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Uttarakhand News: उत्तराखंड के सुभाष रमोला ने बदली अपने छोटे से गांव की काया, स्वरोजगार से जुड़े युवा…

Uttarakhand News: मसूरी से करीब 60-65 किलोमीटर के सफर के बाद यमुना नदी के किनारे बसे नैनबाग कस्बे से शुरू होती है कोड़ी पत्वांड़ी और ऐंदी की सुरम्य घाटी जो कुछ ही वर्षों में मटर, टमाटर सहित गैर मौसमी सब्जियों के उत्पादन के क्षेत्र में बड़ी तेजी से उभरा है। यहां अपने सीढ़ीनुमा खेतों में हर वर्ष लाखों रुपए की सब्जियां पैदा करने वाले किसानों की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है।

यहीं पर करीब 11 हजार फीट की ऊंचाई पर नागटिब्बा पर्यटन केन्द्र भी है, जो देश में सबसे तेजी से विकसित होने वाले पर्यटन स्थलों की सूची में शुमार है। आज यहां का अन्तर्राष्ट्रीय स्तर के गोट विलेज व काफल विलेज सहित सैकड़ों होम स्टे पर्यटन में शानदार कारोबार कर रहे हैं। यहां हर वर्ष आने वाले पर्यटकों की संख्या में तेजी से वृद्धि हो रही है, जिस कारण यहां के गांवों में शानदार होम स्टे, कैफे और रिजोर्ट खुल गये हैं।

कोविड काल के दो वर्षों में जहां पर्यटन व्यवसाय पूरी तरह ठप्प रहा तो यहां के युवाओं ने अपना पूरा ध्यान बे मौसमी सब्जियों की खेती में लगाकर अपने उत्पादन को दोगुना कर दिया। आज रिवर्स पलायन कर अपने गांव आये कई युवा स्वरोजगार से जुड़ गये हैं। नागटिब्बा पर्यटन स्थल को विकसित करने का काफी श्रेय पंत्वाड़ी गांव के युवा सुभाष रमोला को जाता है जिसने करीब डेढ़ दशक पूर्व वीरान पर बेहद सुरम्य स्थल नागटिब्बा पर भविष्य के पर्यटन की संभावना भांप ली थी।

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सुभाष ने पहाड़ के हजारों युवाओं की तरह देहरादून के प्रतिष्ठित डीबीएस कालेज में उच्च शिक्षा के लिए दाखिला लिया। अपने समाजसेवी रुझान के कारण वे कालेज छात्र संघ के अध्यक्ष चुने गये। इस स्थिति में जहां युवा किसी बड़े नेता व मंत्री से सटकर उनके खास होने का तमगा लगाकर उसे जिंदगीभर ढ़ो कर गांव से अपना रिश्ता तोड़ डालते हैं। वहीं सुभाष ने अपने गांव लौटकर अपनी जड़े यहीं मजबूत करने का फैसला किया। उसके जज्बे को देखते हुए गांव लोगों ने उसे ग्राम प्रधान चुन लिया और सभी ग्राम प्रधानों ने प्रधान संघ का अध्यक्ष।

एक दिन वे अपने गांव से तीन घंटे के ट्रैक पर करीब ग्यारह हजार की फीट की ऊंचाई पर स्थित नाग टिब्बा पर्वत पर बैठे थे, उन्हें लगा कि यदि यह सुरम्य स्थान पर्यटन स्थल के रूप में विकसित हो जाए तो इससे जुड़े पूरे क्षेत्र का कायाकल्प हो सकता है। उन्होने अपनी योजना समाजसेवा से जुड़े कर्नल कोठियाल को बताई और दोनों लोग इस अभियान में जुट गये। यहां ज़मीन का एक टुकड़ा लिया और उस पर पर्यटन रिजोर्ट का श्रीगणेश कर दिया तब कई लोग इनके इस अभियान को एक असफल अभियान मान रहे थे। फिर इन्होने पर्यटन क्षेत्र से जुड़े व्यवसायियों को यहां निवेश करने को आमंत्रित किया और यहां गोट विलेज जैसा प्रतिष्ठित रिजोर्ट स्थापित हो गया।

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देहरादून व मसूरी से तीन चार घंटे की दूरी पर सबसे सुरम्य स्थल नाग टिब्बा ट्रैकिंग के शौकीनों को भाने लगा और यहां पर्यटकों की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी होने लगी। इससे कोड़ी पंत्वाड़ी सहित करीब आधा दर्जन गांव नाग टिब्बा जाने वाले पर्यटकों के लिए बेस कैंप के रूप में विकसित होने लगे और कुछ ही समय में इन गांवों में दर्जनों होम स्टे, रैस्टोंरेंट और साइबर कैफे स्थापित हो गये। आज यह पर्यटन स्थल बड़ी-बड़ी कम्पनियों के सीईओज व विदेशियों के पसंदीदा पर्यटन स्थलों में शुमार होने लगा है।

सुभाष का अब यहां निवेशकों की मदद से करोड़ों की लागत से शानदार रिजोर्ट ” काफल विलेज” बनकर तैयार है, जहां विदेशों से आयातित लकड़ी को स्थानीय शिल्प में ढ़ाला गया है। इस विलेज में काफल सहित अन्य फलदार पौधों का रोपण व जैविक सब्जियों के उत्पादन की योजना है, ताकि पर्यटकों को यहां शुद्ध हवा के साथ साथ शुद्ध फल व भोजन भी मुहैया किया जा सके। पूरी तरह एनवायरमेंट फ्रेंडली इस रिजोर्ट में सोलर सिस्टम लगाया जा रहा है। इन गांवों में पैदा होने वाले जैविक उत्पाद बकरी छाप जैविक उत्पादों सहित अन्य ब्रांडों के साथ देहरादून व दिल्ली के बड़े-बड़े माल व होटलों में अपनी दस्तक देने लगे हैं।

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सुभाष इस समय अपने रिजोर्ट व ग्रामीण विकास के साथ साथ जिला सहकारी बैंक टिहरी के चैयरमैन सहित भाजपा संगठन के अहम पदों से भी जुड़े हैं पर वे अपना अधिकतर समय अपने गांवों में पर्यटन विकास में लगा रहे हैं। इनके साथ अब स्थानीय युवाओं की बड़ी टीम जुड़ गई है। गत वर्ष इन्हें हंस फाउंडेशन व हमराही कल्याण समिति ने उत्तराखंड प्रवर्तक सम्मान से भी सम्मानित किया।

सुभाष जैसे युवा उन राजनीतिक व सामाजिक कार्यकर्ताओं के लिए एक प्रेरणाश्रोत हैं जो अपने गांव व खेतों को बंजर छोड़ राज्य की राजधानी देहरादून में किसी अदने नेता व नौकरशाह के खास का तमग़ा लगाकर इसे ही अपने जीवन का लक्ष्य मान बैठे हैं। पर युवाओं को यह मान लेना चाहिए कि बिना मजबूत जड़ का पेड़ लंबा नहीं टिक सकता। जिस दिन उत्तराखंड का युवा, सुभाष जैसे युवाओं का मूल मंत्र यह समझ लेगा उस दिन पहाड़ों के कायाकल्प के साथ राज्य में एक नई विकासशील राजनीति भी विकसित होगी और तब उत्तराखंड को देश में नम्बर एक राज्य बनने से कोई नहीं रोक पाएगा।

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