उत्तराखंड
जबरदस्त खुलासा: जीरो टॉलरेंस में जिसकी चलती उसकी क्या गलती..मेड बाय पार्षद घोटाला
UT- देहरादून नगर निगम की ओर से वार्डों में सफाई के लिए बनाई गई मोहल्ला स्वच्छता समिति में चल रहे घोटाले का आखिरकार पर्दा खुल गया है।
नगर निगम की ओर से प्रत्येक वॉर्डों में सफाई के लिए मोहल्ला स्वच्छता समिति बनाई गई है, उसमे पार्षदों ने अपने ही रिश्तेदारों को ही समिति में कर्मचारी दर्शाया हुआ। और नगर निगम से उनके नाम पर जारी मासिक बजट खुद हड़प रहा है।
अब सफाई कर्मचारी परेशान होकर कम मानदेय देने के आरोप निगम पर लगाने लग गए है। इसी बीच इसका गुस्सा शनिवार को एक सफाई कर्मचारी द्वारा देखने को मिला, सफाई कर्मचारी ने कूड़े से भरा रिक्शा सड़क पर पलट दिया, और जमकर हंगामा किया। इस दौरान उसने पार्षद पर हर माह कम मानदेय देने का आरोप लगाया। इसका वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।
कांवली रोड निवासी अनिल कुमार नगर निगम के तहत वॉर्ड-23 खुड़बुड़ा में चलाई जा रही मोहल्ला स्वच्छता समिति में सफाई कर्मचारी है। निगम की ओर से समितियों में किसी वार्ड में पांच तो किसी में आठ कर्मी रखे गए हैं।
इनका मासिक मानदेय लगभग आठ हजार बैठता है। निगम यह राशि वार्ड समिति के खाते में ट्रांसफर करता है और वॉर्ड के पार्षद द्वारा राशि कर्मचारियों को दी जाती है। बीते वर्ष जुलाई में बनी इन समितियों में शुरू से ही घोटाले के आरोप लगते रहे हैं।
शनिवार को कर्मचारी अनिल कुमार ने वॉर्ड पार्षद विमला गौड़ पर हर माह मानदेय कम देने का आरोप लगा कांवली रोड पर हंगामा किया। उसने कूड़े के रिक्शे को बीच सड़क पर पलट दिया व रिक्शे को भी तोड़ डाला।
सूचना पर पुलिस पहुंची व निगम कर्मियों को बुलाकर सड़क से कूड़ा उठवाया। कर्मचारी का आरोप था कि पार्षद कभी पांच हजार रुपये तो कभी छह हजार रुपये मानदेय देती हैं। इसका वीडियो बना सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया गया। नगर निगम की ओर से प्रकरण में जांच और कार्रवाई की बात कही गई है।
नगर आयुक्त विनय शंकर पांडेय ने बताया कि मोहल्ला स्वच्छता समिति में मानदेय जारी करने के लिए जनवरी में नियम बदल दिए गए थे। पार्षदों से हर माह कर्मचारियों की पूरी लिस्ट ली जाती है और उसके बाद ही मानदेय जारी होता है। मानदेय कम देने की बात बेहद गंभीर है। कर्मचारी ने जो भी आरोप लगाए हैं, उसकी जांच कराई जाएगी और दोषी जो भी होगा, उसके विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी। चाहे गलती कर्मचारी की हो या फिर पार्षद की।
खुड़बुड़ा के पार्षद विमला गौड़ ने बताया कि नगर निगम प्रशासन के नियमों के तहत समिति के कर्मचारियों को दैनिक आधार पर मानदेय दिया जाता है। ये कर्मचारी हाजिरी लगाकर चला जाता है और काम तक नहीं करता। मैनें निकालने की बात कही तो वह आत्महत्या की धमकी देने लगा। चूंकि वह दिव्यांग है, लिहाजा मानवता के आधार पर मैनें उसे नहीं निकाला। वह अनर्गल आरोप लगा रहा है। मुझे यह भी पता चला है कि वह शराब पिये हुए था। हंगामे की सूचना मैनें ही पुलिस को दी थी।

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