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उत्तराखंड

बूढाकेदार मोटर मार्ग आंदोलन की एक झलक भाग 5

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*बूढ़ाकेदार मोटर मार्ग आन्दोलन की एक झलक*

*लेखकः शम्भुशरण रतूड़ी*

इस धारावाहिक लेख को शुरू से पढ़ने के लिए क्लिक करें

भाग 5

मेरी अप्रकाशित पुस्तक *विद्रोही पथ का राही* के कुछ अंश)
*गातांक से आगे (5) ……………*

* मैं हृदय की गहराईयों से आभारी हूँ आप सभी उत्सुक पाठकों का जो मेरे इस लेख श्रंखला को बेहद मनोभाव से पढ़ रहे हैं । मेरे लिये उन कई भाई बहिनों के फोन आये तथा टिप्पणीयां आयी जिन्होंने इस *बूढ़ाकेदार मोटर मार्ग…….* धारावाहिक लेख का पठन किया ।
और क्षमा प्रार्थी हूं आप सभी का ! कि कुछ दिन तक किन्हीं अपरिहार्य कारणों से लेख प्रसारित न कर सका ।

*( आपने अभी तक पढा कि चमियाला में क्या क्या हुआ ?)*

आन्दोलनकारी बेहद जोशखरोश के साथ गाड़ीयों में सवार होकर, बलबीरसिंह सिंह नेगी जिन्दाबाद ! PWD मुर्दाबाद ! ! जैसे गगनभेदी नारों के साथ टिहरी कूच कर गये । पिलखी-घोन्टी से आगे निकलने के बाद हल्की सी बूंदा-बांदी शुरु हो गयी अर्थात मौसम खुशगवार था मगर जैसे जैसे आन्दोलनकारी टिहरी के समीप पहुँच रहे थे वातावरण क्रान्तिमय होता जा रहा था !
आन्दोलनकारीयों का जत्था सिमलासू पहुँच गया ! मगर टिहरी प्रशासन ने हमें आगे बढ़ने से रोक दिया ! और उसका कारण यह था कि जो प्रशासन के *चाटुकार* छुट्टभय्ये नेता हमें चमियाला मिले थे ! जिनसे हमने विमार आन्दोलनकारी को कार में घनशाली पहुंचाने की विनती की थी, उन्होंने प्रशासन को खबर दे दी कि बलबीरसिंह सिंह नेगी, *पट्टी थातीकठूड़* के करीब 23 गांवों की जनता के अलावा *बासर, आरगढ, गोनगढ, केमर, के साथ भिलंग* की जनता का जत्था लेकर टिहरी पहुँच रहें हैं । प्रशासन के वफादार उन नेताओं ने उनके कान ऐसे भर दिये थे कि उनके हाथ पांव फूल गये ! तो उन्हें राय दी गयी कि आन्दोलनकारीयों को *सिमलासू* में रोक दिया जाय ! वह तो यह समझ रहे थे कि *बलबीरसिंह नेगीजी* आन्दोलनकारीयों का नेता नहीं बल्कि कोई आन्तकवादी संगठन का नेता हो । मूर्ख नीतिनिर्धारकों मंसूबा यह था कि ! वहाँ से जब आन्दोलनकारी पैदल टिहरी के लिये कूच करेंगे तो वे PAC के रौबदार तथा संगीनों से लैस जवानों को देखकर ग्रामीण आन्दोलनकारी डर कर तितर-बितर हो जायेंगे और *बलबीरसिंह नेगी* का जिद्दीपन समाप्त हो जायेगा ……अर्थात आन्दोलन फेल हो जायेगा । लेकिन उन जयचन्दो को को यह पता नहीं था कि जिस *बलबीरसिंह नेगी* ने करीब 90 दिन पहले यह कहकर ऐलाने-जंग कर ही दी थी कि – *नापाक इरादों से कह दो ! कि चिंगारी है, जो शोला बनी जा रही है* तो सेमलासू में आन्दोलनकारीयों को बैरिल लगाकर रोकना प्रशासन की बचकानी हरकत ही कहा जा सकता है । और इसके साथ उनकी एक और चाल भी थी कि जैसे ही सेमलासू में आन्दोलनकारी गाड़ियों से नीचे उतरेंगे तो *अनपढ-गंवार बुढ्ढेरा* किस्म के लोग बबंडर करेंगे तो हम उनके नेता को शांति भंग या किसी अन्य कानूनी धारा में गिरफ्तार कर देगे तो स्वतः ही आन्दोलन फेल हो जायेगा । पर ऐसा हुआ नहीं ।
[ ] शांति और अनुशासनबद्ध मगर जोशीले अंंदाज से समस्त आन्दोलनकारी बसों से नीचे” उतरे । जहांपर CPM के दिग्गज नेता कामरेड सावनचंद रमोला, बूढ़ाकेदार निवासी का. अब्बलसिंह, का. प्रेमसिंहचौहान, का. बिक्रमसिंह, का. चटर्जी, का. कृपालसिंह “सरोज” के अलावा बहुत सारे लोग ठेली में माइक सजाये सिमलासू में आन्दोलनकारीयों की आगवानी के लिये खड़े थे । क्योंकि प्रशासन की खुसुर पुसुर से कामरेड रमोलाजी को मालूम पड़ गया था कि आन्दोलनकारी जत्थे को सिमलासू में रोक दिया जायेगा ।गतांक से आगे भाग 6 क्लिक करें

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