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करतूत: प्रधान की तानाशाही, बिना आदेश के तुड़वाया विधवा महिला का घर, अब महिला आमरण अनशन को तैयार…

उत्तरकाशी

करतूत: प्रधान की तानाशाही, बिना आदेश के तुड़वाया विधवा महिला का घर, अब महिला आमरण अनशन को तैयार…

उत्तरकाशी। उत्तरकाशी जनपद के विकासखंड डुण्डा के ग्राम टिपरा में एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। जहां ग्राम प्रधान व ग्रामीणों ने लिंक मार्ग चौड़ीकरण के नाम पर एक अनुसूचित जाति की विधवा महिला का मकान तोड़ दिया। हैरानी की बात यह है कि मकान तोडऩे से पूर्व पीडि़त को कोई नोटिस या आदेश की कॉपी नहीं दी गई। इस घटना से हताश और निराश एससी विधवा महिला और उसकी सास ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि उन्हें शीघ्र नहीं मिला तो वे बच्चों सहित अपने आवास पर ही आमरण अनशन के लिए बाध्य हो जाएंगी और यहीं पर अपने प्राण त्याग देंगी। घटना उत्तरकाशी से लेकर देहरादून तक चर्चा का केंद्र बनी हुई है।

शांता देवी पत्नी स्व. भरपूर दास, ग्राम टिपरा, पो. जुणगा, विकासखंड डुण्डा, उत्तरकाशी ने जिलाधिकारी उत्तरकाशी को इस संबंध में शिकायत की है। शांता देवी ने डीएम को लिखे पत्र में कहा कि ग्राम पंचायत टिपरा वि0ख0डुण्डा में जिला पंचायत अध्यक्ष के कुमारकोट से सुरी धार मन्दिर तक लिंक मार्ग की योजना स्वीकृत की गई। जिस कार्य को ग्राम प्रधान सीमा गौड़ की निगरानी में करवाया जा रहा है। रास्ते के अधिक चौड़ीकरण के लिए ग्राम प्रधान के द्वारा गांव की कुछ महिलाओं को काम पर बुलाकर उक्त मार्ग के पास स्थित मेरे घर को बिना किसी मुवावजे व बिना किसी आदेश या नोटिस व बिना किसी प्रशासनिक अधिकारी की देखरेख में जबरन दबंगई दिखाकर व धक्का-मुक्की करते हुए मेरे और मेरी सास के साथ अभद्रता करके हमारे मकान को तोड़ दिया गया।

शांता देवी बताती हैं कि हमारे मकान से उस रास्ते में कोई व्यवधान नहीं था, जिस लिंक मार्ग के निर्माण कार्य की बात हो रही है, वह पहले से ही काफी चौड़ा है व कई वर्षों से इस रास्ते से घोड़े, खच्चर, मवेशी आराम से आ-जा सकते हैं। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि पहले इन लोगों के द्वारा हम पर अनेक प्रकार से दबाव बनाया गया और यह झांसा दिलाया गया कि आप लोगों को किसी योजना से लाभान्वित करेंगे, लेकिन जब हम उनके झांसे में नहीं आए तो प्रधान सीमा गौड़ ने गांव से बुलाई गयी महिलाओं से जबरन मेरे मकान की दीवारें तुड़वा डाली। उन्होंने कहा कि मैं एक गरीब असहाय दलित महिला हूं। वर्षों मेहनत मजदूरी करके मैंने थोड़ा थोड़ा पैसा इकठा करके अपना घर बनाया था, जिसे ग्राम प्रधान द्वारा जबरन तोड़ दिया गया और हम बरसात के मौसम में बेघर हो गए हैं। पीडि़त ने बताया कि मेरी सास और मैं दोनों ही विधवा महिलाएं है। हमारी आजीविका का कोई साधन नहीं है। उक्त घटना से मेरी सास और मुझे बहुत शारीरिक और मानसिक आघात पहुंचा है। ग्राम प्रधान और उनके साथ आई महिलाओं द्वारा हम पर जो धक्का-मुक्की की गई, उससे मेरी सास का शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य बिगड़ गया है। उन्होंने कहा है कि यदि मुझे अति शीघ्र न्याय नहीं मिलता है तो मैं अपने घर पर ही अपने छोटे-छोटे बच्चों व बूढ़ी सास सहित आमरण अनशन पर बैठकर अपने प्राण त्याग दूंगी। उन्होंने जिलाधिकारी से ग्राम प्रधान सीमा गौड़ द्वारा कराए गए इस अमानवीय व्यवहार के लिए उन्हें कड़ी से कड़ी सजा दिलवाने के साथ ही क्षतिग्रस मकान का मुवावजा दिलाकर न्याय की गुहार लगाई है। इस संबंध में टिपर गौर की ग्राम प्रधान सीमा गौड़ से जब पूछा गया कि बिना नोटिस व आदेश के आपने एक असहाय महिला का मकान कैसे तुड़वा दिया तो उनका कहना था कि ऐसा कुछ नहीं है। महिला पहले राजी हो गई थी और अब मुकर गई है।

जब इस संबंध में जुणगा क्षेत्र के राजस्व उपनिरीक्षक अरविंद पंवार से पूछा गया तो उनका कहना था कि अब यह मामला रेग्युलेर पुलिस को ट्रांसफर कर दिया गया है। इस मामले में प्रधान सीमा गौड़ आदि के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर दिया गया है। सवाल यह है कि अनु.जाति की एक असहाय महिला के मकान तोडऩे से पूर्व ग्राम प्रधान द्वारा प्रशासन को सूचित क्यों नहीं किया गया। सवाल यह भी है कि जब पीडि़त द्वारा मकान तोडऩे के वक्त अपनी सास और छोटे बच्चों के साथ इसका कड़ा विरोध जताया गया तो फिर काम को वहीं पर रुकवाने की बजाय जबरन मकान की दीवारों को क्यों तोड़ दिया गया। इससे भी बड़ा सवाल यह है कि ग्राम प्रधान ग्राम पंचायत के मुखिया होने के नाते सबसे पहले शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए अधिकृत होते हैं। जब गांव में इस तरह का विवाद उत्पन्न हो गया तो फिर प्रधान के नेतृत्व में किसी भी गरीब व लाचार के साथ इस तरह से जबर्दस्ती कैसे हो सकती है?बहरहाल, पीडि़त विधवा महिला, उसकी बुजुर्ग सास व छोटे बच्चों के सम्मुख बरसात के मौसम में रहने का संकट खड़ा हो गया है। अब देखना यह होगा कि राजस्व पुलिस से ट्रांसफर होकर रेग्युलर पुलिस में गई जांच के बाद पीडि़त महिला को कब तक न्याय मिल पाता है!

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