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उत्तराखंड में तीसरा राजनैतिक विकल्प बनने की होड़.. यूकेडी या आप? निर्णायक सिर्फ आप..

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उत्तराखंड में तीसरा राजनैतिक विकल्प बनने की होड़.. यूकेडी या आप? निर्णायक सिर्फ आप..

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देहरादून। विजेन्द्र राणा । राज्य निर्माण से लेकर अब तक कांग्रेस या बीजेपी दोनों सत्ताधारी दलों ने उत्तराखंड पर क्रमशः एक के बाद एक राज किया और रोजगार पलायन और विकास को लेकर बहुत सारी घोषणाएं की गई। युवाओं को स्वर्णिम भविष्य और आत्मनिर्भरता के हसीन सपने दिखाए गए परंतु उन सपनों में से कितने सपने धरातल पर साकार हुए यह आपको प्रदेश का युवा ही बता सकता है ।

जब दोनों दलों से विकास, पलायन और रोजगार के मुद्दे पर प्रश्न किया जाता है तो दोनों पार्टियां एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाकर अपना पल्ला झाड़ती नजर आती हैं । मुद्दा चाहे पलायन का हो, रोजगार का हो या स्थाई राजधानी का, दोनों दिग्गज पार्टियां अपने चुनावी वादों को अमल जामा पहनाने में पूर्णरूपेण नाकाम रही हैं।

परंतु समय के साथ-साथ इस लड़ाई में यूकेडी और आम आदमी पार्टी भी कूद पड़ी और दोनों राजनीतिक दल प्रदेश में अपना स्वर्णिम भविष्य तलाशते हुए तीसरा राजनैतिक विकल्प बनने की होड़ में लगे हैं ।

जहां यूकेडी जनता से अपने इतिहास को दोहराते हुए पुनः एक बार फिर उत्तराखंड के बलिदान एवं राज्य निर्माण में योगदान के लिए वोट मांगेगी, वहीं दूसरी ओर आम आदमी पार्टी दिल्ली के सुशासन के नाम पर लोगों से घर-घर जाकर वोट की अपील करेगी।

परंतु चुनावी पंडित बता रहे हैं कि मैदानी इलाकों में कुछ हद तक आपका प्रभाव दिखाई पड़ता है और हो सकता है कि है कि मैदानी इलाकों में आप का खाता खुल जाए परंतु पहाड़ी क्षेत्रों में अभी भी आपको अपनी पकड़ बनाने के लिए लंबी जद्दोजहद करनी पड़ेगी।

वहीं दूसरी ओर यदि हम यूकेडी की बात करें तो जनता के मन-मस्तिष्क में यूकेडी है चाहे वह पहाड़ हो चाहे मैदानl जनता यूकेडी से आशातीत है कि यूकेडी अवश्य ही ऐसे चेहरे राजनीति के मैदान में उतारेगी जो जनप्रिय एवं जुझारू हो तथा जो यूकेडी के बलिदान एवं योगदान को जनता के समक्ष प्रस्तुत कर सकें।

दोनों पार्टियां पूरे जोर-शोर से उत्तराखंड में तीसरा राजनीतिक विकल्प बनने की होड में लगे हैं। इसके अलावा बसपा और सपा भी कहीं ना कहीं इस दौड़ में एक अल्पमत की सरकार बनने का इंतजार करेगी और अल्पमत सरकार की बैसाखी बनने का पूर्ण प्रयत्न करेगी, परंतु अटल सत्य यही है कि चुनावी युद्ध बीजेपी और कांग्रेस में ही लड़ा जाएगा और इस बार के चुनावी समीकरण कह रहे हैं कि इस बार विधानसभा चुनाव बड़े रोचक होने जा रहे हैं ।

प्रदेश को फिर से एक बार अस्थिर सरकार मिलने की उम्मीद जताई जा रही है अर्थात पूर्ण बहुमत से कोसों दूर, और इस स्थिति में फिर किंग मेकर की भूमिका में थर्ड फ्रंट ही रहेगा, और दोनों पार्टियां थर्ड फ्रंट को अपनी ओर आकर्षित करने का पूर्ण प्रयत्न करेगी।

ऐसा प्रतीत होता है कि बीजेपी को शासित सरकार होने का फायदा मिलता दिखेगा और बीजेपी इस मौके को भुनाने में कोई भी कसर नहीं छोड़ेगीl दूसरा चुनावी फायदा बीजेपी को शीतकालीन राजधानी (गैरसैण) का अवश्य मिलेगा क्योंकि बीजेपी ने शीतकालीन राजधानी गैरसैण का ऐसा सिक्स मारा है जिसकी गेंद कांग्रेस की बाउंड्री लाइन से बहुत दूर जा गिरी है और कांग्रेस पार्टी क्षेत्ररक्षण में अपना वक्त जाया नहीं करेगी।

जिसका कहीं ना कहीं अप्रत्यक्ष रूपेण फायदा 2022 विधानसभा चुनाव में बीजेपी को अवश्य मिलेगा परंतु देखना बड़ा ही दिलचस्प होगा कि क्या प्रदेश की जनता अल्पमत की सरकार को चुनने के लिए तैयार है। और पुनः अल्पमत का दंश प्रदेश के विकास में अवश्य ही रोड़ा बनेगा।

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