देहरादून
संशय: इस PSC के ट्रांसफर के लिए अलग क़ानून, आख़िर मांजरा क्या है, जरा पढ़िए…
देहरादूनः प्रदेश में मुख्य सचिव एसएस संधू के चार्ज संभालते ही राजनैतिक आकाओं का फायदा उठाने वाले अधिकारियों के लिए मुख्य सचिव ने सख्त आदेश जारी किए। आदेश ऐसा कि तबादले के बाद मनपसंद चार्ज लेना, ट्रांसफर रुकवाने की गतिविधियों पर पूर्ण रूप से बैन लग गया। इस आदेश के बाद अधिकारियों में राजनीतिक पैरवी करवाने का डर भी दिखाई दिया।
लेकिन अब एक ऐसे पीसीएस महाशय की नियुक्ति को लेकर आदेशों में बार बार परिवर्तन करना मुख्य सचिव एसएस संधू के प्रयासों पर सवालिया निशान लगा रहा है। सूबे में कुछ दिनों पूर्व एक सीनियर पीसीएस अधिकारी को लेकर शासन जिस तरह अलग-अलग नियुक्ति के आदेश दे रहा है, उसने मुख्य सचिव के इस प्रयास को कुछ कमजोर किया है। मांजरा पीसीएस अधिकारी अभिषेक त्रिपाठी का है। जिनकी नियुक्ति को लेकर अलग अलग आदेश जारी हो रहे हैं। पूर्व में नेशनल हेल्थ मिशन देख रहे अभिषेक त्रिपाठी का तबादला होने के बाद दो हफ्तों के भीतर उन्हें वापस एनएचएम में एएमडी की जिम्मेदारी दे दी गई। जो कि आदेशों की धज्जी पीट रहा है। अभिषेक त्रिपाठी इससे पहले भी उसी पद पर रह चुके हैं। इसके अलावा उन्हें कर्मकार कल्याण बोर्ड के सचिव की अतिरिक्त जिम्मेदारी भी दे दी गई है।
अब अभिषेक त्रिपाठी की नई नियुक्ति को लेकर बड़े सवाल इसलिए भी खड़े हो रहे हैं,क्योंकि पूर्व में करीब 84 अधिकारियों के तबादले के दौरान 4 अधिकारियों द्वारा तबादले के बाद भी ज्वॉइन नहीं किया था। जिस पर मुख्य सचिव ने उक्त चार अधिकारियों से जवाब तलब भी किया। लेकिन एक तरफ अधिकारियों द्वारा पोस्टिंग न लिए जाने पर उनसे जवाब मांगे जा रहे हैं, वंही दूसरी तरफ एक अधिकारी को कुछ ही दिनों में वापस उसके पुरानी पोस्टिंग पर ही भेज दिया जाना यह स्पष्ट कर रहा है कि मुख्य सचिव एसएस संधू का अधिकारियों के लिए कड़ा संदेश कमजोर हो गया है। क्योंकि इस पीसीएस अधिकारी को तीसरी बार वही जिम्मेदारी मिल गई जिससे इसे हटाया गया था।

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