उत्तराखंड
उत्तराखंड में यहां बन रहा है एशिया का सबसे लंबा वाइल्ड लाइफ कॉरिडोर, ऊपर गुजरेंगी गाड़ियां, नीचे होंगे जंगली जानवर, जानें खासियत…
उत्तराखंड में जहां एक ओर कांच का पुल बनने वाला है। एशिया का सबसे बड़ा बांध यहां है, सबसे बड़ा रोपवे यहां बन रहा है तो वहीं यहां एशिया का सबसे लंबा वाइल्ड लाइफ कॉरिडोर भी प्रदेश में बन रहा है। ये वाइल्ड लाइफ कॉरिडोर और कहीं और नही बल्कि देहरादून से बनेगा। बताया जा रहा है कि दिल्ली देहरादून एक्सप्रेसवे पर ये कॉरिडोर स्थित होगा। इस कॉरिडोर से जंगल सफारी का मजा मिलेगा। जी हां क्योंकि इस कॉरिडोर पर ऊपर जहां गाड़ियां रफ्तार भरेगी तो वहीं नीचे यहां जंगली जानवर गुजरेंगे।
ह सिंगल पिलर पर बन रहे छह लेन
मिली जानकारी के अनुसार दिल्ली से देहरादून के बीच लगने वाला ट्रेवल टाइम घटने वाला है। जो सफर 6 घंटे में पूरा होता था उसमें अब 2.5 घंटे लगेंगे। असल में दिल्ली से देहरादून को जोड़ने के लिए एक एक्सप्रेस वे बन रहा है। जोर-शोर से इसका काम जारी है। अगले साल तक इस एक्सप्रेव के सुचारू होने का दावा किया जा रहा है। बताया जा रहा है कि यह कॉरिडोर उत्तराखंड में राजाजी नेशनल पार्क के सटा हुआ होगा। जिसकी लंबाई 12 किमी होगी। यह सिंगल पिलर पर छह लेन का होगा। सिंगल पिलर तकनीक इसलिए अपनाई जा रही है, क्योंकि जंगल में कम से कम कंक्रीट का इस्तेमाल हो।
450 पिलर बनकर तैयार
बताया जा रहा है कि यह कोरडिोर मोहंड से शुरू होकर डाटकाली मंदिर तक जाएगा। यह दिल्ली देहरादून एक्सप्रेसवे का अंतिम हिस्सा जो गणेशपुर से अशारोही (19.785) किमी है, एनएच 307 स्थित है। इसके लिए कुल 571 पिलर बनने हैं, जिसमें से 450 बन चुके हैं। पिलर के बीच की दूरी 21 मीटर है। इस पर 25 मीटर चौड़ा हाईवे होगा। शिवालिक फारेस्ट डिवीजन उत्तर प्रदेश और देहरादून फारेस्ट डिजीवन उत्तराखंड दोनों के करीब होगा।
जंगली जानवरों के लिए लगेंगे साउंड बैरियर
वहीं इसके साथ ही बताया जा रहा है कि इन फ्लाईओवर के साथ ही छोटे-छोटे मोबाइल टावर भी लगाए जाएंगे ताकि नेटवर्क की दिक्कत न हो। इसी क्षेत्र में 340 मीटर लंबी डाट काली सुरंग भी शामिल है, जिसका काम पूरा कर लिया गया है। इसके अलावा फ्लाई ओवर में लाइट एवं साउंड बैरियर भी लगाए जाएंगे। ताकि जानवरों को वाहनों की आवाजों से परेशानी न हो। पूरे एरिया को ग्रीन कवर करने के लिए ईको रेस्टोरेशन प्लान पर काम किया जा रहा है। उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश अपने-अपने हिस्से में इस प्लान को लागू करेंगे, जिसका खर्च एनएचआई उठाएगा। इसके अलावा पार्क क्षेत्र में आग से बचाव के उपाय, वाटर पीट, ग्राउंड वाटर रिचार्ज सिस्टम आदि भी विकसित किए जाएंगे।

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