देहरादून
कोरोना भगवान कृष्ण की देन, कांग्रेस के दिग्गज दे रहे स्टेटमेंट, स्टेट गवर्मेन्ट कोरोना के सामने सरेंडर
देहरादून। कोरोना सृष्टि पालन हार भगवान कृष्ण की देन है। उन्होंने ही कोरोना को दिया है, क्योंकि क से कृष्ण क से कोरोना। यह बात हम नहीं कह रहे हैं। यह स्टेटमेन्ट कांग्रेस के दिग्गज, प्रदेश उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना ने दी है।
उन्होंने कहा है कि राज्य सरकार कोरोना के आगे आत्म समर्पण कर चुकी है, क्योंकि हालात के आगे सरकार बेबस हो गई योजनाए धरी की धरी रह गई। समय पर सही निर्णय नही लिए गए फलस्वरूप प्रदेश में हालात बेकाबू हो गए हैं।
मीडिया रिपोर्ट्स के आधार पर प्रदेश उपाध्यक्ष धस्माना ने कहा कि राज्य सरकार का चारधाम को लिया गया निर्णय सरासर गलत है। प्रदेश में कोरोना से हालत दिन ब दिन बिगड़ रहे हैं, ऐसे में अन्य राज्यों से यात्रा पर आने वाले श्रद्धालुओं से प्रदेश में स्थिति औऱ बेकाबू हो सकती है।
यही वजह है कि तीर्थ पुरोहित यात्रा को लेकर हामी नही भर रहे हैं। इस दौरान वह कोरोना को लेकर एक अजीबो गरीब बयान देने से भी नहीं चूके। उन्होंने कहा कि गीता में श्रीकृष्ण ने कहा है कि वह सृष्टि के निर्माता,पालनकर्ता और संहारकर्ता हैं इसलिए कोरोना उनकी ही देन है।
इस मौके पर सरकार को कोषते हुए कहा कि सरकार कोरोना के सामने सरेंडर कर चुकी है जबकि धनराशि लेकर कोरोना टेस्टिंग को लेकर उन्होंने सरकार पर तंज कसा है।
भाजपा समर्थकों का पलटवार
डबल इंजन की सरकार के समर्थन में रहने वाले लोगों के चर्चाओं का बाजार अब गर्म होता दिखाई दे रहा है। सामाजिक कार्यकर्ता औऱ भाजपा समर्थक सुन्दर रुडोला ने कांग्रेस की इस बयान बाजी का पटाक्षेप करते हुए कहा कि विपक्ष का काम ही सत्ता में रहने वाले लोगों की निंदा करना है।

क्योंकि विपक्ष के पास अब बयानबाजी के अलावा कुछ शेष नही रह गया है। कई वर्षों से देश को लूटने वाली कांग्रेस अब खिसयानी बिल्ली खंभा नोचे की कहावत चरितार्थ कर रही है।
जनता की इतनी हितेषी ही होती कांग्रेस तो भाजपा को डबल इंजन का मौका न मिलता। ये पब्लिक है जो सब जानती है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत जनता के हितों में लगातार कार्य कर रहे हैं। डबल इंजन की सरकार ने कोरोना को लेकर ग्रास रुट पर काम किया है, जो धरातल पर दिख भी रहा है।
उन्होंने कहा कि सरकार के कार्यों की प्रशंसा सभी जगह सुनने को मिल रही है। इस आधुनिक औऱ वैज्ञानिक युग मे महामारी को आध्यात्मिक दृष्टिकोण से जोड़ना व्यंगात्मक बयानबाजी है।
मौके पर सामने खड़ी समस्या का एक जुट होकर निराकरण ढूंढने की बजाय काग्रेस हमेशा से ही व्यंगात्मक स्टेटमेंट देती आई है।
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