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नामदार को काम नहीं, कामदार को नाम, फर्जी सम्मान पत्रों से लूटी जा रही खूब वाहवाही

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Corona Warriors: नामदार को काम नहीं, कामदार को नाम, फर्जी सम्मान पत्रों से लूटी जा रही खूब वाहवाही

Corona Warriors:

देहरादून। अमित रतूड़ी
कितनी अजीब बात है काम न करने वाले का नाम और काम करने वाले का नाम न होना।इन दिनों सोशल मीडिया पर ऐसे नकली कोरोना वारियर्स खूब देखने को मिल रहे हैं।

दरअसल असली कोरोना योद्धा तो दिनरात मोर्चे पर डटे हुए हैं और उन्हें किसी सम्मान की आवश्यकता भी नहीं।
देश क्या पूरा विश्व महामारी की चपेट में हैं। भारत के उत्तराखंड राज्य में भी कोरोना अपनी जड़े जमा चुका है।

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ऐसी विषम परिस्थितियों में लोगों की जान बचाने के लिए दिन रात पुलिस फोर्स, डाक्टर, राजनीतिज्ञ, समाजसेवी दिनरात एक किए हुए हैं और इन्हें किसी सम्मान का लालच भी नहीं। उत्तराखंड टुडे का मकसद किसी के सम्मान को आहत करना नहीं है।

बल्कि हकीकत से प्रदेश की जनता को रूबरू कराना है। जिन लोगों ने अभी तक इस कोरोना महामारी काल में जनता हित में कोई कार्य भी न किया हो उन्हें तथाकथित संस्थाएं चने की तरह सम्मान पत्र वितरित कर रही हैं।

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फिर सोशल मीडिया पर उन सर्टिफिकेटों को पोस्ट कर वाहवाही लूटने का दौर भी जारी है। कह सकते हैं कि नकली कोरोना योद्धा सर्टिफिकेटों को सोशल मीडिया पर पोस्ट कर हंसी का पात्र भी बन रहे हैं। उधर, लाॅक डाउन के चलते इंसानों से लेकर बेजुबानों तक की मदद करने वाले ऐसे लोग अभी भी मदद के मोर्चे पर हैं।

असल बात तो यह है कि जिन कोरोना योद्धाओं को चने की तरह सम्मान पत्र वितरित किए गए हैं उनके पास तो एक काम भी बताने के लिए नहीं है कि उन्होंने कोरोना में कौनसा ऐसा काम किया जो वह सम्मान के लायक हैं।

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लोगों का कहना है कि ऐसी समाजसेवी संस्थाएं जो चने की तरह सम्मान पत्रों की बंदर बांट कर रही हैं। वह संस्थाओं के नाम पर गोरखंधंधों की कवायद भी शुरू करना चाहते हैं।

ऐसी संस्थाओं का अस्तित्व, हैसियल और कानूनी मान्यता के साथ वह किस आधार पर और किसके किस काम पर सम्मान पत्र बांट रही है इन सभी बिंदुओं की जांच होनी चाहिए।

ऐप से भी बन रहे नकली सर्टिफिकेट-
आईटी सेक्टर के जानकारों का यह भी दावा है कि एंड्रॉयड मोबाइल पर कुछ ऍप्लिकेशन ऐसी भी हैं जिन पर फर्जी सर्टिफिकेट भी बना सकते हैं।

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अब सवाल यह है कि अगर ऐसी एप्लिकेशन से सर्टिफिकेट बनाकर सोशल मीडिया पर पोस्ट किए जा रहे हैं तो आप इन लोगों की मानसिकता को परख सकते हैं। या कह सकते हैं कि यही हैं नामदार जिनका कोई काम नहीं।

ये हैं कामदार कोरोना वारियर्स-
घर परिवार को छोड़कर लोगों की जान बचाने में जुटे स्वास्थ्य कर्मी, सीमा पर देश की सुरक्षा में डटे सैनिक, नागरिक सेवा, सुरक्षा में दिन रात लगे पुलिस के जवान, गरीब असाहयों को दो वक्त का भोजन उपलब्ध कराने वाली समाजिक संस्थाएं इसके अलावा जिन्होंने जरूरतमंद को मदद करने की ठानी है।

यह असल में सम्मान के हकदार हैं। लेकिन दरियादिली यह है कि इन कामदारों को सम्मान पत्र की जरूरत नहीं बल्कि लाखों लोगों की दुआएं ही इनका सम्मान है। ऐसे कर्मवीर योद्धाओं को भी शासन प्रशासन, समाजिक संस्थाओं के द्वारा सम्मान मिलना चाहिए।

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