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कल चंद्र ग्रहण की अवधि लंबी होगी लेकिन नहीं लगेंगे सूतक काल, देश में कुछ देर दिखाई देगा…

दिल्लीः 19 नवंबर को खगोल वैज्ञानिकों और ज्योतिषियों में उत्सुकता का माहौल है। कल एक तरफ जहां इस महीने सबसे बड़े और सबसे ज्यादा शुभ फल देने वाले ग्रह बृहस्पति अपनी राशि बदलेंगे, तो दूसरी तरफ साल 2021 का आखिरी चंद्रग्रहण भी लगेगा। वैज्ञानिक इसे एक खगोलीय घटना ही मानते हैं जबकि धार्मिक नजरिए से ग्रहण लगना अशुभ माना जाता है । हालांकि इस बार ‘सूतक काल’ नहीं रहेंगे। (ग्रहण के दौरान और सूतक काल लगने पर कई शुभ कार्यों को करना वर्जित हो जाता है) फिर भी चंद्र ग्रहण के दौरान विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। खगोलविदों का कहना है कि इस आंशिक चंद्र ग्रहण की अवधि बहुत लंबी होगी और संयोगवश ऐसा तकरीबन 580 साल बाद होने जा रहा है । इससे पहले इतनी लंबी अवधि का चंद्र ग्रहण 18 फरवरी 1440 को लगा था। अब भविष्य में चंद्र ग्रहण की ऐसी घटना 8 फरवरी 2669 में देखने को मिलेगी। खगोलविदों का दावा है कि धरती से चंद्रमा की अधिक दूरी होने के कारण चंद्र ग्रहण की अवधि लंबी होगी । 19 नवंबर को भारतीय समयानुसार चंद्र ग्रहण की शुरुआत दोपहर 11 बजकर 34 मिनट से होगी और इसकी समाप्ति शाम 5 बजकर 33 मिनट पर। खंडग्रास ग्रहण की कुल अवधि 03 घंटे 26 मिनट की होगी। उपच्छाया चंद्र ग्रहण की कुल अवधि 05 घंटे 59 मिनट की होगी। बता दें कि अभी गुरु-शनि मकर राशि में स्थित हैं और आंशिक चंद्र ग्रहण हो रहा है। गुरु-शनि मकर राशि में और चंद्र ग्रहण का योग 2021 से 59 साल पहले 19 फरवरी 1962 को हुआ था। कल का ग्रहण वृषभ राशि में हो रहा है, चंद्र इसी राशि में रहेगा।

देश के पूर्वोत्तर राज्यों में ही कुछ देर के लिए दिखाई देगा ग्रहण–

बता दें कि ये आंशिक चंद्र ग्रहण भारत के उत्तर-पूर्वी राज्यों में बहुत ही कुछ समय (एक या दो मिनट) के लिए ही दिखाई देगा। (अरुणाचल प्रदेश और असम के कुछ हिस्सों में) देश में यह चंद्र ग्रहण उपच्छाया होने के कारण इसका सूतक काल मान्य नहीं रहेगा। ज्योतिष और धार्मिक नजरिए से उपच्छाया चंद्र ग्रहण को ग्रहण नहीं माना जाता है इसी कारण से इसका सूतक काल मान्य नहीं होगा। सूतक काल मान्य न होने कारण किसी भी तरह की पाबंदी नहीं रहेगी। चंद्र ग्रहण अमेरिका, उत्तरी यूरोप, पूर्वी एशिया, ऑस्ट्रेलिया, अंटार्कटिका और प्रशांत महासागर जैसी कुछ चुनिंदा जगहों से ही देखा जा सकेगा। आंशिक चंद्र ग्रहण होने की वजह से इसके लिए सूतक काल भी मान्य नहीं होगा।

पृथ्वी परिक्रमा करते समय सूर्य और चंद्र के बीच आ जाती है तब चंद्र ग्रहण लगता है–

जब पृथ्वी परिक्रमा करते समय सूर्य और चंद्र के बीच आ जाती है, ये तीनों ग्रह एक सीधी लाइन में आ जाते हैं, तब चंद्र ग्रहण होता है। इस स्थिति में सूर्य की रोशनी चंद्र तक पहुंच नहीं पाती है और चंद्र दिखाई नहीं देता है। जब पृथ्वी और सूर्य के बीच में चंद्र आ जाता है, तब सूर्य ग्रहण है। चंद्र ग्रहण को लेकर पौराणिक धार्मिक मान्यता है कि समुद्र मंथन के दौरान स्वर्भानु नामक एक दैत्य ने छल से अमृत पान करने की कोशिश की थी। तब चंद्रमा और सूर्य की इस पर नजर पड़ गई थी। इसके बाद दैत्य की हरकत के बारे में चंद्रमा और सूर्य ने भगवान विष्णु को जानकारी दे दी। भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से इस दैत्य का सिर धड़ से अलग कर दिया। अमृत की कुछ बंदू गले से नीचे उतरने के कारण ये दो दैत्य बन गए और अमर हो गए।

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