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पिथौरागढ़

कामयाबी: पहाड़ का पानी और पहाड़ की जवानी आख़िर पहाड़ के काम आ ही गई, जानिए दंपति की कहानी

पिथौरागढ़। ग्रामीण क्षेत्रों का विकास और पलायन के मुद्दे पर शहरों में रहने वाले राजनीतिज्ञ, समाजसेवी, समाजिक संस्थाएं आये दिन अक्सर शोर करते हैं।

लेकिन असल में पहाड़ से रिश्ता रखने वाले अपने गांव और क्षेत्र में रहकर विकास कार्य निरंतर करते हैं शोर नहीं। ऐसा ही एक उदाहरण है 17 सालों तक कई बड़े मीडिया घरानों में काम कर चुके ऐसे दंपत्ति की कहानी जो शहर की चकाचौंध छोड़कर अपने गांव और अपनी मिट्टी के खातिर अपने गांव पहुंचे।

यह कहानी है गोविंद सिंह और उनकी धर्मपत्नी मनीषा बिष्ट की पहले हम बात कर लेते हैं गोविंद सिंह की जो पिछले 17 सालों से मुंबई से लेकर देहरादून तक कई मीडिया घरानों में सीनियर वीडियो जर्नलिस्ट के तौर पर काम कर चुके और 2019 के अंत में अपने गांव चले गए।

अब बात करते हैं उनकी पत्नी और वर्तमान में ग्राम प्रधान टुंडाचौड़ा की जिन्होंने देहरादून में रहकर अपने पति गोविंद सिंह के साथ पढ़ाई की उन्होंने MA English, GNM(जरनल नर्सिंग मिडवाइफ) और Post Basic Bsc Nursing की पढ़ाई की है।

और उनकी 7 साल औऱ 3 साल की दो बेटियां भी हैं । यह दोनों दंपत्ति पिछले साल ग्राम सभा के चुनाव में अपने गांव गए और ग्राम प्रधान का चुनाव जीता। गोविंद सिंह और उनकी पत्नी मनीषा बिष्ट का गांव जाने का मकसद गांव में हो रहे पलायन, गांव में पानी की समस्या और दशकों से सड़क से वंचित कई ऐसे ज्वलंत मुद्दे थे।

जिन्हें इस दंपत्ति को गांव के लोगों के लिए करना था।गोविंद सिंह और उनकी पत्नी ग्राम प्रधान मनीषा बिष्ट के लिए यह एक चुनौती से कम न थी।

पानी की समस्या के लिए गोविंद सिंह के प्रयासों में पहला कार्य जल संस्थान द्वारा पानी की पाइप लाइन का टेंडर हुआ और नई पाइपलाइन संपूर्ण ग्राम सभा में बिछाई गई।वर्तमान में प्रधानमंत्री जी द्वारा जल जीवन मिशन के तहत हर घर को नल दिया जा रहा है।

उसके बाद सबसे बड़ी चुनौती सूख रहे जल स्रोतों जिसमें धारे और नॉले कैसे जीवित किये जाएं, यह एक कठिन चुनौती थी।

गोविंद सिंह और उनकी पत्नी को यह भली-भांति पहले से ज्ञात था पानी की ग्राम सभा में बहुत समस्या है जिसकी निराकरण के लिए उन्होंने ग्राम सभा का चुनाव लड़ने से पहले देहरादून स्थित शुक्लापुर के हस्को ग्राम में पद्मश्री पद्मभूषण श्री अनिल जोशी जी के भगीरथ प्रयास से जिंदा हुए छोटी आसन गंगा के बारे में माननीय अनिल जोशी जी से पूरी जानकारी ली थी।

किस तरह से उन्होंने सूखे हुए छोटी आसन गंगा नदी को जिंदा किया। उसी फार्मूले के तहत फरवरी 2020 में ग्राम प्रधान मनीषा बिष्ट के नेतृत्व में गोविंद सिंह और ग्राम वासियों ने मनरेगा के तहत विकासखंड के अधिकारियों को लेकर चाल खाल के तहत चार कच्चे तालाबों सहित लगभग 400 से 500 छोटे गढ्डों का निर्माण किया।

यह कच्चे तालाब सूख रहे जल स्रोतों के ऊपर बनाये गए। जिसमें एक धारा और 2 नॉले सम्मिलित हैं। उसके बाद जुलाई के अंतिम सप्ताह में बरसात के मौसम और बरसात से यह कच्चे तालाब भर गए कुछ ही दिनों में जिस तरह से श्री अनिल जोशी जी और हस्को ने छोटी आसन गंगा को जिंदा किया उसी तरह टुंडाचौड़ा ग्राम सभा के ग्राम प्रधान मनीषा बिष्ट के इस प्रयास को सफलता मिली जिससे सूखे हुए तालाब बरसात के पानी से भर गए।

लगभग 15 साल से सूखे हुए धारे और नॉले में पानी आ गया। जिसे देख क्षेत्र के सभी लोगों को आश्चर्य हुआ कि किस तरह से सूखे हुए स्रोत फिर से जिंदा हो गए हैं।

साथ ही दूसरी तरफ जो सबसे बड़ी समस्या क्षेत्रवासियों की थी वह थी सड़क। सड़क न होने की वजह से गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों को स्वास्थ्य लाभ या अस्पताल तक जाने के लिए भी डोली का सहारा लेना पड़ता था।

क्योंकि गांव सड़क से काफी दूर था। इसके लिए गोविंद सिंह और मनीषा बिष्ट ने गांव के युवाओं से श्रमदान से सड़क बनाने की एक नई मुहिम के बारे में बात की।

इसमें टुंडाचौड़ा ग्राम सभा के युवाओं ने अपनी सहमति जताई। मई 2020 से ग्राम सभा टुंडाचौड़ा से यह सड़क निर्माण का कार्य शुरू हुआ जिसमें रास्ते में पढ़ रहे खेतों को सभी युवाओं द्वारा खेत मालिकों से दान करने की अपील की ताकि सड़क गांव तक आ सके, गांववालों ने भी युवाओं को अपने खेत सड़क बनाने के लिए दान कर दिए।

लगभग 10 दिन के बाद आसपास के गांव दुगयीं आगर, इटाना और खेती गाँव इन गांव के लगभग 400 युवाओं ने भी गोविंद सिंह और मनीषा बिष्ट की इस मुहीम में अपना साथ देना शुरू किया।

सड़क निर्माण का कार्य सुबह 5:00 बजे से 9:00 बजे तक फावड़ा और गैती, बेलचा लेकर किया जाता था। इसी बीच उत्तराखंड के मुख्यमंत्री श्री त्रिवेंद्र सिंह रावत जी के मीडिया सलाहकार रमेश भट्ट और वरिष्ठ पत्रकार राजेंद्र जोशी जी द्वारा ग्राम सभा टुंडाचौड़ा को एक जेसीबी पीडब्ल्यूडी की ओर से 7 दिन के लिए मुहैया कराने में मदद की।

साथ ही एक दूसरी जेसीबी क्षेत्र के समाजसेवी राम सिंह बिष्ट जी ने इस श्रमदान से बन रही सड़क निर्माण में अपनी भागीदारी दी। इस तरह से गोविंद सिंह और क्षेत्रवासियों ने सड़क निर्माण का कार्य शुरू किया लगभग 1 महीने के प्रयास से टुंडाचौड़ा, इटाना और दुगयीं आगर 3 ग्राम सभाओं में सड़क पहुंच गई।

लेकिन एक जो बड़ी समस्या थी वह थी जहां से यह सड़क काट रही थी वहां पर लगभग 50 मीटर का पत्थर लगा हुआ था। बिना इस पत्थर के कटे वाहनों का चलना असंभव था।

इसके लिए क्षेत्र एवं गांव के युवाओं और गोविंद सिंह द्वारा सभी ग्राम सभाओं से चंदा इक्कठा कर इस पत्थर को काटने की मुहिम शुरू की, जिसके तहत लगभग 10 से 12 दिनों में इस पत्थर को काटा गया और लगभग दो लाख का इसमें खर्चा आया।

सभी समस्याओं को दरकिनार कर 14 जून को ग्राम सभा टुंडाचौड़ा में वाहनों का आगमन हो गया। श्रमदान द्वारा सड़क बनाने की यह मुहिम टुंडाचौड़ा तक ही सीमित नहीं रही गोविंद सिंह और युवाओं के सहयोग से इससे भी आगे ग्राम कंडारा, बारुडा और खितौली तक सड़क का निर्माण किया गया।

इस मुहिम से उत्तराखंड के कई गांव में श्रमदान से सड़क निर्माण की एक अलग जगी और कई गांव वालों ने अपने गांव में सड़क पहुंचाई।

गोविंद सिंह उनकी पत्नी ग्राम प्रधान मनीषा बिष्ट ने कोरोना के चलते आ रहे प्रवासियों के लिए गांव में पंचायत घर और प्राथमिक विद्यालय में ठहरने की व्यवस्था बिजली पानी हर सुविधा के साथ गांव आ रहे युवाओं का स्वागत किया और उनके मनोबल बढ़ाया साथ ही खेलों के लिए भी युवाओं को प्रोत्साहित किया।

ग्राम सभा की जिम्मेदारी लेने के बाद ग्राम प्रधान मनीषा बिष्ट ने सबसे पहले गांव के तीन जगहों पर 4 सीसी मार्गों का निर्माण कर गांव के रास्तों को सुधारा।

साथ ही गांव की युवाओं को खेती के लिए भी प्रोत्साहन किया। जिसमें आने वाले वक्त में कलस्टर बेस्ट खेती एक मुख्य लक्ष्य ग्राम प्रधान मनीषा बिष्ट और गोविंद सिंह का है।

जिसके तहत अपने गांव में 50 नाली लगभग 12 से 14 बीघे में ऑर्गेनिक अदरक उत्पादन का काम शुरू करने वाले हैं। साथी गांव के युवाओं को रोजगार के लिए प्रेरित करने के लिए गोविंद सिंह ने देहरादून में बकरी पालन का प्रशिक्षण भी पूर्ण कर लिया है। जिसे गांव की और क्षेत्र की युवाओं को वह स्वयं गांव में ही बकरी पालन के लिए प्रशिक्षण दे सकेें और बकरी पालन के लिए प्रोत्साहित कर सकें।

यह मकसद खुद के प्रशिक्षण का था आने वाले वक्त में सभी क्षेत्र और ग्राम वासियों को इसका लाभ मिलेगा। साथ ही श्रमदान से बने हुए सड़क को विभाग द्वारा अधिग्रहण और डामरीकरण के लिए लगातार प्रयास जारी हैं।

इस सड़क में 2 यात्री सेड जिला योजना के माध्यम से बनाने की भी तैयारी चल रही है । साथ ही पंचायत घर की मरम्मत कर उसे भी ठीक करने की योजना चल रही है।

इसके साथ ग्राम सभा में एक आंगनवाड़ी सेंटर भवन का निर्माण और सबसे बड़ी बात ग्राम प्रधान मनीषा बिष्ट द्वारा बीटीसी में प्रधानों की मीटिंग में क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधा की बदहाली को उठाया था।

जिसके तहत क्षेत्र में 1 प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र बनाने की मंजूरी भी प्राप्त हो चुकी है। जिसके लिए भूमि चयन की प्रक्रिया चल रही है साथी देहरादून स्थित हस्को और श्री अनिल जोशी जी की टीम द्वारा ग्राम सभा टुंडाचौड़ा मैं कई तरीके के कार्यक्रम और स्वरोजगार के लिए ग्रामीणों की ट्रेनिंग की भी योजना चल रही है जिससे ग्रामवासी आत्मनिर्भर बन सकें।

ग्राम प्रधान मनीषा बिष्ट का प्रयास अपने ग्राम सभा को आदर्श ग्राम सभा और डिजिटल गांव बनाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं जिसकी शुरुआत वे कर चुके हैं। उत्तराखंड टुडे मनीषा बिष्ट और गोविंद को सलाम करती है

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