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उत्तराखंड में अब इन घोटालों से उठेगा पर्दा….

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UT- उत्तराखंड में विभिन्न विभागों में सामने आए घपलों-घोटालों की जांच में देरी से सरकार नाराज है। इसके चलते अब सरकार ने इन मामलों की जांचों में तेजी लाने के लिए संबंधित अधिकारियों को कड़े फैसले लेने को कहा है। ऐसे में दवा और बिजली चोरी समेत तमाम घोटालों की जांच में तेजी आने की संभावना है।
ईएसआई दवा घोटाले की विजिलेंस जांच
कर्मचारी राज्य बीमा योजना निदेशालय और जिलों में हुए करोड़ों के दवा घपले की जांच अब विजिलेंस करेगी। शासन स्तर पर इसकी तैयारी हो गई है। शासन से नियुक्त अफसरों को जांच में सहयोग नहीं करने और इस घपले को दबाने में जुटे निदेशालय के अफसरों की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं। कर्मचारी राज्य बीमा योजना निदेशालय व जिला स्तर पर रेलसर जैल दवाई की खरीद में बड़ा घपला बताया जा रहा है। साथ ही मरीजों को डबल भुगतान, फर्जी बिल और अफसरों की आय से अधिक संपत्ति से जुड़े मामलों की तीन स्तर पर जांच चल रही है। तीनों जांचों में निदेशालय स्तर से जांच अधिकारियों को सहयोग नहीं किया जा रहा है। आलम ये है कि छह महीने से अधिक समय गुजरने के बाद भी निदेशालय से सचिवालय तक जांच से जुड़े दस्तावेज नहीं पहुंचे हैं। दस्तावेज उपलब्ध कराने के लिए जांच अधिकारी राज्य संपत्ति अधिकारी बंशीधर तिवारी व अपर सचिव श्रम रमेश कुमार निदेशालय को कई पत्र लिख चुके हैं। इसके बाद भी दस्तावेज उपलब्ध न कराने पर अनुसचिव देवेंद्र सिंह चौहान के स्तर से निदेशक को एक सख्त पत्र जारी किया जा चुका है। इसमें साफ किया गया कि सरकारी धन के गबन के मामले में जांच अधिकारी की ओर से मांगी गई आख्या उपलब्ध क्यों नहीं कराई जा रही है? यही स्थिति रही, तो पूरे मामले में विजिलेंस से जांच कराई जाएगी। सोमवार को शासन स्तर पर मामले की विजिलेंस से जांच कराने की फाइल तैयार हो गई। इसके लिए अब विभागीय मंत्री का अनुमोदन लिया जाएगा।

दर्ज कराएं एफआईआर
छह महीने से जांच से जुड़े तथ्य और दस्तावेज जांच अधिकारियों को उपलब्ध न कराने पर शासन ने सख्त नाराजगी जताई है। शासन ने निदेशालय से पूछा है कि यदि उनके पास जांच से जुड़े दस्तावेज नहीं हैं तो अभी तक एफआईआर क्यों नहीं कराई गई। शासन ने कहा है कि या तो जांच से जुड़े दस्तावेज दिए जाएं या सीधे एफआईआर कराई जाए।

अफसर ने खड़े किए हाथ
रेलसर जैल दवाई की जांच का जिम्मा राज्य संपत्ति अधिकारी बंशीधर तिवारी को दिया गया। उन्होंने निदेशक को कई पत्र भेज दस्तावेज मांगे। कहीं से जांच में सहयोग न मिलने पर उन्होंने अपर सचिव श्रम को पत्र लिख जांच करने में असमर्थता जता दी है।

पूरे मामले में प्रथमदृष्टया गंभीर अनियमितताएं नजर आ रही हैं। उस पर दस्तावेज उपलब्ध न कराना और भी गंभीर है। पूरे प्रकरण की विजिलेंस जांच के लिए विभागीय मंत्री का अनुमोदन लिया जाएगा। 22 मई को विभागीय सचिव लौट आएंगे। वे इस पर आगे कार्रवाई करेंगे।
अशोक कुमार, प्रभारी सचिव

तीन महीने बाद खुला विवादित बिजली मीटर
हरिद्वार की दो स्टील फैक्ट्रियों के बिजली मीटरों की जांच पूरी हो गई है। तीन माह तक मीटर में हाथ न लगाने वाले यूपीसीएल ने मीटर को तोड़ कर जांच की। इसमें कोई भी चिप नहीं निकली।  हरिद्वार में बिजली चोरी के आरोप में दो स्टील फैक्ट्रियों पर छापा मारकर मीटर सीज कर दिए गए थे। इन मीटरों की जांच दून विद्युत परीक्षण खंड में हुई। उसमें सब सामान्य आने की बात सामने आई। शिकायतकर्ता ने मीटर खोलकर जांच करने का दबाव बनाया। पहले तो यूपीसीएल इसके लिए तैयार नहीं हुआ। बाद में सचिव ऊर्जा राधिका झा के दखल के बाद मीटर खोलने पर सहमत हुआ। इसके बाद भी मीटर की जांच में काफी समय निकल गया। कभी शिकायतकर्ता, तो कभी संबंधित फैक्ट्री के प्रतिनिधि के न आने पर जांच को लटकाया गया। काफी समय बाद मीटर खोलकर जब जांचा गया, तो अब उससे कुछ भी नहीं निकला। जानकार मीटर खोलने में देरी और यूपीसीएल के स्तर से बरती जानी वाली ढिलाई पर भी सवाल उठा रहे हैं। शिकायतकर्ता भी बैकफुट पर : इस पूरे मामले में शिकायतकर्ता की भूमिका भी सवालों के घेरे में हैं। पहले तो छापेमारी से लेकर मीटर लैब में रखने तक हर चीज पर शिकायतकर्ता की ओर से नजर रखी जा रही थी। बाकायदा 24 घंटे निगरानी रखी जा रही थी। जिस दिन मीटर खोला जाना था, उस दिन मौके पर भी नहीं पहुंचा गया। उल्टा दोनों पक्षों ने लिखित में विभाग को अपने स्तर से विभागीय कार्रवाई किए के लिए कहा।

दोनों मीटरों की जांच कर ली गई है। सामान्य जांच के साथ ही मीटर को खोलकर भी देख लिया गया है। जैसा कि शिकायत थी कि मीटर के भीतर चिप है, ऐसा कुछ भी नहीं मिला।
बीसीके मिश्रा, एमडी, यूपीसीएल

पिटकुल बिजली चोरी मामले में जांच शुरू 
लक्सर सब स्टेशन से बिजली चोरी मामले में मुख्य अभियंता लेवल दो दीप शाह को जांच सौंप दी गई है। प्रारंभिक जांच में 13 अफसर और कर्मचारियों को चार्जशीट दी गई। इन पर मीटर में छेड़छाड़ कर उद्योग को लाभ पहुंचाने का आरोप है। अब चार्जशीट पर आए जवाबों की जांच शुरू हो गई है।

इन्हें जारी हुई चार्जशीट : अधिशासी अभियंता राजीव सिंह, सहायक अभियंता मांगे राम, एई विरेंद्र सिंह, जेई निर्देश कुमार चौहान, जेई विजयमल प्रसाद, विनोद कुमार सैनी, योगेश कुमार, रविंद्र कुमार, हिमांशु मंद्रवाल, टीजी वन संदीप कुमार, टीजी टू हरमेंद्र सिंह, टीजी टू दुलीचंद, टीजी टू रविंद्र कुमार।

सबस्टेशन में जिन्हें चार्जशीट जारी की गई थी, उनके जवाब आ गए हैं। जवाबों की जांच के लिए मुख्य अभियंता को तत्काल रिपोर्ट बनाने को कहा है। विस्तृत जांच फाइनल होते ही अगली कार्रवाई होगी।
संदीप सिंघल, एमडी, पिटकुल

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