उत्तराखंड
कांग्रेस के बाद भाजपा में भी मंत्री सतपाल स्पष्ट और मुखर राजनीति के लिए जाने जाते हैं…
राजनीति जगत के एक ऐसे कद्दावर नेता जिनका कांग्रेस के बाद भाजपा में भी सितारा बुलंदियों पर है। इसके साथ आध्यात्म के क्षेत्र में भी देश-विदेशों में इनके लाखों की संख्या में शिष्य हैं। उन्हें ‘स्पष्टवादी और खुली’ (मुखर) सियासत करने के लिए जाना जाता है। चाहे वह किसी भी पार्टी में रहे हो लेकिन उनका ‘दबदबा’ कायम रहा। देवभूमि के निर्माण में भी इनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। हम बात कर रहे हैं राजनीति के ‘महाराज’ की। आज उत्तराखंड की धामी सरकार के कद्दावर कैबिनेट मंत्री और आध्यात्मिक गुरु सतपाल महाराज का जन्मदिन है। महाराज राजनीति के साथ निजी जीवन में भी ‘बड़े फैसले’ लेने के लिए जाने जाते हैं। मौजूदा समय में धामी सरकार में सतपाल महाराज सिंचाई, बाढ़ नियंत्रण, लघु सिंचाई, जलागम प्रबंधन, भारत-नेपाल -उत्तराखंड नदी परियोजनाएं, पर्यटन, संस्कृति एवं धर्मस्व और लोक निर्माण विभाग की जिम्मेदारी है। महाराज के 70वें जन्मदिवस पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी समेत तमाम मंत्रियों ने उन्हें शुभकामनाएं दी हैं। वहीं
सोशल मीडिया पर कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज के समर्थक बधाई संदेश भेज रहे हैं। मुख्यमंत्री धामी ने सुबह ही ट्वीट करते हुए लिखा कि ‘कैबिनेट मंत्री श्री सतपाल महाराज जी को जन्मदिवस की हार्दिक शुभकामनाएं। भगवान केदारनाथ से आपके उत्तम स्वास्थ्य एवं दीर्घायु की कामना करता हूं’। बता दें कि वह चौबट्टाखाल क्षेत्र से उत्तराखंड विधानसभा चुनाव में विधायक के रूप में चुने गए थे। उन्होंने 7354 मतों से राजपाल सिंह बिष्ट को हराया था।
महाराज का जन्म 21 सितंबर 1951 को हरिद्वार में हुआ था—
बता दें कि ‘सतपाल सिंह रावत को सतपाल महाराज के रूप में जाना जाता है’। महाराज का जन्म 21 सितंबर 1951 को कनखल, हरिद्वार में हुआ था। वह प्रसिद्ध आध्यात्मिक गुरु योगीराज परमंत श्री हंस और राजेश्वरी देवी के बेटे हैं। गौरतलब है कि सतपाल महाराज ने उत्तराखंड के गठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। एक सांसद और केंद्रीय मंत्री के रूप में उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा और इंद्र कुमार गुजराल और पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री ज्योति बसु पर उत्तराखंड को अलग राज्य बनाने के लिए दबाव डाला था। केंद्र की मनमोहन सरकार में उन्हें 5 मई 2010 को ‘लोक लेखा समिति’ के सदस्य और 19 अक्टूबर 2010 को सामान्य प्रयोजन समिति के सदस्य के रूप में नियुक्त किया गया था। साथ ही वह रक्षा पर 20 सदस्यीय संसदीय स्थायी समिति के प्रमुख भी थे। आखिरकार महाराज ने 21 मार्च 2014 को कांग्रेस पार्टी छोड़ दी और भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए। इसके अलावा उन्होंने 5 अप्रैल 2014 को 15वीं लोकसभा से इस्तीफा दे दिया। तब से वह भारतीय जनता पार्टी में सक्रिय रूप से उत्तराखंड में साल 2017, त्रिवेंद्र सिंह रावत सरकार के कार्यकाल से अब तक कैबिनेट मंत्री बने हुए हैं। सतपाल महाराज के सभी पार्टियों के नेताओं के साथ अच्छे रिश्ते हैं।
कैबिनेट मंत्री सतपाल उत्तराखंड में दो बार मुख्यमंत्री बनने से रह गए—
इसी साल मार्च और जुलाई के महीने में भाजपा हाईकमान के उत्तराखंड में मुख्यमंत्री नेतृत्व परिवर्तन के बाद सतपाल महाराज का नाम सीएम पद की रेस में आगे चल रहा था। पहले भाजपा आलाकमान ने त्रिवेंद्र सिंह रावत को हटाया, तब महाराज को राज्य की कमान देने की चर्चाएं तेज थी लेकिन ऐनमौके पर तीरथ सिंह रावत को सत्ता सौंप दी गई। कुछ महीनों बाद एक बार फिर उत्तराखंड में नेतृत्व परिवर्तन के बाद सतपाल महाराज का नाम मुख्यमंत्री की दौड़ में सुर्खियों में था लेकिन फिर एक बार ‘निराशा’ हाथ लगी। इस बार पुष्कर सिंह धामी को उत्तराखंड की ‘बागडोर’ दे दी गई। भाजपा केंद्रीय नेतृत्व के इस फैसले के बाद सतपाल महाराज की ‘नाराजगी’ भी खुलकर सामने आई थी। 4 जुलाई को मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने से पहले सुबह पुष्कर सिंह धामी सतपाल महाराज के आवास पहुंचे और उन्हें मनाया था। बता दें कि कैबिनेट मंत्री सोशल मीडिया पर भी बहुत एक्टिव रहते हैं। पिछले काफी समय से वह उत्तराखंड में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए युद्ध स्तर पर काम कर रहे हैं। इसके साथ बद्रीनाथ-केदारनाथ में जारी सेंट्रल परियोजनाओं को जल्द पूरा कराने के लिए आए दिन अफसरों के साथ समीक्षा बैठक करते हैं।

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