वारी : बच्चों के रिजल्ट आने पर देखो क्या क्या करती:नवल खाली

ezgif.com resize

ajax loader

भरतु की ब्वारी और रिजल्ट- जारी- नवल खाली
—————————————————————–
बच्चों के रिजल्ट आ चुके थे !! भरतु की ब्वारी सुबह से बच्चो के रिजल्ट का इंतजार कर रही थी । देवता के थान में सुबह से तीन बार धूप भी बाल चुकी थी अपने इष्ट देव का नाम भी कई बार पुकार चुकी थी !!! पहाड़ी भाषा मे बालना का अर्थ जलाने से है — जैसे लाइट बाल (लाइट जला) , मोमबत्ती बाल , धूप बाल आदि !!!
गाँव से बच्चे शहरों में सिर्फ इसी वजह से शिफ्ट किये थे ताकि अच्छी पढाई कर सकें ।
स्कूल भी सबसे महँगा वाला था , आजकल तो वही है कि जो सबसे महंगा स्कूल ,वो सबसे अच्छा स्कूल !! इसके अलावा चार चार ट्यूशन अलग से थे ।।।
आजकल बच्चे पढ़ाना बहुत खर्चीला ही होता जा रहा है । कम से कम सालभर के दो चार लाख तो खर्चा है ही ।।
अब भरतु की ब्वारी ने बच्चों के लिए कभी कोई कमी कसर नही छोड़ी थी , केंटीन से हॉर्लिक्स के डब्बे , बॉर्नवीटा , सब कुछ खिलाती थी ।।
अक्सर कहती थी — वैसे तो पढ़ने में ये ठीक ठाक हैं न …पर थोड़ा चंचल हो गए हैं!!
ये भी बड़ा शोध का विषय है कि बच्चे की आई क्यू ज्यादा महत्वपूर्ण है या महंगे बड़े स्कूल !!! क्या महँगे बड़े स्कूलों में पढ़ने से बच्चे की आई क्यू में सुधार होता होगा ???
उधर गाँव के चन्द्रू चाचा का लड़का ,जोकि गाँव से नजदीकी कस्बे में डेली 2 किमी पैदल चलकर स्कूल पहुँचता था ।। घर से सुबह कोदे की रोटी और ताजा मख्खन खाकर निकलता, साथ मे पांच लीटर दूध भी बेचने के लिए ले जाता और दिन में झोली- भात’ भूटि मिर्च और हरी भुज्जी खाने वापस आ जाता ।।
शाम को माँ के साथ गेहूं काटकर भी घर ले आता !!
पढ़ने में भी होशियार था !! इसबार के रिजल्ट में भी उसने स्कूल टॉप किया था ।।
वो जब घर से स्कूल के लिए निकलता तो डेली पाँच प्रश्न याद करते करते 2किमी का सफर पूरा करता ।। पाँच प्रश्न सुबह स्कूल जाते हुए , पांच प्रश्न स्कूल से लौटते हुए याद करता ।।
यहॉ तक कि उसने अपने लेट्रिन घर की दीवार पर पॉच प्रश्न कागज पर चिपका देता और फ्रेश होते होते उन्हें भी सीख लेता ।।
बच्चों में यदि जिज्ञासा और ललक हो तो वो निश्चित तौर पर सफलता हासिल कर ही लेते हैं ।
इधर भरतु की ब्वारी के बच्चे अक्सर मोबाइल में खोए रहते !! जब वो उनको टोकती तो वो भी दो टूक जवाब देते….. ममी आप भी तो हर समय मोबाइल में लगी रहती हो ।। उसके पास फिर कोई जवाब न होता ।। क्योंकि वो भी सोशियल मीडिया की धस्की बन चुकी थी ।। कभी वट्सएप तो कभी फेसबुक !!! अब कभी कभी लाइक एप पर भी अपनी वीडियो अपलोड करती रहती ।।
भरतु की ब्वारी के बच्चे भी पास हो चुके थे ।।।
बोली – चलो good सेकिंड तो आई ।।
अब आजकल good सेकिंड क्या होती है ?? ये तो आपको पता ही है !!
जब गाँव से सास का फोन आया और उसने चन्द्रू के लड़के के टॉपर आने के बारे में बताया तो बोली —- हूँmmm….. गाँव की तरफ तो नकल भी बहुत होती है , यहाँ देहरादून में तो बहुत सख्ताई है भई ।।।
इसी को कहते हैं —–
डांस न आये बल हाउस टेढ़ा !!🤣🤣!!!
बच्चों की पढ़ाई लिखाई सब पेरेंट्स की गाइडेंस पर भी निर्भर करती है !! कुछ बच्चे तो बिरले होते हैं ,जो अपनी जिम्मेदारियों को बचपन से ही बखूबी जानते हैं ।। पर अधिकतर बच्चे कच्ची मिट्टी के घड़े होते हैं … उनको साँचे में ढालना पड़ता है !!
पढाई का अति प्रेशर भी ठीक नही पर यदि सब कुछ नियम व अभ्यास से किया जाय तो असम्भब भी सम्भव है ।।।।

Continue Reading
Advertisement
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published.

More in उत्तराखंड

उत्तराखंड

उत्तराखंड

देश

देश

ट्रेंडिंग खबरें

Recent Posts

Like Facebook Page

To Top
0 Shares
Share via
Copy link
Powered by Social Snap