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राजनीति: प्रदेश की राजनीति गरमा ने लगी, डॉ हरक आखिर क्यों बोल गए ऐसा

देहरादून। कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत के बयान के सियासी मायने टटोले जा रहे हैं। कोई इसे उनकी नाराजगी से जोड़कर देख रहा है तो कोई इसे बहुगुणा के लिए राज्यसभा के टिकट की लॉबिंग बता रहा है।

सच्चाई चाहे जो भी हो, लेकिन अगला विधानसभा चुनाव न लड़ने के हरक के बयान ने प्रदेश की राजनीति को गरमा दिया है।

जब एक ओर प्रदेश की सरकार कोरोना संकट से उबरने का प्रयास कर रही है और उसके सामने राज्यसभा का चुनाव भी है। ठीक ऐसे वक्त में सरकार के मंत्री हरक सिंह का चुनाव न लड़ने को लेकर आया बयान दबाव की राजनीति के तौर पर भी देखा जा रहा है।

लेकिन यह बात कई लोगों को हजम नहीं हो रही है कि सन्निर्माण कर्मकार बोर्ड के अध्यक्ष पद से विदाई की कहानी चुनावी राजनीति के मोड़ पर आकर क्यों अटक गई है? सियासी जानकार इसे राज्यसभा चुनाव से जोड़कर देख रहे हैं।

उनका मानना है कि हरक एक तीर से दो निशाने साधना चाह रहे हैं। उनके बयान में एक तरफ उनकी नाराजगी दिखाई दे रही है तो दूसरी तरफ दबाव की सियासत। कांग्रेस बगावत कर भाजपा में आए विधायकों में विजय बहुगुणा ही अकेले नेता हैं, जिनका भाजपा में राजनीतिक पुनर्वास नहीं हो पाया है। हरक का राज्यसभा के टिकट के लिए बहुगुणा की खुलकर पैरवी करना रणनीतिक माना जा रहा है। राजनीति

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