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शिक्षा विभाग-अंधेरी नगरी चौपट राज…

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नई टिहरी धनपाल ग़ुनसोला UT। एक ओर जहां स्कूलों में शिक्षकों का टोटा बना हुआ है वहीं दूसरी ओर शिक्षा विभाग ने अंग्रेजी जैसे प्रमुख विषय के प्रवक्ता को स्कूल की बजाए मुख्य शिक्षाधिकारी कार्यालय में पिछले नौ सालों से अटैच कर रखा है। वैसे तो सरकार ने अटैचमेंट की व्यवस्था खत्म कर रखी है। लेकिन राजनैतिक रसूख के आगे सब कुछ जायज है।
जी हां नरेंद्रनगर ब्लॉक के राजकीय इंटर कालेज बेड़धार में अहसान अहमद खान की तैनाती बतौर अंग्रेजी प्रवक्ता के रूप में हुई थी। लेकिन कुछ समय बाद ही प्रवक्ता महोदय को इस दूरस्थ क्षेत्र में रहना नागवारा हुआ। उन्होंने अपनी राजनैतिक पहुंच के चलते वर्ष २०१० में मुख्य शिक्षाधिकारी कार्यालय नरेंद्रनगर में अपना अटैचमेंट करवा दिया। शिक्षा विभाग ने प्रवक्ता खान को बतौर विधि सहायक अपने कार्यालय में रखा। वर्ष बीतते गए लेकिन प्रवक्ता महोदय को शिक्षा विभाग मूल विद्यालय भेजना भूल गया। इस बीच जीआईसी बेड़धार के छात्र-छात्राएं बिना अंग्रेजी के शिक्षक के पठन-पाठन करते रहे। शिक्षक की कमी के कारण इसका असर छात्रों के अंग्रेजी विषय के नंबर पर भी पड़ा। पूर्ववर्ती सरकार के आदेश को खारिज करते हुए वर्तमान भाजपा सरकार और तेज तर्रार शिक्षा मंत्री अरविंद पांडेय ने शिक्षा विभाग में अटैचमेंट व्यवस्था को खत्म करने की बात कही। लेकिन प्रवक्ता महोदय की राजनैतिक पहुंच के चलते उन्हें करीब दस साल बाद भी मूल विद्यालय नहीं भेजा जा सका है।
इस बाबत सीईओ दिनेश चंद्र गौड़ का कहना है कि अहसान अहमद वर्ष २०१० से सीईओ कार्यालय में बतौर विधि सहायक के रूप में अटैच हैं। विभाग के कुछ अन्य अधिकारियों को लीगल मैटर हैंडिल करने के संबंध में अहसान अहमद की सेवांए ली जा रही है। साथ ही अवैध वसूली का कार्य तथा कर्मचारियों को परेशान करता है। जल्द ही उन्हें मूल विद्यालय भेजने की प्रक्रिया की जाएगी।

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