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खुशखबरी: पहाड़ों पर लहराएंगी केबल कार, हर घंटे 8000 यात्री करेंगे सफर, जानिए खासियत…

देहरादूनः पहाड़ में पहाड़ जैसी समस्याएं आज भी ज्यों की त्यों है। पहाड़ी क्षेत्रें राज्य के 21 साल बाद भी रेल, बस या यातायात के अन्य साधनों की पहुंच अब भी पूरी नहीं हो सकी है। दुर्गम स्थानों पर सड़क बनवाना या रेल लाइन बिछाने का काम कठिन होने के कारण सरकार केबल कार दौड़ाने की तैयारियों में  जुटी है।पर्वतमाला योजना के तहत देशभर के पहाड़ी क्षेत्रों में केबल कार दौड़ाने की तैयारी है। इसी कड़ी में साल 2025 तक उत्तराखंड के हर गांव को लिंक मार्गों के जरिए राजमार्गों और ऑल वेदर रोड से जोड़ने की तैयारी है। पहाड़ों पर औद्योगिक विकास के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित किया जाएगा। इस ही योजना के तहत केदारनाथ धाम तक केबल कार पहुंचाने की तैयारी है। इस योजना के तहत देशभर में हर घंटे 8 हजार यात्री सफर कर सकेंगे।

मीडिया रिपोर्टस के मुताबिक देश में पहली बार, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर और उत्तर-पूर्व जैसे क्षेत्रों के लिए ‘पर्वतमाला योजना’ शुरू हो रही है। इस योजना से पहाड़ों पर परिवहन और कनेक्टिविटी की आधुनिक व्यवस्था बनेगी।केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने वर्ष 2022-23 के लिए केंद्रीय बजट पेश करते हुए राष्ट्रीय पर्वतमाला योजना की घोषणा की। पीपीपी मोड पर पूरे किए जाने वाले ये प्रोजेक्ट कठिन पहाड़ी क्षेत्रों में पारंपरिक सड़कों के स्थान पर एक आधुनिक तथा पर्यावरण के अनुकूल स्थाई विकल्प होग। इससे पर्यटन को बढ़ावा देने के अलावा यात्रियों के लिए कनेक्टिविटी और सुविधाओं में सुधार होगा। पर्वतमाला प्रोजेक्ट में भीड़भाड़ वाले उन शहरी क्षेत्रों को भी शामिल किया जा सकता है जहां पारंपरिक जल परिवहन संभव नहीं है।

गौरतलब है कि विश्व में सर्वाधिक ऊंचाई पर स्थित सिखों के पवित्र धर्मस्थल हेमकुंड साहिब को रोपवे से जोड़ा जाएगा। इसी योजना के तहत केदारनाथ धाम तक केबल कार पहुंचाने की तैयारी है। नैनीताल के कैंचीधाम में 60 करोड़ से अधिक के विकास कार्य किए जाने हैं। पर्वतीय क्षेत्रों में निवेश के लिए पर्यटन, आयुष, वेलनेस, आईटी, सौर ऊर्जा और सर्विस सेक्टर पर विशेष फोकस किया जा रहा है। स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए वोकल फॉर लोकल पर आधारित ‘एक जनपद दो उत्पाद’ योजना से स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर पैदा किए जा रहे हैं। सरकार की तरफ से शुरू की गई होम स्टे योजना से ग्रामीणों की आर्थिकी सुधर रही है। सभी न्याय पंचायतों में कलस्टर आधारित एप्रोच पर ग्रोथ सेंटर बनाए जा रहे हैं। इसी तरह सीमांत तहसीलों के लिए मुख्यमंत्री सीमांत क्षेत्र विकास योजना शुरू की गई है।

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