उत्तराखंड
गजब: बेरोजगारी लोन में बैंक कर रहा इनकम प्रूफ की डिमांड, बेरोजगार युवा कर रहे ठगा महसूस
देहरादून। मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना के तहत बेरोजगार युवाओं के साथ गजब खेल चल रहा है। लोन का नाम स्वरोजगार योजना है और उपभोगता से इनकम टैक्स रिटर्न प्रूफ की डिमांड की जा रही है। कह सकते हैं कि लोन लेने पहुंच रहे युवा कागजी करवाई के झमेले में फंस कर हताश होकर वापस लौट रहे हैं।
जबकि मुख्यमंत्री ने कुछ दिन पूर्व ही जिले के अधिकारियों को निर्देशित किया था कि लोन लेने में किसी भी प्रकार की समस्या नही आनी चाहिए। बैंक दोषी है या यह लोन योजना परवान नही चढ़ पा रही है।
बहरहाल धरातल पर कुछ नजर नहीं आ रहा है। यानि जरूरतमंद उपभोक्ताओं को लोन योजना का लाभ नही मिल पा रहा है।
एक मीडिया रिपोर्ट्स के आधार पर मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना को लेकर जब कुछ ग्रामसभा के बेरोजगार युवाओं से बात की गई तो कई तथ्य सामने निकल कर सामने आए।
बेरोजगार युवाओं ने बताया कि वह किसी योजना से जुड़कर अपना खुद का स्वरोजगार शुरू करना चाहते थे। लेकिन लोन लेने की प्रक्रिया बड़ी जटिल है। यदि कोई बेरोजगार युवक ऑनलाइन आवेदन कर बैंक से ऋण लेना चाहता हैं तो ये एक बड़ी चुनौती है। इसका मुख्य कारण है सरकार की तरफ से बैंकों के लिए कोई गाइडलाइन जारी नहीं होना।
ऐसे में बैंक ऋण देने से पहले आईटीआर के साथ ही गारंटी की मांग कर रहा है। जिसे दे पाना हर किसी के लिए मुमकिन नहीं है।
जिससे सरकार का बेरोजगार युवाओं के लिए स्वरोजगार लोन सुविधा की सरलता हवाई साबित हो रही है। ऐसे में युवा बेरोजगार अपने आप को ठगा महसूस कर रहे हैं।
एक तरफ सरकार मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना से युवाओं को रोजगार मुहैया कराने के दावे कर रही है, लेकिन वास्तविकता ये है कि एक बेरोजगार युवा चाह कर भी इस कल्याणकारी योजना का लाभ नहीं ले पा रहे हैं।
जानिए क्या है लोन की प्रक्रिया
ऑनलाइन पंजीकरण की प्रक्रिया से जुड़ने के लिए यदि कोई युवक या युवती जुड़ना चाहते हैं तो उसे सबसे पहले www.msy.uk.gov.in पर जाकर अपना पंजीकरण कराना होता है, लेकिन सवाल ये है कि प्रदेश के जिन दूरस्थ इलाकों में आज भी इंटरनेट सुविधा खस्ताहाल हैं, उस जगह के युवा इस योजना से कैसे जुड़ेंगे।
यदि कोई युवक मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना की वेबसाइट पर पंजीकरण करा लेता है तो उसके बाद उसे जीएसटी नंबर और ट्रेड लाइसेंस इत्यादि जैसे डाक्यूमेंट्स के लिए भागदौड़ करनी पड़ती है।
कुल मिलाकर इस पूरी भागा-दौड़ी में काफी वक्त लगता है। इसके अलावा सीए की मदद लेना भी जरूरी बन गया है।
रोजगार योजना से जुड़ने के बाद मुख्यमंत्री युवा बैंक में ऋण लेने पहुंचता है तो उससे कई तरह के दस्तावेज मांगे जाते हैं। जिसमें आईटीआर और गेरेंटर इत्यादि से जुड़े डॉक्यूमेंट शामिल हैं।
ऐसे में एक बेरोजगार युवा के लिए इन सभी डाक्यूमेंट्स को बैंक को मुहैया करा पाना किसी चुनौती से कम नहीं।
मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना से उत्सुक युवा इन दिनों निराश हो रहे हैं। बहरहाल, राज्य सरकार लगातार युवाओं को मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना से जुड़कर अपना स्वरोजगार शुरू करने को तो कह रही है, लेकिन जिस तरह से युवाओं की नाराजगी सामने आ रही है।
वह सोचनीय विषय जरूर बन गया है। या कहा जा सकता है कि बैंक की कोई गाइड लाइन न होने के चलते इस लाभकारी योजना पर पलीता लग रहा है।
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