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वोटर्स को लुभाने की होड़: जयंती पर संत रविदास को अपने पाले में लाने के लिए नेताओं में मत्था टेकने की सियासत…

दिल्लीः पंजाब और उत्तर प्रदेश में बचे पांच चरण के विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों के नेताओं के बीच आज संत को अपने पाले में लाने के लिए सुबह से ही जबरदस्त खींचतान मची हुई है। बता दें कि आज माघ पूर्णिमा है । हर साल इस दिन संत रविदास की जयंती मनाई जाती है। इस बार संत रविदास की जयंती ऐसे मौके पर आई है जब पंजाब और उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव हो रहे हैं। बता दें कि रविदास का जन्म यूपी के वाराणसी में हुआ था लेकिन उनके अनुयायियों की संख्या पंजाब में बहुत अधिक है । इसी वजह से 14 फरवरी को इस राज्य में विधानसभा चुनाव को भी स्थगित कर 20 फरवरी को कर दिया गया था। पंजाब में रैदासी समाज के करीब 15 लाख से ज्यादा मतदाता हैं। इसके अलावा उत्तर प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और देश के अन्य राज्यों में बड़ी संख्या में संत रविदास महाराज के अनुयायी हैं। चुनाव से पहले दलित समुदाय के वोटर्स को लुभाने के लिए सभी दलों के प्रमुख नेता जयंती पर रविदास आश्रम पहुंचे । सबसे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रविदास जयंती के मौके पर दिल्ली के रविदास विश्राम धाम पहुंचे। यहां उन्होंने संत रविदास के दर्शन किए। इस दौरान श्रद्धालु भजन गा रहे थे, पीएम मोदी भी उन्हीं में शामिल हो गए। प्रधानमंत्री भक्तों के बीच बैठकर झांझ बजाने लगे। उत्तर प्रदेश में भी कई बड़े नेता रविदास जयंती के मौके पर उनकी जन्मस्थली पहुंचे।

पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी वाराणसी के सीरगोवधर्नपुर स्थित संत रविदास महाराज की जन्मस्थली पर पहुंचकर मत्था टेका। उसके बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बाद राहुल और प्रियंका गांधी भी सीरगोवर्धनपुर स्थित रविदास मंदिर पहुंचे। प्रियंका और राहुल ने संत रविदास का दर्शन पूजन किया। इसके बाद पात में बैठकर लंगर भी खाया। राहुल गांधी ने लंगर सेवा भी की और लोगों को भोजन खिलाया। इसके अलावा, आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह भी पहुंचे। आजाद समाज पार्टी के प्रमुख चंद्रशेखर भी ने भी दरबार पहुंचकर हाजिरी लगाई। वहीं बसपा सुप्रीमो मायावती वाराणसी तो नहीं गई लेकिन उन्होंने जयंती पर संत रविदास को याद करते हुए ट्वीट किया । उन्‍होंने अपने ट्विटर अकाउंट पर लिखा है- ‘मन चंगा तो कठौती में गंगा’ का इंसानियत भरा आदर्श व अमर संदेश देने वाले महान संतगुरु रविदास जी को उनकी जयंती पर शत्-शत् नमन व अपार श्रद्धा-सुमन अर्पित तथा देश व दुनिया में रहने वाले उनके सभी अनुयाईयों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं। वहीं, सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी संत रविदास को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि उनका जीवन सदियों तक प्रेरित करता रहेगा। उन्होंने ट्वीट किया, मन चंगा तो कठौती में गंगा, संत शिरोमणि रविदास जी की जयंती के अवसर पर सभी को हार्दिक शुभकामनाएं। संत रविदास जी का जीवन व उनके आदर्श सदियों तक मानव समाज को करुणा व कल्याण के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करते रहेंगे।

संत रविदास का जन्म माघ पूर्णिमा तिथि को वाराणसी में हुआ था–

संत रविदास का जन्म मां पूर्णिमा तिथि को वाराणसी में हुआ था। ‌गुरु रविदास 15वीं और 16वीं शताब्दी के भक्ति आंदोलन के एक कवि संत थे और उन्होंने रविदासिया धर्म की स्थापना की थी। रविदास जयंती उनके जन्म के उपलक्ष्य में मनाई जाती है। गुरु रविदास ने कई भजन लिखे थे, उनमें से कुछ का जिक्र सिख धर्म की पवित्र पुस्तक, गुरु ग्रंथ साहिब में मिलता है। संत रविदास ने अपने विचार और रचनाओं से समाज की बुराइयां दूर करने में अहम भूमिका निभाई थी‌ । हालांकि संत रविदास के जन्म को लेकर इतिहासकारों में मतभेद है और माना जाता है कि गुरु रविदास का जन्म 1377 में वाराणसी, उत्तर प्रदेश में हुआ था। हिंदी पंचांग के अनुसार, माघ माह में पूर्णिमा तिथि को संत रविदास जयंती मनाई जाती है। संत रविदास जी का जन्म माघ पूर्णिमा तिथि के दिन हुआ था। संत रविवास जी बहुत ही धार्मिक स्वभाव के व्यक्ति थे। इन्होंने आजीविका के लिए अपने पैतृक कार्य को अपनाते हुए हमेशा भगवान की भक्ति में हमेशा ही लीन रहा करते थे। संत रविदास, जिन्होंने भगवान की भक्ति में समर्पित होने के साथ अपने सामाजिक और पारिवारिक कर्त्तव्यों का भी बखूबी निर्वहन किया। संत रविदास ने लोगों को प्रेम से रहने और खुशहाली बांटने की शिक्षा दी थी। वे लोगों को हमेशा धर्म पर चलने की शिक्षा देते थे।

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