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टिहरी गढ़वाल

चुनाव 2022: घनसाली प्रत्याशियों का पहले पढ़ें ये पूरा लेखा-जोखा, फिर दें अपना बहुमुल्य वोट…

टिहरीः बेहतर समाज और लोगों का भला करने वाली सरकार के गठन के लिए जरूरी है कि 14 फरवरी को होने वाली विधानसभा चुनाव में हर व्यक्ति अपने मत का इस्तेमाल करे। लेकिन इस वक्त हर वोटर के दिमाग में यहीं सवाल है कि वो किसे अपना प्रत्याशी बनाएं। किसे जिताएं। क्योंकि इस मत से अगले पांच साल की सरकार बनेगी। मतदान के साथ ही सभी प्रत्याशियों की किस्मत भी लॉक हो जाएगी। ऐसे में आज हम आपके सामने आपके प्रत्याशियों का कट्टा- चिट्ठा लेकर आएं है। जिससे आपको ये पता चल जाएगा कि आपको किस इमानदार प्रत्याशी  को विधानसभा तक पहुंचाना है। पढ़े रिपोर्ट…

1- बीजेपी प्रत्याशी शक्तिलाल शाह–  शक्तिलाल शाह पर कई गंभीर मामले है। उन पर जीएसटी विधायक, 30000 करोड रुपए की सड़क, घर में ईशू की फोटो, बूढ़ाकेदार धाम की झूठी कसम खाकर पांचवा धाम बनवाने की घोषणा, बालगंगा डिग्री कॉलेज राजकीय करण करवाने की झूठी घोषणा मुख्यमंत्री से करवाना, जमीन दान में उपलब्ध होने के बाद भी एकमात्र पिलखी हॉस्पिटल का उच्चीकरण ना करवा पाना, कोरोना काल में लोगों की मदद न करना। जैसे आरोप है। इतने आरोपो  के बाद अब आप खुद सोचे बीते पांच साल में शक्तिलाल शाह ने क्या किया और अगले पांच साल आपको क्षेत्र में कैसा नेता चाहिए है।

2- धनी लाल शाह– धनी लाल शाह सबसे निर्धन प्रत्याशी है। इन पर किसी भी प्रकार की बेइमानी और झूठे वादों का आरोप नहीं है। न हीं इन पर कोई अपराधिक मामला दर्ज है। जमीन से जुड़े धनीलाल चार बार चुनाव तो लड़ चुके है लेकिन आज तक वह जीत नहीं चके। हालांकि कड़ी टक्कर देते आए है। इनके पास घनसाली में अपना घर तक नहीं है। यहां तक की चुनाव लड़ने के लिए भी इनके समर्थकों ने अपना खर्च किया है। अब आप पर निर्भर करता है कि आप इमानदार को चुनते है या बेइमान को। जनता के नाम पर अपनी जेब भरने वालें को चुनते है या जनता के हित में काम  करने वाले को। 2017 में निर्दलीय उम्मीदवार धनीलाल शाह का वोट शेयर 23.33 प्रतिशत और कांग्रेस पार्टी का वोट शेयर 11.8 प्रतिशत था।

3- भीम लाल आर्य-  2012 में चुने जाने के बाद बनने के बाद असेना में धरना करने के बाद पत्नी के नाम पर पार्टनरशिप, उसके बाद दोनों भाई पिता और रिश्तेदारों का भरपूर विकास किया। इतना ही नहीं करोड़ों रुपए में हरीश रावत के हाथों बिककर घनसाली की जनता के साथ छलावा किया। अगर इस बार फिर जनता आशीर्वाद देती है तो फिर भाजपा या कांग्रेस के हाथों में फिर बिकना, गरीब का बेटा बोलकर खुद को संबोधित करना जबकि किसी गरीब के बेटे के पास देहरादून में करोड़ों रुपए की कोठी, अधिकारियों का बिल्कुल भी सम्मान ना करना, कोरोना काल में पूर्व विधायक होने के नाते किसी भी क्षेत्र वासी की एक पैसे की भी मदद ना करना आदि।

4- दर्शनलाल- राजनीति में आने के लिए दर्शनलाल ने स्वार्थी होकर समाज सेवा का रास्ता चुना। स्वार्थ के लिए भाजपा ज्वाइन की और भाजपा ने जब टिकट बना दिया तो आगे की राजनीति करने के लिए निर्दलीय चुनाव लड़ा, मुश्किल से 5वीं पास पास है। अब आपको खुद सोचना है कि आपको किसे चुनना है। 2022 में घनसाली में कौन सत्ता में आएगा इसका फैसला तो 10 मार्च को पता चलेगा। अगले पांच साल के लिए विधायक चुनने का कल आखिरी मौका है। गौरतलब है कि2017 के विधानसभा चुनाव में इस सीट पर भाजपा का वोट शेयर 49.35 प्रतिशत था।

 

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