Connect with us
spiii

उत्तराखंड

गाथा एक उत्तराखंडी की ——————— शम्भुशरण रतूड़ी की कलम से

गाथा एक उत्तराखंडी की ——————— शम्भुशरण रतूड़ी की कलम से

गाथा एक उत्तराखंडी की ——————— शम्भुशरण रतूड़ी की कलम से

ezgif.com resize

ajax loader


30 अप्रैल 2020 की सायं करीब 5 बजे के आसपास गढ-कुमाऊँ पर्वतीय समाज-विरार के कोषाध्यक्ष श्री दिनेश अंथवालजी का फोन आता है और बताते हैं कि अभी हमारी संस्था से जुड़ी एक महिला का संदेश आया कि हमारा एक सम्बन्धी दिल्ली में पिछले दो हफ्ते से बहुत ज्यादा परेशान है……. ।

अर्थात श्री अंथवालजी व अमुक महिला के बातचीत का लब्बोलुआब यह था कि- *लोहाघाट (चंपावत) निवासी जो दिल्ली के उत्तमनगर में रहता है वह लौकडाउन के कारण बहुत परेशान है ….।

और उस व्यक्ति को मदद चाहिये । मैने प्रत्युत्तर में कुछ नाराजगी अंदाज में *श्री अंथवालजी* को बोला कि हम यहां से क्या कर सकतें हैं । वहां (दिल्ली में) कई सामाजिक संस्थाओं सहित उत्तराखंड की कई जानी मानी संस्थायें काम कर रही है । जिसमें भिलंगना विकास समिति, गढ़वाल सभा, उत्तराखंड जनमोर्चा जैसी संस्थाओं सहित सरकार भी लोगों को राशन वितरित कर रही है ।


और मैनें श्री अंथवालजी का फोन काट दिया ।
कुछ समय तक मेरे मस्तिष्क पटल पर यही हलचल थी कि अमुक व्यक्ति ने मुंबई से क्यों मदद मांगी ?
अंततः श्री अंथवालजी द्वारा दिये गये मोबाइल पर मैने दिल्ली में अमुक व्यक्ति से संपर्क किया ।

(मानवता के मध्यनजर मैं व्यक्ति का नाम नहीं बता सकता)
करीब 20 मिनट तक मैने अमुक से बात की तो बातचीत के दौरान मैंने गहराई से अनुभव किया कि वास्तव में उस व्यक्ति के घर में पिछले 3-4 दिन से चूल्हा नहीं जला ।

वह एक ढाबे में कार्यरत था जो इस महामारी के दौरान बंद हो गया और मालिक ने भी हाथ खड़े कर दिये । और उस सज्जन के पास जो थोड़ी जमा पूंजी थी वह भी समाप्त हो गयी । पत्नी गर्भवती थी

और इसी दर्मियान उसकी पत्नी ने एक बेटे को जन्म दिया । अर्थात बूढ़े माता पिता व एक 4 साल की बेटी एवं प्रसूती पत्नी व नवजात शिशु !

तो कोई भी अंदाजा लगा सकता है कि इस प्रस्थिति में उस व्यक्ति पर क्या बीत रही होगी ।
फिर क्या हुआ ?


(……शेष कल के अंक में )

कल का शेष….

गाथा एक उत्तराखंडी की

शम्भुशरण रतूड़ी की कलम से


आधा घंटे बाद फिर मैने अमुक को फोन किया कि आप धैर्य रखिए और कल सुबह तक कुछ न कुछ बन्दोबस्त हो जायेगा ।

और इसी वार्तालाप के दौरान उसके गांव तहसील का भी पता हो गया और यह बात यहां उल्लेखनीय है कि जब आदिमी पारिवारिक परेशानी से गुजरता है और खास कर भूख से तो वह साफ साफ अपना बायोडाटा बता ही देता है ।


खैर अब मैने निश्चय कर लिया कि उस अमुक व्यक्ति की मदद अवश्य करनी होगी ।
तो सबसे पहले मैने दिल्ली में निवास कर रहे वरिष्ठ समाज सेवी व भिलंगना विकास समिति के संस्थापक अध्यक्ष श्री इन्द्रदत्त जी पैन्युली जिनसे मेरे पारिवारिक सम्बन्ध भी है को फोन किया और उनसे उत्तमनगर निवासी अमुक की सारी व्याथा-कथा सुनाई…..।

तो श्री पैन्युलीजी यह सुनकर हतप्रभ रह गये कि दिल्ली में एक उत्तराखंडी परिवार की यह दशा ! उन्होंने मुझे कहा कि हमारे संज्ञान में ये बाते तो है नहीं । जबकि हमारी संस्था के लोग उत्तमनगर में इस विकट प्रस्थिति में काम कर रहे हैं ।

तथापि श्री पैन्युलीजी ने मुझे आश्वासन दिया कि मैं कल सुबह (1 मई 2020) तक अमुक की अवश्य मदद करुंगा ।इसी बीच श्री पैन्युली जी ने मुझे संस्था के महासचिव शिवसिंह राणाजी का नं भी दिया कि आप इनसे भी संपर्क कीजिये ।

मैने कुछ समय बाद श्री शिबसिंह राणाजी को फोन पर संपर्क किया । तो उन्होंने तपाक से बोल दिया कि मुझे श्री पैन्युलीजी ने सब कुछ बता दिया है और आप निश्चिन्त रहें । कल सुबह तक अमुक हमारा आदिमी आवश्यक सामग्री लेकर पहुंच जायेगा ।


दूसरे दिन अर्थात 1 मई 2020 को मैने लोहाघाट-चंपावत के विधायक श्री पूरणसिंह फर्त्याल से बात की और उत्तमनगर निवासी अमुक की व्यथा का वर्णन किया । विधायक महोदय ने ध्यानपूर्वक बातें सुनी और आश्वस्त किया कि अवश्य और शीघ्र ही मैं इस अमुक की मदद करने का भरसक प्रयास करुंगा ।


(यह अलग बात है कि मान्यवर की ओर से मदद अभी तक नहीं पहुंची)
करीब सुबह 9 बजे श्री पैन्युली जी को फोन किया कि मदद का क्या हो रहा है ? मगर श्री पैन्युलीजी ने पहले ही श्री राणाजी को काम पर लगा दिया था ।

और वह थे ! राज्य आन्दोलनकारी तथा उत्तराखंड जनमोर्चा के महासचिव श्री सुरेशानन्द बसलियालजी !
जब यह संदेश श्री बसलियालजी तक पहुंचा तो वे बताये पत्ते पर पहुंच गये । क्योंकि श्री बसलियालजी उत्तमनगर के उसी इलाके में रहते हैं । तो उन्होंने जब अमुक की हालात का जायजा लिया तो वे भी द्रवित हो गये ।


तत्पश्चात श्री बसलियाल जी ने अमुक को जीवन आवश्यक खाद्य सामग्री उपलब्ध करवायी । और यहां की पूरी रिपोर्ट श्री इन्द्रदत्तजी पैन्युली और श्री शिवसिंह राणाजी को दी कि वास्तव में उत्तराखंड के इस युवक की स्थिति बेहद दयनीय है ।


दूसरे दिन 2 मई को श्री पैन्युली जी ने अमुक को 1500 रुपये नकद व और खाद्यान्न भेजा जिससे एक परिवार को भरपेट भोजन व बच्चों का दूध का बन्दोवस्त हो सका । तथा और भी मदद का आश्वासन दिया ।


इसके बाद अमुक का मेरे लिये फोन आया और बेहद आभार प्रकट करते हुये कह रहा था कि- *रतूड़ी जी ! आप मेरे लिये भगवान हैं औ *श्री पैन्युली जी, श्री राणाजी, व श्री बसलियालजी* मेरे लिये देवदूत बनकर आये वरना क्या होता ?


मैने प्रत्युत्तर में अमुक से कहा- *मित्र ! हम कोई भगवान नहीं है । सिर्फ इतना संतोष जरुर हुआ कि एक भूखे परिवार को समाज के इन मानुषियों ने खाना पहुंचाया ।
मैं धन्यवाद ज्ञापित करना चाहता हूं

*सर्वश्री इन्द्रदत्त पैन्युलीजी, शिवसिंह राणाजी, व सुरेशानन्द बसलियालजी* एवं उनकी पूरी टीम का जिनके जज्बे में मातृभूमि के संकटग्रस्त लोगों को मदद पहुँचना है । ऐसे महामानुषी तपस्वीयों को मैं सलाम करता हूं जिन्होंने मेरे आग्रह पर अमुक को मदद पहुंचायी !


श्री पैन्युली जी को तो मैं भली प्रकार जानता हूं ! जो हर वक्त लोक कल्याण में समर्पित रहते हैं । समाज सेवा ही उनकी सर्वभौमिकता है ।

यद्यपि विशाल हृदय के स्वामी श्री पैन्युली जी के जीवन के इन चातुर्दिक मोडो पर कुछ घटनाये घटी मगर ज्ञान और भक्ति का यह तेजोमय तपस्वी कभी विचलित नहीं दिखे और समाज सेवा अपना पहला धर्म रखा ।


जबकि श्री राणाजी व श्री बसलियालजी से मेरी मुलाकात कभी नहीं हुयी । परन्तु एक आपछाण की विनय को उन्होने हृदय की गहराई से लिया ।
अंत में श्री दिनेश अंथवालजी व रमेश्वर पैन्युली

का भी आभार जिन्होंने इस दौरान मेरा मार्ग दर्शन किया ।

पुनश्च आभार ! वंदन !! अभिनन्दन ! ! !
त्रिमूर्ती पैन्युली जी,राणाजी, बसलियालजी आपका संपूर्ण जीवन मंगलमय हो ।

Continue Reading
Advertisement

More in उत्तराखंड

उत्तराखंड

उत्तराखंड

देश

देश

ट्रेंडिंग खबरें

Recent Posts

Like Facebook Page

To Top
0 Shares
Share via
Copy link
Powered by Social Snap