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साइक्लोजिकल ट्रीटमेंट

टिहरी गढ़वाल

उपचार: घनसाली दुष्कर्म पीड़िता को मानसिक दंश से उबारने की तैयारी, मिलेगा साइक्लोजिकल ट्रीटमेंट

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टिहरी। भिलंगना ब्लॉक के पुरवाल गॉव (हिन्दाव) में शर्मसार करने वाली घटना सामने आने के बाद पीड़ित बच्ची को अब सबसे पहले मानसिक स्तर पर ठीक और मजबूत करने की अत्यंत आवश्यकता है। इसके लिए टिहरी स्थित चाइल्ड हेल्प लाइन ने कवायद शुरू भी कर दी है। जिसके तहत पीड़िता को मानसिक स्तर पर मजबूत करना उनकी सबसे पहली प्राथमिकता है।

उलेखनीय है कि घनसाली विधानसभा के भिलंगना ब्लॉक पुरवाल गांव में मानवता को तार तार करने वाली घटना सामने आई तो पूरा जिला सकते में आ गया। हुआ यूं कि 65 वर्षीय गोपेश्वर प्रसाद तिवारी ने 6 साल की बच्ची के साथ दुष्कर्म कर उम्र को शर्मसार कर दिया। बहरहाल पीड़ित का उपचार टिहरी में चल रहा है।

उधर, टिहरी की चाइल्ड हेल्प लाइन को इस बात की भनक लगी तो सभी बच्ची की मानसिक स्तर पर मदद करने को आगे आ गए हैं।

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मोनिका रतूड़ी

चाइल्ड हेल्प लाइन की कॉर्डिनेटर मोनिका रतूड़ी बताती हैं कि बच्ची को मानसिक स्तर पर मजबूत किया जाना है, क्योंकि ऐसे समय मे अबोध बच्चे पर इसका असर सीधे मानसिक स्तर पर पड़ता है।

यही कारण है कि बच्चा तनाव डिप्रेशन का शिकार होकर गलत कदम उठा सकता है, कह सकते हैं कि आत्म हत्या की घटनाएं भी इस लेवल तक पहुंचने पर होती हैं। बताया कि बच्ची को सबसे पहले यह बात समझाना जरूरी है कि वह स्वयं की गलती नहीं बल्कि किसी की अन्य की गलती का शिकार हुई है।

जिसको उसकी सजा मिलेगी। अपने आप मे इस कृत्य के बाद से किसी भी प्रकार से हीन भावना नही लाना है इस बात पर हमेशा सोचते रहना है कि वह कंही भी गलत नहीं है उसकी कोई गलती नहीं है,बल्कि वह गलत है

जिसने इस कार्य को अंजाम दिया है। इसके साथ ही अबोध बालक को उसे मानसिक स्तर पर मजबूत करने के लिए तरह तरह के तरीकों को अपनाया जाता है, खेल,संगीत,काउंसलिंग जैसे माध्यमों से समझाकर पीड़िता को फिट किया जाता है। इसके अलावा स्वयम की रक्षा और आत्म सम्मानित जीवन जीने के तरीकों को भी बच्चे को बारीकी से समझाया जाता है।

बताया कि इसे पूरे ट्रीटमेंट में पीड़ित बच्ची के अभिभावकों का साथ होना भी जरूरी होता है कई बार बच्चा अपनी बातों को खुलकर सिर्फ परिजनों से ही कर पाता है। पूरे विषय मे हमारा प्रयास यही रहता है कि पीड़ित बच्चे को सदमे से पूरी तरह से उभारा जा सके जिससे वह भविष्य में दिक्कतों का सामना न करे।

क्या कहते हैं प्रोजेक्ट हेड
चाइल्ड हेल्पलाइन के प्रोजेक्ट हेड रॉड्स संस्था के निदेशक सुशील बहुगुणा ने बताया कि बच्चों के समूचे विकास को लेकर हेल्पलाइन तत्तपर है।

बच्ची के मामले में कॉर्डिनेटर को उसकी काउंसलिंग के लिए लगाया गया है। बताया कि हेल्पलाइन का मकसद ही यही है कि ऐसे बच्चों को मासिक स्तर पर मजबूत करना है जो समाज की गलतियों की वजह से अपने आप मे असमर्थता महसूस करते हैं।

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