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धामी सरकार के लिए उनके ही विधायक बने गले की फांस, पीड़िता ने पुलिस जांच के खिलाफ खोला मोर्चा…

विधानसभा चुनाव को लेकर तैयारियों में जुटे मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अपने ही भाजपा विधायक महेश नेगी ने मुश्किलें बढ़ा दी हैं। महेश नेगी उत्तराखंड के द्वाराहाट से भाजपा के विधायक हैं। विधायक महेश नेगी को देहरादून पुलिस ने सेक्स स्कैंडल मामले में क्लीन चिट दे दी थी। जिसके बाद हाईकोर्ट ने भी शनिवार को महेश नेगी के मामले में जांच अधिकारी की ओर से रिपोर्ट के आधार पर मामले का निपटारा कर दिया। जिसके बाद नेगी पर दुष्कर्म के आरोप लगाने वाली पीड़िता ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए मोर्चा खोल दिया है। यह मामला उत्तराखंड की सियासत में एक बार फिर से गरमाया हुआ है। देहरादून पुलिस के क्लीनचिट दिए जाने पर महेश नेगी का एक बार फिर से राज्य में विरोध शुरू हो गया है। बता दें कि द्वाराहाट की एक महिला ने विधायक पर दुष्कर्म का आरोप लगाया था। इस मामले में राजधानी देहरादून की नेहरू कालोनी थाने में कोर्ट के आदेश पर विधायक के खिलाफ दुष्कर्म का मुकदमा दर्ज किया गया। वहीं, विधायक की ओर से भी महिला के खिलाफ नेहरू कालोनी थाने में ब्लेकमेलिंग का मुकदमा दर्ज कराया गया था। उन्होंने कहा कि मामले की विवेचना अधिकारी दीक्षा सैनी ने स्वयं सीजेएम कोर्ट देहरादून में विधायक महेश नेगी व बेटी का डीएनए जांच के लिए प्रार्थना पत्र दिया था।

बिना डीएनए जांच के जांच अधिकारी ने प्रकरण में फाइनल रिपोर्ट लगा दी। अब तक डीएनए टेस्ट नहीं हो पाया है और विवेचना अधिकारी ने फाइनल रिपोर्ट लगा दी है। भाजपा विधायक महेश नेगी की ओर से डीएनए टेस्ट के आदेश पर रोक लगाने के लिए दायर की गई याचिका का हाईकोर्ट ने शनिवार को निपटारा कर दिया । अदालत के आदेश पर की गई जांच में जांच अधिकारी की ओर से पेश अंतिम रिपोर्ट के मद्देनजर कोर्ट ने याचिका निपटा दी। कोर्ट में पेश रिपोर्ट के अनुसार विधायक पर दुष्कर्म के आरोपों की पुष्टि नहीं हुई है। इसी मामले में पीड़िता की ओर से दायर वाद में कोर्ट ने सरकार और विधायक को अगले महीने की 13 जनवरी तक शपथ पत्र पेश करने के लिए कहा है। उसी दिन मामले की सुनवाई होगी। पीड़ित महिला ने कहा कि विवेचना अधिकारी की ओर से फाइनल रिपोर्ट पांच नवंबर को दाखिल की गई थी, लेकिन इसकी प्रतिलिपि अभी तक उन्हें नहीं मिली है। पीड़ित महिला ने कहा कि वह अपने अधिकार के लिए लड़ाई लड़ती रहेंगी। उन्हें न्यायालय पर पूरा भरोसा है। न्याय पाने के लिए यदि उन्हें सुप्रीम कोर्ट तक जाना पड़े तो वह अपनी लड़ाई जारी रखेगी। दूसरी ओर विपक्षी पार्टी कांग्रेस भी इस मुद्दे को उछालने के लिए जोर-शोर से तैयारी कर रही है। विधानसभा चुनाव नजदीक होने की वजह से कांग्रेस को एक मुद्दा मिल गया है।

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