उत्तराखंड
कैसे होगी भर्ती? पीए-स्टेनोग्राफ़र के लिए मान्यता प्राप्त इंस्टीट्यूट से कंप्यूटर कोर्स ज़रूरी लेकिन प्रदेश में एक भी नहीं
गजब: राज्य सरकार के पदों पर बेरोजगारों को मायूसी लग रही हाथ, सरकार को पता ही नहीं, जानिए क्या है मामला
देहरादून: उत्तराखंड सरकार में कम्प्यूटर कोर्स में मान्यता देने वाला एक भी संस्थान नहीं है। लिहाजा इन दिनों सरकार के द्वारा निकाली गई पर्सनल असिस्टेंट यानि पीए और स्टेनोग्राफर की 158 पोस्ट के लिए बेरोजगार असमंजस में हैं।
क्योंकि पदों में अधीनस्थ सेवा चयन आयोग का एक मानक यह भी है कि आवेदन करने वाले के पास मान्यता प्राप्त इंस्टीट्यूट से एक साल का कंप्यूटर कोर्स होना आवश्यक है। लेकिन कमाल की बात यह है कि प्रदेश में एक भी इंस्टीट्यूट ऐसा नहीं है जिसका कोर्स मान्यता प्राप्त हो।
अब ऐसे में आवेदन करने वाले को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। जबकि इस बात जानकारी सरकार को भी नहीं है, मामले का पता लगने के बाद हालांकि अब वह इस ‘गलती’ को दुरुस्त करने की बात कर रही है
नामी चर्चित और लोकप्रिय एक न्यूज चैनल लिखता है कि
अगर आप बेरोज़गार हैं और सरकारी नौकरी का इंतज़ार कर रहे थे तो यह खबर आपके लिए है।
उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (USSSC), जो सरकारी विभागों में भर्तियों के लिए एग्ज़ाम कराता है उसने एक ऐसा फरमान निकाला है जिसका जवाब आयोग के पास भी नहीं।
आयोग ने पीए और स्टेनोग्राफर्स के 158 पदों के लिए अप्प्लिकेशन मांगी है। ज़रूरी क्वालिफेकेशन में मान्यता प्राप्त इंस्टीट्यूट से एक साल का कंम्पयूटर कोर्स भी है।
लेकिन राज्य में एक भी मान्यता प्राप्त इंस्टीट्यूट ऐसा नहीं है जिसके कोर्स को आयोग माने।
इस वजह से आवेदनकर्ता परेशान हैं। बेरोज़गार संघ के प्रदेश प्रवक्ता नरेंद्र सिंह रावत का कहना है कि सरकार को अपना मत स्पष्ठ करना चाहिए कि वह चाहती क्या है?
प्रदेश भर में दर्जनों की संख्या में कम्प्यूटर इंस्टीट्यूट खुले पड़े हैं, क्या ये सब अवैध रूप से संचालित हो रहे हैं? यदि हां तो सरकार इनके खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं करती क्योंकि यहाँ हज़ारों बच्चे मोटी फीस देकर प्रशिक्षण ले रहे हैं। ये सभी इंस्टीट्यूट सोसायटी रजिस्ट्रेशन एक्ट के तहत मान्यता प्राप्त हैं।
आज से नहीं ये समस्या
अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के अध्यक्ष संतोष बडोनी का कहना है कि यह समस्या लंबे समय से बनी हुई है।
आयोग अभी तक ऐसे कैंडिडेट का चयन करता रहा है, लेकिन विभाग इसे सरकार से मान्यता प्राप्त न होना बताकर रिजेक्ट कर देता है। बाद में आयोग ने कई मामलों में कैंडिडेट का चयन कर कम्प्यूटर सर्टिफिकेट का मामला विभागों पर छोड़ दिया।
लोकसेवा आयोग में आया ऐसा ही एक मामला हाईकोर्ट में चल रहा है। दरअसल , कार्मिक विभाग की अधीनस्थ कार्यालय वैयक्तिक सहायक संवर्गीय कर्मचारी सेवा सीधी भर्ती नियमावली 2018 में शैक्षिक अहर्ता में एक नियम है कि किसी मान्यता प्राप्त संस्थान से एक वर्षीय कंप्यूटर पाठ्यक्रम उत्तीर्ण होना अनिवार्य है।
यही नियम अब ऐसी भर्तियों में रोड़ा बना हुआ है।
गवर्मेन्ट को कुछ पता ही नहीं
आयोग ने कार्मिक विभाग को पत्र भेजकर कहा है कि ‘मान्यता प्राप्त संस्थान’ स्पष्ट नहीं है। इससे यह पता नहीं लगता कि कौन-कौन से संस्थान एक वर्षीय पाठ्यक्रम के लिए मान्यता प्राप्त हैं। इससे कैंडिडेट सिलेक्शन में दिक्कतें आ रही हैं।
आयोग ने कार्मिक विभाग को सुझाव दिया है कि एक वर्षीय कंप्यूटर पाठ्यक्रम हेतु NIELIT का CCC, हिल्ट्रॉन या प्राविधिक शिक्षा परिषद आदि के संचालित या मान्यता संस्थानों के पाठ्यक्रमों का प्रावधान करना उचित होगा।
प्रवक्ता मदन कौशिक से बात करके जब पूछा गया तो उन्हें कुछ पता ही नहीं था। उन्होंने कहा कि यह बात कभी सरकार की जानकारी में नहीं आई। उन्होंने इसे गम्भीर मामला बताते हुए कहा कि अगर ऐसा हो रहा है तो इसमें सुधार किया जाएगा।
ऐसे में रोजगार की उम्मीद पाले बेरोजगार युवाओं में अब मायूसी हाथ लग रही है। सरकार को जल्द समस्या का निराकरण करना होगा।या
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