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टिहरी संसदीय क्षेत्र की सियासी *राजनीतिक हलचल*

टिहरी संसदीय क्षेत्र की सियासी
*राजनीतिक हलचल*

– *शम्भुशरण रतूड़ी* की कलम से

कल के अंक में आपने पढा कि टिहरी संसदीय क्षेत्र से पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने भाजपा की ओर से दावेदारी ठोक दी और जब तक टिकट का वारा न्यारा नही हो जाता तब तक वर्तमान सांसद महारानी राज्यलक्ष्मी की नींद तो बहुगुणा ने हराम कर ही दी ।
अब कांग्रेस में भी लगभग इसी प्रकार का अभिनय चल रहा है । पहले तो कांग्रेस के पूर्व राज्य अध्यक्ष किशोर उपाध्याय अपना टिकट पक्का मान रहे थे लेकिन जबसे पूर्व विधायक बलबीरसिंह नेगी ने खुले रुप से अपनी दावेदारी पेश की तो किशोर भाई की भी आजकल नींद उड़ गयी है ।

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बलबीरसिंह नेगी अपनी मजबूत दावेदारी पेश करते हुये कहा कि मेरा राजनीतिक चरित्र एकदम साफ सुथरा है । मैंने लखनऊ विश्वविद्यालय में छात्र नेता के रुप में छात्र/ छात्राओं के हित में काम किया । फिर ब्लाक प्रमुख (भिलंगना विकासखंड), जिलापंचायत, उत्तरप्रदेश विधानसभा सदस्य, उसमें गढ़वाल विकास मंडल का चेयरमैन, (मंत्री पद का दर्जा था), दो बार उत्तराखंड विधानसभा में विधायक की हैसियत से काफी विकास कार्यों को अंजाम दिया ।
अब ! घनशाली विधानसभा सुरक्षित हो गयी तो मेरे लिये क्या विकल्प बचा है ?
यद्यपि बलबीरसिंह नेगी ने जो तथ्य आलाकमान को बताये वह सत्य है पर राजनीति में “गणेश परिक्रमा” का रिवाज है जो बलबीरसिंह नेगी को नहीं आती है । और इसी “गणेश परिक्रमा” से अनजान बलबीरसिंह नेगी के लिये सजी थाली ऐन मौके पर और ही चटक जाता । यह हम नही, पिछला टिकट बंटवारे का इतिहास बता रहा है ।
इसी बीच सुनने में आ रहा है कि पिछली सरकार में मंत्री रहे भाई शूरबीरसिंह सजवाण भी टिकट की दौड़ में हैं । यह अलग बात है कि एक जमाने मे राजनीति का सूरमा माने जाने वाले भाई सजवाण ने पिछले निकाय चुनाव में नई टिहरी से अपनी पत्नी अंबिका सजवाण को नही जितवा पाये । जबकि बलबीरसिंह नेगी ने चमियाला नगर अध्यक्ष के लिये अपने बूते पर ममता पंवार को भारी मतों से जिताकर आलाकमान को यह संदेश देने में सफल रहे कि मेरे में आज भी वही दमखम है ।
इसके अलावा निर्दलियों सहित कई अन्य दलों के प्रत्याशी अभी “बिलों” से बाहर नही आये ।
खैर जो भी हो मुकाबला रोचक होगा, रोमांचक होगा ।आगे …..

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