उत्तराखंड
हरेला पर्व: अब तक लगाए गए पौध सिर्फ फाइलों में, धरातल पर कुछ नहीं, हर साल करोडों का बजट होता है पौधरोपण के लिए पारित
देहरादून। देवभूमि उत्तराखंड का प्रसिद्ध प्राकृतिक त्यौहार हरेला बुधवार से शुरू हो गया है। अब सरकारी मशीनरी खूब जोर शोर से तमाम जगहों पर प्रकृति संदेश देते हुए पौधरोपण अभियान चलाएगी।
इस बार भी एक जुलाई से 30 जुलाई तक वृहद पौधरोपण किया जाना है। चोंकाने वाली बात यह है कि पिछले 20 सालों से उत्तराखंड की धरा पर कितने पेड़ लगाए गए औऱ वह जीवित हैं भी की नहीं, उत्तराखंड की धरती पर अब तक लगाए गए करोड़ों पौधे कहीं दिखते नहीं हैं।
वन विभाग के अनुसार इस बार पूरे साल में पौने दो करोड़ से भी ज़्यादा पौधरोपण किया जाना है इस वर्ष वन विभाग 1.09 करोड़ रुपये खर्च कर 1.78 करोड़ पौधे लगाएगा।
जरा गौर करें तो वन विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार 2019-20 में एक करोड़ 37 लाख पौधे लगाए जाने थे, लेकिन दो करोड़ पौधे लगाए गए। वर्ष 2018-19 में 1.64 करोड़ के लक्ष्य के विपरीत 1.89 करोड़ पौधरोपण करने का दावा किया गया है।
लेकिन FSOI फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया की ताजा रिपोर्ट के अध्ययन से वन विभाग के इस दावे पर सवालिया निशान लग रहे हैं। राज्य में 2017- 2019 तक केवल 0.03 तक ही फारेस्ट कवर बढ़ पाया। जोकि नए क्षेत्रों में नही बल्कि डेन्स ग्रोथ के कारण यह कवर बढ़ पाया।
विभाग के पास आंकड़ा भी नहीं
प्रशन यह उठ रहा है कि इतने बड़े पैमाने पर हर वर्ष पौधरोपण होता है तो यह पेड़ दिख क्यों नही रहे, आखिर यह पेड़ जाते हैं तो कंहा। यह पौध लगाए भी जाते हैं कि सिर्फ कागजी करवाई तक ही सीमित रह जाते हैं।
इन सब का मूल्यांकन करने के लिए एक सेल बनाया गया है, लेकिन इस सेल के पास ऐसा कोई डेटा उपलब्ध नहीं है। इस बाबत जानकारी हासिल किए जाने पर बारे अधिकारी एक-दूसरे के पाले में गेंद फेंक रहे हैं। सेल को हेड कर रहे आईएफएस नरेश कुमार का कहना है कि वे हाल ही में इस पद पर आए हैं, इसलिए कुछ नहीं बता सकते।
हर साल पौधरोपण की इसकी प्लानिंग करने वाला नियोजन विभाग भी सवाल के जवाब में अनुश्रवण एवं मूल्यांकन सेल की ओर इशारा कर देता है।
- विभाग के पास भी नहीं पर्याप्त रिकॉर्ड
वन विभाग के पास इसका कोई रिकार्ड ही नहीं है। बीते वर्ष विभाग ने जो करोड़ों पौधे लगाने का दावा किया है या करोड़ों रुपये फूंके हैं, उनका आधार क्या है। - करोड़ों की संख्या में लगाए गए पौधों में से बरसात में लाखों भी नहीं बचे। नाम की गोपनीयता बनाये रखने की शर्त पर सीनियर आईएफ़एस अफ़सर ने बताया हकीकत तो यह है कि यह सब गोलमाल है, यह सिर्फ आंकड़ों का खेल है। धरातल पर जांच हुई तो कई अफसर घेरे में फंस जाएंगे।
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