चंपावत
चम्पावत: पंचेश्वर बांध की गहराई में समा जाएंगे 4.39 लाख पेड़, कई प्रजाति के पेड़ों की होगी जलसमाधि।
चम्पावत: भारत और नेपाल की सामूहिक परियोजना पंचेश्वर बांध के निर्माण के लिए उत्तराखंड के तीन जनपदों चंपावत, पिथौरागढ़ और अल्मोड़ा की लगभग 9100 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहित होनी है
साथ ही तीनों जनपदों के 134 गांव और लगभग 31 हजार परिवारों के पुनर्वास किए जाने का अनुमान है। बांध की जद में हजारों लाखों पेड़ भी इस बांध की भेंट चढ़ेंगे।
वन विभाग ने चम्पावत जिले के उन हिस्सों के पेड़ों की गिनती का कार्य पूरा कर डाटा तैयार कर लिया है जो बांध प्रभावित क्षेत्र की जद में हैं। चंपावत जनपद के बांध प्रभावित क्षेत्र में करीब 4.39 लाख पेड़ पंचेश्वर बांध की बलि चढ़ेंगे।
वन विभाग द्वारा तैयार रिपोर्ट को जल्द जिला प्रशासन को भेजा जाएगा। पंचेश्वर बांध की अथाह गहराई में साल, सागौन, साजन समेत तमाम प्रजातियों के पेड़ समा जाएंगे।
वन विभाग ने प्रस्तावित पंचेश्वर बांध की जद में आने वाले पेड़ों की गिनती का कार्य खत्म कर लिया है। डूब क्षेत्र में आने वाले पेड़ों की गिनती का कार्य 26 दिसंबर 2017 से शुरू हुआ था लेकिन इसके कुछ समय बाद बजट नहीं मिलने से पेड़ों की गिनती का कार्य रोकना पड़ा था।
लगभग ढाई साल के बाद इस वर्ष अगस्त में दोबारा से पेड़ों की गिनती का कार्य शुरू किया गया। इस कार्य के लिए केंद्र सरकार से चम्पावत जिले को 23.09 लाख रुपये स्वीकृत हुए।
डूब क्षेत्र में आने वाले पेड़ों की संख्या
काली कुमाऊं 405760
लोहाघाट 25709
चम्पावत 7859
देवीधुरा 224
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