उत्तराखंड
बूढ़ाकेदार मोटर मार्ग आन्दोलन की एक झलक भाग 1
लेखकः शम्भुशरण रतूड़ी
भाग 1
बात नवम्बर 1976 की है ! देश आपातकालीन के दौर से गुजर रहा था ।
हम लोग CPM वाले थे । और CPM के पास मजदूर संगठनों के अलावा किसान सभा भी थी । इसी दौर में हमने बूढ़ाकेदार में *किसान सभा* की स्थापना की जिसके अध्यक्ष बने तोली गांव के तत्कालीन प्रधान श्री झिमलसिंह जी और संगठन की बागडोर मुझे तथा श्री राजपाल सिंह राणा को सौंपी गयी । यद्यपि श्री राणा CPI वाले थे । लेकिन विचारधारा समान थी । निश्चय हुआ कि दिवाली के दौरान थातीकठूड़ में एक *किसान सम्मेलन* का आयोजन हो ! और हमने आपातकाल के बाबजूद किसान सम्मेलन का आयोजन कर दिया ! जिसमें कामरेड *सावनचंद रमोला* *कामरेड बलबीरसिंह नेगी* के अलावा और टिहरी के कई CPM नेताओं के अलावा और भी गैर कम्युनिस्ट नेताओं ने शिरकत की ।
*नेग्याणा* में रामलीला का मंच बना हुआ था ।
अतः ढोलक्या बलिराज के दिन उसी मंच से *किसान सम्मेलन* शुरु हुआ । कई वक्ताओं ने अपने विचार रखे और अन्य समस्याओं के साथ लगभग सभी वक्ताओं ने मोटर रोड पर फोकस रखा !
समापन भाषण कामरेड *बलबीरसिंह नेगी* का था । और शायद थातीकठूड़ व मेले में आये अन्य क्षेत्र की नर नारियों ने नेगीजी के ओजस्वी भाषण को पहली बार सुन रहे थे ! अपनी धारदार बुलन्द आवाज में नेगीजी ने क्षेत्र की एक एक समस्याओं पर पर विन्दुवार बात की ! उपस्थित जनसमुदाय बेहद गौर से नेगीजी के वक्तव्य को सुन रही थी । और अंत में नेगीजी ने अपार जनता के सामने घोषणा की कि मार्च 1977 में बूढ़ाकेदार में गाड़ी पहुँच जायेगी ! जो कि बेहद विस्मयकारी वक्तव्य था । और लोगों ने इस वक्तव्य को मजाक समझा कि क्या 4 महिने में सड़क बनेगी ? और जबाब था हरगिज नहीं । यहां पर यह बताना जरुरी है कि बूढ़ाकेदार मोटरमार्ग के संबंध में नेगीजी कई बार PWD के आला अधिकारीयों से बात कर चुके थे ।और अधिकारियों ने अपनी आदतानुसार श्री नेगीजी को टरकाया होगा कि, बस! इस मार्च फाइनल (1977) में हम *चमियाला-बूढ़ाकेदार* मोटर मार्ग का निर्माण पूरा कर देंगे । उन्होंने नेगीजी को शायद *उखड़ी* नेता समझा होगा (?) उन्हें नहीं मालूम रहा होगा यह काला कोट वाला दुबला पतला नौजवान वही है जिसने छात्रों के हित में लखनऊ विधानसभा में इन्कलाबी नारों के साथ भरे सदन में सरकार के खिलाफ पर्चे फेंके । और कहना न होगा आजाद हिंदुस्तान का ऐसा विद्रोह पहली बार नेगीजी ने किया ! और गुलाम भारत में सरदार भगतसिंह ने ! बहराल यह बात यहां पर प्रसांगिक ।
हां तो ! लोगों में *मार्च में बूढ़ाकेदार गाड़ी आयेगी ?* की कानाफूसी शुरु हो गयी या यूं समझिये लोगों ने हम पर ताने कसने शुरु कर दिये ।
शेष कल ……. । आप पढेंगे कि आन्दोलन की रुपरेखा कैसे तैयार हुयी ? प्रशासन के साथ जनपद के नेताओं ने इस आन्दोलन को तोड़ने के लिये क्या हथकंडे अपनाये ? और एक विश्व प्रसिद्ध नेता ने इस आन्दोलन के खिलाफ क्या फतवा जारी किया …..।
(कृपया बतायें लेख कैसा लगा ?)
नीचे क्लिक करे अगले भाग पढ़ने के लिए
लेटेस्ट न्यूज़ अपडेट पाने के लिए -
👉 उत्तराखंड टुडे के वाट्सऐप ग्रुप से जुड़ें
👉 उत्तराखंड टुडे के फेसबुक पेज़ को लाइक करें
Latest News -
Polynion Explained: Everything You Need to Know Before Getting Started
डीएम सविन बंसल की कार्यशैली को जनसमर्थन, लापरवाही पर कार्रवाई, जनता का भरोसा मजबूत…
उत्तराखंड: धामी सरकार के नाम एक और कीर्तिमान उत्तराखण्ड में पर्यटकों की संख्या ने तोड़ा रिकॉर्ड…
होटल में निवेश के नाम पर 2 करोड़ से अधिक की धोखाधड़ी, कोर्ट के आदेश पर केस दर्ज…
मुख्यमंत्री ने 1035 सहायक अध्यापकों को सौंपे नियुक्ति पत्र, शिक्षा के स्तर को नई मजबूती…















Subscribe Our channel