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उत्तराखंड

घनसाली: धार्मिक भावनाओं पर फर्जी टिप्पणी करने वाले शिक्षक पर याचिका दायर…।

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UT- धार्मिक भावनाओं को आहत करने के आशय से दुष्प्रेरक पूर्ण कृत्य , अभियुक्त विनोद श्रीवांण एक शिक्षक हैं। जो कि मूल् निवासी ग्राम सभा चानीबासर का रहने वाला है. और वर्तमान समय मे डोडग प्रताप नगर जू. हा. स्कूल में कार्यरत हैं।

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विनोद श्रीवांण का ब्य्यान आया जिसमें उन्होंने ब्राह्मण समाज पर अपनी मानसिकता को दर्शाते हुए बहुत ही मन को ठेस पहुंचाने वाले ब्यान दियें हैं।

उनका कहना है कि कोरोना में दवाई की क्या जरूरत है हमारे ढोंगी पंडितों की सुनो।

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गोमूत्र पिवो और ठीक हो जाओ क्योंकि ये 90 प्रतिशत लेकर इतने योग्य बने है और दूसरी बात जब तुम्हारे तंत्र मंत्र में इतनी शक्ति है जो गोबर का गणेश बना सकते हो तो गोबर से कोरोना की दवाई नही बना सकते या तंत्र मत्र से कोरोना को भंगा नही सकते,

तुम्हारे गरूड़ पुराण में लिखा है कि यहाँ दान दो और वो पितरों तक पहुँच जायेगा तो ऐसा कोई मंत्र नही है की यहाँ कोई मंत्र बोले और कोरोना वापस चीन चले जाये और जहाँ तक आरक्षण की बता है

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तो 5 , 8 पास पंडित आज गांव से शहर जा कर बड़ा विद्वान बन गया मंदिरों में पूजा कर रहा है वो आरक्षण नही है कि उस पर सिर्फ एक जाति विशेष के लिए है मैं अपने गांव में कई उदाहरण बता सकता हूँ

जिनको अपनी नाक साफ करनी नही आती थी वो आज बड़े पण्डित बने फिर रहे है ओर आगे अन्य टिप्पणीयों में लिखा है कि “ मैं ऐसे धर्म को लात मारता हूँ जिसको तुम धर्म और शास्त्र कहते हो ये नकली धर्म शास्त्र है ।

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वह पेशे से एक शिक्षक है और एक शिक्षक ही होता है जो अपने समाज को सुधारने के साथ साथ अपनी समाज में अपनी संस्कृति और सभ्यता को संजोए रखता है।


हमारे वेदिक सनातन मे सर्वथा सबसे पहला और ऊंची महिमा व्यास गद्दी की है और दूसरा स्थान एक गुरु (शिक्षक) को दिया गया है जिसकी गोद में संसार का आरंभ और प्रलय पलता है ।

एक शिक्षक होता है जो कि हमारी पीढ़ियों को हमारी संस्कृति और संस्कार के साथ साथ हमारी सभ्यताओं से और आध्यात्म से जोड़ता है।

एक शिक्षक (गुरु) हमको धर्म का पालन और धर्म की रक्षा हेतु हमे प्रेरणा देता है। वहीँ विनोद श्रीवांण अपनी घटिया मानसिकता को दर्शाते हुए अपने मूल् अनैतिक विचारो से असभ्य होने का प्रमाण दे रहे हैं।

इनको समझना चाहिए कि ब्राह्मण की वजह से यह समाज चल रहा है ब्राह्मणों की वजह से ही लोगों मे धार्मिक विश्वास अभी तक जीवित है।

ब्राह्मण इस समाज का एक अभिन्न अंग है जिस समाज में ब्राह्मणों का गौ का मान नहीं होता वह कभी भी सफल समाज नहीं बन सकता उसके सर्वथा विनाश होने निश्चित है।

याचिकाकर्ता मदनमोहन कंसवाल । समस्त बाह्मण सभा पंजाब व समस्त बाह्मण सभा मेरठ व समस्त बाह्मण सभा उत्तराखंड । काफी आक्रोश में है

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