उत्तराखंड
सुपर एक्सक्लूसिव खुलासा: पी.डी भट्ट गुपचुप ट्रांसफर प्रकरण..डीजी के संज्ञान में भी नहीं है मामला..गजब
UT- उत्तराखंड पुलिस के दरोगा पीडी भट्ट को पुलिस लाइन से खानपुर ट्रांसफर किए जाने का मामला आजकल मीडिया में खूब सुर्खियां बटोल रहा है
आखिर इनके ट्रांसफर के पीछे किसका हाथ है, किसकी सोर्स लगा यह अफसर देहरादून से हरिद्वार स्थानांतरित हो गया और कैसे इस अफसर को चुपचाप कुछ दिन हरिद्वार लाइन में रख सबसे रसूखदार थाना परोस दिया गया जबकि इस अफसर के विरुद्ध एक नही कई मामलों में जांच लंबित है फिर कैसे इस अफसर को खानपुर में पोस्टिंग दी गयी।
Covid-19 Big Update
अब समझते है कि अंतर जनपदीय ट्रांसफर की प्रक्रिया क्या है ! यह अधिकार जिले के कप्तान के पास कदापि नही, कम से कम DIG ही यह कर सकता है। फिर किन कारणों के चलते DIG GARHWAL द्वारा जांच लंबित होने के बाद भी इस दागी अफसर को हरिद्वार जिला सौगात में दिया गया। निसंदेह यह पुलिस पर गंभीर प्रश्न खड़ा करता है।
मीडिया ने जब डीजी लॉ एंड ऑर्डर अशोक कुमार से इस विषय में पूछा कि पीडी भट्ट का ट्रांसफर पुलिस लाइन देहरादून से हरिद्वार पुलिस लाइन किया गया और किन ‘परिस्थितियों’ में उन्हें खानपुर का महत्वपूर्ण थाना सौंप दिया गया है तो उसपर साहिब मौन हो गए, क्या उनके खिलाफ चल रहे मुकदमे समाप्त हो गए हैं अशोक साहिब !
इस पर डीजी लॉ एंड ऑर्डर ने कहा कि उन्हें “इस प्रकरण का संज्ञान तक नहीं है। यह हरिद्वार के पुलिस कप्तान के ही संज्ञान में होगा।” पर यह सम्भव कैसे है जब देहरादून जिले का एक दागी दरोगा हरिद्वार पहुंच जाए और पुलिस के आला अधिकारी पल्ला झाड़ ले। यह असंभव है कि बड़े अधिकारियों के ‘हाँ’ ना बोलने पर भी इस दागी का ट्रांसफर हो और अब मलाईदार थाना भी परोस दिया जाए।
Board Exams Uttarakhand
महत्वपूर्ण बात यह है कि पुलिस मुख्यालय पहले भी कह चुका है और निर्देश भी जारी कर चुका है कि विवादित छवि के पुलिसकर्मियों को महत्वपूर्ण थाने-चौकियों का प्रभारी न बनाया जाए। इसके बावजूद पीडी भट्ट को खनन के लिए सबसे चर्चित हरिद्वार जिले का खानपुर थाना सौंपा गया है। निसंदेह इससे प्रतीत होता है कि कुख्यात पुलिस अफसर ही कुख्यात थाने का मालिक होगा।
बाकी नवंबर महीने में जब पीडी भट्ट सहसपुर देहरादून के थाने में तैनात थे तो इसी दौरान इस थाने में अवैध हिरासत में एक व्यक्ति की मौत हो गई थी, जिसकी जांच अब किसी ठंडे बस्ते में पड़ी गल रही है। आखिर सर पर साहिब का हाथ जो है! अब यह साहब कौन है यह हम ढूंढ़ ही लेंगे!
एसपी सिटी श्वेता चौबे की जांच पर इस मामले में मुकदमा दर्ज किया गया था तथा न्यायिक जांच भी बिठाई गई है। अभी तक यह साफ नहीं है कि इन दोनों जांच का क्या हुआ ! शायद भट्ट के ट्रांसफर के साथ ही जांच भी मर गयी होगी।
इस दौरान पीडी भट्ट देहरादून लाइन हाजिर कर दिए गए थे तथा कुछ समय बाद उन्हें बहाल करके पुलिस लाइन हरिद्वार ट्रांसफर कर दिया गया था। अब कुछ दिन पहले ही उन्हें खानपुर जैसा खनन के लिए बदनाम मलाईदार थाना सौंपा गया है जो इस अफसर की बड़ी पहुंच को दर्शाता है।
इस पर पहले दिन से ही सवाल खड़े हो रहे हैं। गौरतलब बात यह भी है कि इस ट्रांसफर सूची को पुलिस के सर्वोच्च मुखिया अनिल कुमार रतूड़ी को भी प्रतिलिपि नहीं की गई है।
इसकी प्रतिलिपि सिर्फ डीजी लॉ एंड ऑर्डर को ही सूचनार्थ की गई है।
ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि क्या महज औपचारिकता के लिए ही सही लेकिन क्या ऐसे अधिकारियों के ट्रांसफर की सूचना की प्रतिलिपि पुलिस महानिदेशक अनिल रतूड़ी को की जानी जरूरी है भी या नहीं।

लेटेस्ट न्यूज़ अपडेट पाने के लिए -
👉 उत्तराखंड टुडे के वाट्सऐप ग्रुप से जुड़ें
👉 उत्तराखंड टुडे के फेसबुक पेज़ को लाइक करें
Latest News -
Keuntungan Menggunakan Slot QRIS Solusi Transaksi Cepat dan Praktis untuk Pemain Indonesia
डीएम सविन बंसल की कार्यशैली को जनसमर्थन, लापरवाही पर कार्रवाई, जनता का भरोसा मजबूत…
उत्तराखंड: धामी सरकार के नाम एक और कीर्तिमान उत्तराखण्ड में पर्यटकों की संख्या ने तोड़ा रिकॉर्ड…
होटल में निवेश के नाम पर 2 करोड़ से अधिक की धोखाधड़ी, कोर्ट के आदेश पर केस दर्ज…
मुख्यमंत्री ने 1035 सहायक अध्यापकों को सौंपे नियुक्ति पत्र, शिक्षा के स्तर को नई मजबूती…















Subscribe Our channel