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उत्तराखंड

एक्सक्लूसिव राज काज: धार्मिक स्थल बूढाकेदार में खुलेआम चल रहा नशे का ब्यापार,पटवारी भी हो रखे हफ्ते के नशे में लीन

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UT-  बूढाकेदार गॉव अपनी धार्मिक महत्व व महाभारत के केदारखण्ड के अध्याय के लिए राज्य प्रसिद्ध तीर्थ स्थल है, यहॉ भगवान शंकर वृद्ध रूप में निवास करते है साथ ही 90 जूला के आराध्य देव इष्ट गुरूपैलापीर व मॉ राजराजेश्वरी की भूमि मे नशे व मांस का व्यापार प्रशासन की नाक के नीचे धड़ल्ले से चल रहा है

मान्यता के अनुसार बूढाकेदार क्षेत्र में शराब व मांस प्रतिबन्धित है जिसका समर्थन मन्दिर समिति के द्वारा ग्रामीण प्रशासन से मान्य था लेकिन वर्तनमान मे मन्दिर समिति व ग्रामीण प्रशासन की लापरवाही के चलते बूढाकेदार मुख्य बाजार में होटलो व दुकानों मे अवैध शराब व मांस का व्यापार हो रहा है, जिसके लालच में स्थानीय होटल वाले शराबियों को पनाह देने के लिए अपने होटलों में मांस मछली पका कर इस पवित्र स्थल की मर्यादा को भंग कर रहे है.

नवम्बर माह में बूढाकेदार क्षेत्र में बलिराज बग्वाल महोत्सव प्रत्येक साल होता है, इस तरह के अवैध धंधे गॉव के बार त्यौहारों को बिगाड सकते है या बच्चों व युवाओं के शराब के प्रति लुभा सकते है जो सामाजिक दृष्टिकोण से चिंता का विषय है

सबसे बडा दोष मन्दिर समिति का है जिन्हें सब कुछ पता होने के बावजूद समिति भाई-बन्धुवाद व जातिवाद को बढावा देने के चक्कर में कोई कदम नही उठाती जिससे निरन्तर शराब का अवैध धंधा यहॉ जोर पकड रहा है.

गौरतलब हो कि स्थानीय प्रशासन ने होटलों पर शराब पिलाने के सम्बन्ध में बाजार में नोटिस भी चिपका रखें है लेकिन फिर भी बिना रोक-टोक व पटवारी की डर के यहॉ ये अवैध काम हो रहा है जिसमे सम्बन्धित पटवारी की लापरवाही उन्हें भी शक के घेरे में खडा कर रही है.

होटलों में उपलब्ध मांस व दुकानों में शराब की उपलब्धता गॉव के माहौल को गंदा कर रहे है जिसके चलते ग्रामीण युवा नशे की लत के आदी हो गये है

गांव शासन व प्रशासन को कोसते है परन्तु असली गुन्हेगार तो हम गॉव वाले ही है जिन्होंने बाल ऋषि व धर्म ऋषि की तप्त स्थली को पैसों के लालच में नरक समान बना दिया है, यदि यूं ही सब चलता रहा तो आने वाले समय में बूढाकेदार नाथ धाम अपनी महत्व को खो देगा जिसके जिम्मेदार मन्दिर समिति, व्यापार मंडल के साथ पटवारी महोदय व स्थानीय दुकान मालिक होंगे जो अपनी दुकानें ऐसे अवैध कामों को जानने के बाद भी किराये पर दे रहे है.

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कुछ साल पहले स्थानीय सोशल मीडिया (अपना बूढाकेदार) पर शराब के अवैध कारोबार के प्रति भी चेताया जा चुका था लेकिन ग्रामीण प्रशासन की लापरवाही के चलते इस पर कोई कारवाही नही हुयी…

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