उत्तराखंड
मांग: बिजली, पानी, सड़क व स्वास्थ्य के मुद्दों को लेकर गूलर में 9 वें दिन भी धरना जारी…
नरेन्द्रनगर: बिजली,पानी,सड़क, स्वास्थ्य व दूरसंचार सेवाओं सहित अनेकों मूलभूत सुविधाओं से महरूम पट्टी दोगी के नागरिकों ने संयुक्त धरना के बैनर तले क्षेत्र के केंद्रीय स्थल गूलर में 11 दिवसीय क्रमिक धरना शुरू किया हुआ है। आज यह क्रमिक धरना नौवें दिन में प्रवेश कर गया,मगर मांगों के निस्तारण के लिए कोई भी सक्षम अधिकारी अभी तक धरना स्थल पर नहीं पहुंचा, जिससे क्षेत्रीय लोगों में आक्रोश है और आंदोलन के उग्र होने की आशंका बनी हुई है।
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9 वें दिन धरना पर बैठने वालों में पट्टी दोगी निवासी व अखिल भारतीय पंचायत विकास संगठन के प्रदेश प्रवक्ता वाचस्पति रयाल, विकास रयाल,राज कबसूड़ी,अशोक रयाल, मनीश रावत,अरविंद पुंडीर,यशवंत सिंह राणा व विकास आदि थे ।विदित हो कि पट्टी दोगी क्षेत्र में बिजली,पानी,शिक्षा,स्वास्थ्य, सड़क व दूरसंचार जैसी मूलभूत सुविधाओं का निरंतर अभाव बना हुआ है। क्षेत्र में दूरसंचार सेवाओं के लुंज-पुंज हालात के चलते पिछले कोरोना काल से अब तक बच्चों की ऑनलाइन पढ़ाई ठप है।
मोबाइल पर नेट परिलक्षित हो सके इसके लिए ऑनलाइन अध्ययन की मंशा पाले गांव के छात्र कई किलोमीटर जंगल के रास्ते की चढ़ाई चढ़कर पेड़ों पर चढ़ने को मजबूर हैं, मगर मजाल क्या कि वहां भी नेटवर्क के दर्शन हो जाँय,दिन भर नेट की ढूंढ में असफल छात्र शाम को मुंह लटकाए घर की ओर चल देते हैं। क्षेत्र में यही हालात बिजली के हैं। पट्टी दोगी क्षेत्र में ग्रामीण बिजली की लुकाछिपी से परेशान हाल हैं। बात स्वास्थ्य की करें तो क्षेत्र के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में इलाज की बात तो रही दूर डॉक्टरों के महीनों तक दर्शन नहीं हो पाते, सड़कों का रखरखाव कतई सही हालात में नहीं है।
हर घर नल और जल योजना के अंतर्गत पेयजल पाइप लाइनें शोपीस बन कर रह गयी हैं। स्टेंड पोस्ट की नाम पर खाली नल खड़ा किया जा रहा है। पट्टी दोगी क्षेत्र में करोड़ों की लागत से निर्मित सूर्य कुंड रानीताल पेय जल पंपिंग योजना को ऐसा साँप सूँघा कि नलों से प्यास बुझाने की बात तो रही दूर पानी के दर्शन तक करने दुर्लभ हो गए हैं। आंदोलनकारियों में विकास रयाल, राज कबसूड़ी, यशवंत सिंह राणा, मनीष रावत आदि का कहना है कि आँदोलन के चलते खानापूर्ति के तौर पर तहसीलदार और जल संस्थान के कर्मचारी धरना स्थल पर जरूर पहुंचे, मगर किसी भी समस्या का हल अभी तक नहीं किया गया। आंदोलन की सुध लेने किसी भी सक्षम अधिकारी का मौके पर न पहुंचना क्षेत्र की जबरदस्त उपेक्षा का सबूत है। इससे आंदोलन और भड़कने के आसार नजर आ रहे हैं। दोगी क्षेत्र के निवासी और अखिल भारतीय पंचायत विकास संगठन- उत्तराखंड प्रदेश के प्रवक्ता वाचस्पति रयाल का धरना स्थल पर पहुँचते ही फूल-मालाओं से स्वागत किया गया।
पंचायत विकास संगठन के प्रदेश प्रवक्ता वाचस्पति रयाल ने अपने सवा घंटे के मैराथन भाषण में जहां युवाओं द्वारा चलाये जा रहे इस आंदोलन को दोगी के विकास में आशा की नई किरण बताया,वहीं उन्होंने पट्टी दोगी क्षेत्र के विकास के लिए वर्ष 82,86 तथा 94 के आंदोलनों का जिक्र करते हुए कहा कि इन ऐतिहासिक आंदोलनों जरिये विकास के नाम पर जो कुछ भी दृष्टिगोचर हो रहा है, वह सब आज भी अव्यवस्थित है। इस लचर व्यवस्था में सुधार लाने की नितांत आवश्यकता है। चाहे वह आंदोलन ही क्यों ना करना पड़े। तय किया गया सरकार जल्द मांगों के निराकरण के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाती तो आंदोलन का स्वरूप बदलते हुए क्षेत्र के केंद्रीय स्थल पांव की देवी में फिर से आंदोलन की शुरुआत की जाएगी। तमाम समस्याओं का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि दोगी जैसे बीहड़ क्षेत्र के विकास के लिए सभी को क्षेत्रवाद, जातिवाद और राजनीति से ऊपर उठकर एकजुटता साथ बृहद आंदोलन चलाने की आवश्यकता है। इस मौके पर विकास चंद्र रयाल,यशवंत सिंह राणा, मनीष रावत,अरविंद पुँडीर आदि ने अपने विचार रखे। संचालन राज कबसूड़ी ने किया।

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