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उत्तराखंड: कैबिनेट की बैठक में आबकारी नीति में हुआ संशोधन, जानिए अन्य फैसले…

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UT- सरकार ने आबकारी से हो रहे राजस्व नुकसान को कम करने के लिए आबकारी नीति में संशोधन किया है। मंत्रिमंडल ने आवंटन के लिए शेष बची 234 शराब की दुकानों को टेंडर प्रक्रिया की जगह लाटरी से देने का निर्णय लिया है।

शराब कारोबारियों को भी बड़ी राहत दी गई है। लाटरी से दी जाने वाली दुकानों को तय राजस्व लक्ष्य से 65 प्रतिशत कम पर आवंटित किया जाएगा। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की अध्यक्षता में बुधवार को सचिवालय परिसर में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में रखे गए 8 में से 7 प्रस्तावों को मंजूरी मिली है।

वित्तीय वर्ष 2019-20 की आबकारी नीति के तहत 3150 करोड़ का लक्ष्य सरकार ने तय किया था। 619 शराब दुकानों के आवंटन के लिए पिछले वित्तीय वर्ष में हासिल राजस्व से 20 प्रतिशत अधिक पर आवंटित करने का फार्मूला निकाला गया।
अन्य प्रमुख फैसले
इससे नाखुश ठेकेदारों ने 234 दुकानें नहीं खरीदीं, जिससे पहली वित्तीय तिमाही में आबकारी विभाग को तय लक्ष्य से डेढ़ सौ करोड़ से अधिक नुकसान हुआ। आखिरकार बढ़ते राजस्व घाटे के चलते सरकार को बैकफुट पर आना पड़ा।

छठे वेतन आयोग के एरियर की प्रतिपूर्ति केंद्र से
मंत्रिमंडल ने शासकीय और अशासकीय कालेजों में तैनात कर्मचारियों को सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों के तहत लाभ देने को मंजूरी दी है। 1 जनवरी 2016 से 31 मार्च 2019 तक के एरियर भुगतान में 130 करोड़ का खर्च हुआ। मंत्रिमंडल ने पचास प्रतिशत एरियर भुगतान के लिए केंद्र से 65 करोड़ से प्रतिपूर्ति मांगी, जिस पर वित्त विभाग ने आपत्ति दर्ज कराई है।

वित्त विभाग का कहना था कि सरकार को पहले छठे वेतन आयोग के एरियर के लिए दी गई धनराशि की प्रतिपूर्ति केंद्र से करने की प्रक्रिया अमल में लानी चाहिए। मंत्रिमंडल ने वित्त के परामर्श को दरकिनार कर सातवें वेतन आयोग के एरियर के लिए प्रतिपूर्ति प्रस्ताव केंद्र को भेजने की मंजूरी दे दी, लेकिन साथ ही संबंधित विभाग को निर्देश दिए है कि वे छठे वेतन आयोग की सिफारिशों के तहत किए गए एरियर भुगतान का पचास प्रतिशत केंद्र से मांगने की प्रक्रिया को भी शुरू करे।

अन्य फैसले:
– 24 जून से शुरू हो रहे दो दिवसीय विधानसभा सत्र में लाने जाए वाले विधायी कार्य को मंजूरी।
– उत्तराखंड प्रिंट मीडिया नियमावली में संशोधन।
– शासकीय और अशासकीय कालेजों में सातवें वेतनमान के दिए लाभ का 50 प्रतिशत (65 करोड़ रुपये) की प्रतिपूर्ति के लिए केंद्र को जाएगा प्रस्ताव।
मदन कौशिक को संसदीय कार्यमंत्री का प्रभार
वित्त एवं संसदीय कार्यमंत्री प्रकाश पंत के निधन के बाद मंत्रिमंडल विस्तार की चर्चाओं पर मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने फिलहाल विराम लगा दिया है। मुख्यमंत्री ने 24 जून से शुरू हो रहे विधानसभा सत्र के लिए शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक को विधायी एवं संसदीय कार्यमंत्री का प्रभार दे दिया है। मंत्रिमंडल में तीन पद रिक्त हैं, जिन पर कई विधायक दावेदार हैं।

प्रकाश पंत के निधन के बाद विधानसभा सत्र में संसदीय कार्यमंत्री के प्रभार को लेकर कई तरह की चर्चाएं चल रही थीं। अमर उजाला ने इस मामले में प्रकाशित किया था कि मुख्यमंत्री फिलहाल मंत्रिमंडल का विस्तार नहीं करेंगे, जबकि किसी एक मंत्री को विधानसभा सत्र के दौरान अस्थाई तौर पर प्रभार दिया जाएगा। मुख्यमंत्री ने बुधवार को कैबिनेट में फेरबदल पर विराम लगाते हुए कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक को को संसदीय कार्यमंत्री का जिम्मा सौंप दिया।

मुन्ना की हो सकती है ताजपोशी
सरकार के विधायी एवं संसदीय कार्यमंत्री का एक कैबिनेट मंत्री को अस्थाई प्रभार देने से साफ है कि जल्द मंत्रिमंडल का पुनर्गठन होगा। वित्त एवं संसदीय कार्यों के लिए विकासनगर विधायक मुन्ना सिंह चौहान को मुख्यमंत्री कैबिनेट में जगह दे सकते हैं। इसके अलावा ढाई वर्ष से रिक्त चल रहे दो अन्य मंत्री पदों के लिए कुमाऊं और गढ़वाल से एक एक चेहरा लिया जाएगा।

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