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उम्मीद: सरकारी बागवानी अब निजी हाथों में जाने का हो सकता है फैसला..

उत्तराखंड

उम्मीद: सरकारी बागवानी अब निजी हाथों में जाने का हो सकता है फैसला..

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देहरादून। राज्य में लगभग 93 सरकारी बागवान हैं। उद्यान हैं। उत्तराखण्ड गठन के बाद से लेकर अभी तक इन बागवानों से सरकार को कोई अच्छा आउट पुट नहीं मिल पाया जबकि उद्यानों पर बजट ही लगता आया है।

ऐसे में सरकार का कृषि मंत्रालय इन बागवानों को निजी हाथों में सौंपने की तैयारी कर रहा है। इसके लिए विभाग ने तीन कैटागरी बनाई हैं ए, बी और सी. ए कैटगरी के 32 उद्यानों को विभाग अपने पास रखेगा, शेष बी और सी कैटगरी के 61 उद्यानों को निजी हाथों में सौंप दिया जाएगा।

इसमें भी बी कैटगरी के उद्यानों के लिए अगर किसी विभाग की ओर से प्रस्ताव आता है तो उन्हें प्राथमिकता दी जाएगी। उद्यान मंत्री सुबोध उनियाल का कहना है कि यह प्रस्ताव शीघ्र ही कैबिनेट में लाया जाएगा।

पहले फेल हो चुका है यह प्रयोग
उत्तराखंड में पहले भी इसी तरह उद्यानों को निजी स्तर पर दिया जा चुका है। एनडी तिवारी सरकार के समय में इसी तरह 108 उद्यान निजी हाथों में सौंप दिए गए थे लेकिन यह प्रयोग सफल नहीं हो पाया। इन्फ्रांस्ट्रक्चर और तमाम खामियों के अभाव में उद्यान लगातार घाटे का सौदा साबित होते रहे।

बाद के सालों में लोगों ने खुद ही सरेंडर कर दिया। वर्तमान में माणाघेर, घिमतोली, सूपी, बटवाल कौडिया फार्म मात्र पांच उद्यान ही प्राइवेट हाथों में ही हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के आधार पर उद्यान के क्षेत्र में काम करने वालों का कहना है कि सरकारी उद्यान कुबेर का खजाना हैं। इनका ढंग से रख रखाव किया जाय तो यह राज्य में बागवानी के क्षेत्र में मील का पत्थर साबित हो सकते थे।

लेकिन पहले उद्यान विभाग ने इनकी दुर्दशा की और फिर प्राइवेट हाथों में सौंपे जाने से इनकी स्थिति बद से बदतर हो गई।

बिना इन्फ्रास्ट्रक्चर के इनकी दशा को नहीं सुधारा जा सकता है। कई खामियों के चलते उद्यान घाटे का सौदा बनकर रह गए। अच्छा होता कि सरकार प्राथमिकता के आधार पर खुद इनका संचालन करती।

वंही मंत्री सुबोध उनियाल का कहना है कि सभी बातों को ध्यान में रखकर कैबेनेट में यह प्रस्ताव रखा जाएगा।

क्या कहते हैं जनप्रतानिधि
वंही सरकार के इस निर्णय पर जनप्रतनिधि और सामाजिक कार्यकर्ता सुंदर रुडोला का कहना है कि सरकार का अगर यह फैसला धरातल पर उतरता है तो इसका स्वागत किया जाना चाहिए,

क्योंकि कोरोना महामारी के चलते इसमे भी बेरोजगार युवकों के लिए रोजगार और आत्म निर्भर बनने की अपार संभावनाएं है, इससे निजी हाथों को अपनी आजीविका चलाने में बल मिलेगा, बशर्ते सरकार का सहयोग लगातार मिलता रहे।

कहा कि कोरोना से लोगों के रोजगार छिन्न गए हैं। इस निर्णय से बेरोजगारों को कृषि उद्यान क्षेत्र में बहुत अधिक सहायता मिलेगी।

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