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Edible Oil Price Down: सरसों, सोयाबीन समेत सस्ते हो गए ये सभी तेल, चेक करें तेल के दामों की नई लिस्ट…
देश: खाद्य तेल की कीमतों में भारी बढ़ोतरी से जहां लोगों की रसोई का बजट बिगड़ गया था। वहीं अब राहत भरी खबर आ रही है। खाद्य तेल की कीमतों में कटौती की है। सरसों, सोयाबीन, सीपीओ, पामोलीन, बिनौला तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट आई है। वहीं, बाकी तेल की कीमतें जस की तस रहें। मदर डेयरी ने भी खाद्य डेयरी की कीमतों में 15 रुपये प्रति लीटर की कटौती की है।
बताया जा रहा है कि धारा सरसों के तेल का एक लीटर पॉली पैक, जिसकी कीमत वर्तमान में 208 रुपये है, उसकी कीमत घटाकर 193 रुपये कम की जाएगी। वहीं, धारा रिफाइंड सूरजमुखी तेल की बात करें तो धारा रिफाइंड जिसके 1 लीटर पॉली पैक की कीमत इस समय 235 रुपये है, उसके मौजूदा एमआरपी में कटौती कर इसे 220 रुपये कर दी जाएगी। इसके अलावा धारा रिफाइंड सोयाबीन तेल की 1 लीटर पॉली पैक की कीमत में कटौती कर इसे 209 रुपये से 194 रुपये कर दिया जाएगा।
तेल के लेटेस्ट रेट्स-
- सरसों तिलहन – 7,415-7,465 (42 फीसदी कंडीशन का भाव) रुपये प्रति क्विंटल
- मूंगफली – 6,710 – 6,845 रुपये प्रति क्विंटल
- मूंगफली तेल मिल डिलिवरी (गुजरात) – 16,000 रुपये प्रति क्विंटल
- मूंगफली सॉल्वेंट रिफाइंड तेल 2,670 – 2,860 रुपये प्रति टिन
- सरसों तेल दादरी- 14,850 रुपये प्रति क्विंटल
- सरसों पक्की घानी- 2,335-2,415 रुपये प्रति टिन
- सरसों कच्ची घानी- 2,375-2,485 रुपये प्रति टिन
- तिल तेल मिल डिलिवरी – 17,000-18,500 रुपये प्रति क्विंटल
- सोयाबीन तेल मिल डिलिवरी दिल्ली- 16,400 रुपये प्रति क्विंटल
- सोयाबीन मिल डिलिवरी इंदौर- 15,750 रुपये प्रति क्विंटल
- सोयाबीन तेल डीगम, कांडला- 14,800 रुपये प्रति क्विंटल
- सीपीओ एक्स-कांडला- 14,500 रुपये प्रति क्विंटल
- बिनौला मिल डिलिवरी (हरियाणा)- 14,950 रुपये प्रति क्विंटल
- पामोलिन आरबीडी, दिल्ली- 16,000 रुपये प्रति क्विंटल
- पामोलिन एक्स- कांडला- 14,850 रुपये (बिना जीएसटी के) प्रति क्विंटल
- सोयाबीन दाना – 6,800-6,900 रुपये प्रति क्विंटल
- सोयाबीन लूज 6,500- 6,600 रुपये प्रति क्विंटल
- मक्का खल (सरिस्का) 4,000 रुपये प्रति क्विंटल
बताया जा रहा है कि धारा खाद्य तेलों की अधिकतम खुदरा कीमतों (एमआरपी) में 15 रुपये प्रति लीटर तक की कमी की जा रही है। यह कमी बड़े पैमाने पर सरसों के तेल, सोयाबीन तेल और सूरजमुखी तेल जैसे प्रमुख उत्पादों में की जा रही है। सरकार की पहल व अंतरराष्ट्रीय बाजारों के कम प्रभाव और बेहतर घरेलू सूरजमुखी उत्पादन व तेल की आसान उपलब्धता के कारण ये संभव हो सका है।

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