देहरादून
दुःखद खबर। नहीं रहे आंदोलनकारी त्रेपन सिंह चौहान, लंबे समय से बीमारी से जूझ रहे थे त्रेपन।
देहरादून। आंदोलनकारी त्रेपन सिंह चौहान नहीं रहे, वह लंबे समय से बीमारी से जूझ रहे थे। आखिर कार जिंदगी से उन्होंने दामन छुड़ा लिया।
उनके निधन की खबर सुनकर सभी वर्ग के लोग शोकाकुल हो गए है। उत्तराखण्ड टुडे मीडिया भी उन्हें श्रद्धांजलि देता है।
आपको बता दें उत्तराखंड में जन आंदोलनों के साथी त्रेपन चौहान दुनिया से विदा कह गए। त्रेपन चौहान उत्तराखंड में आंदोलनों का एक जाना पहचाना चेहरा हैं।
विभिन्न आंदोलनों में उनकी सक्रीय हिस्सेदारी रही है। खासतौर पर टिहरी के फलेंडा में जल विद्युत परियोजना के खिलाफ स्थानीय लोगों के आंदोलन का उन्होंने आगे बढ़ कर नेतृत्व किया।
देहारादून में असंगठित मजदूरों को संगठित करने के काम भी त्रेपन भाई ने किया। “हे ब्वारी” और “यमुना” जैसे उपन्यासों के लेखक भी त्रेपन भाई हैं।
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