उत्तराखंड
Metro Neo: देहरादून के इन रूटों पर दौड़ेगी मेट्रो नियो, लीज पर मिलेगी जमीन, जानिए- पूरी डिटेल्स…
Metro Neo: उत्तराखंड की राजधानी में सफर आसान होने वाला है। दून में अब जल्द ही नियों मेट्रो दौड़ती नजर आएगी। पहले चरण में देहरादून में मेट्रो नियो के लिए कवायद शुरू कर दी है। मेट्रो नियो प्रोजेक्ट की राह से जमीन की अड़चन दूर हो गई थी। वहीं अब सरकार ने लीज पर विभागिय जमीन देने का फैसला लिया है। माना जा रहा है कि देहरादून में अगर सबकुछ ठीक रहा और समय पर काम हुआ तो आने वाले कुछ साल में यहां के लोगों को भी मेट्रो नियो (Metro Neo) की सौगात मिल जाएगी।
मीडिया रिपोर्टस के अनुसार देहरादून मेट्रो रेल प्रोजेक्ट केंद्र और राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी परियोजनाओं में शामिल है। बुधवार को हुई कैबिनेट बैठक में मेट्रो नियों को लेकर बड़ा फैसला हुआ है। बताया जा रहा है कि सरकार ने फैसला लिया है कि मेट्रो नियो प्रोजेक्ट के लिए दून में 1 रुपए लीज पर 99 साल के लिए विभागिय जमीन दी जाएगी। जिसके बाद इस मेट्रो के निर्माण काम को पूरा होने में चार से पांच साल का समय लगेगा।
इन रूटों पर दौड़ेगी नियो मेट्रो
देहारदून शहर में मेट्रो नियो के दो कॉरिडोर बनेंगे, पहला- नॉर्थ साउथ कॉरिडोर आईएसबीटी से गांधी पार्क तक जाएगा। इस रूट पर आईएसबीटी से सेवलाकलां-आईटीआई-लालपुल-चमनपुरी-पथरीबाग-रेलवे स्टेशन-देहरादून कोर्ट-घंटाघर होकर गांधी पार्क तक मेट्रो चलेगी। जबकि दूसरा- ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर एफआरआई से रायपुर तक होगा। इसमें एफआरआई से बल्लुपुर चौक-आईएमए ब्लड बैंक, दून स्कूल-मल्होत्रा बाजार-घंटाघर-सीसीएमसी-आराघर चौक-नेहरू कॉलोनी-रिस्पना पुल-अपर बद्रीश कॉलोनी-अपर नत्थनपुर-ऑर्डिनेंस फैक्ट्री-हाथी खन्ना चौक होकर रायपुर तक होगा।
मेट्रो नियो के बनेंगे 25 स्टेशन
देहरादून में मेट्रो नियो के कुल 25 स्टेशन बनेंगे। इनकी लंबाई कुल साढ़े 22 किमी है। उम्मीद है कि सब कुछ ठीक रहा तो जल्द मेट्रो नियो का काम शुरू हो जाएगा और देहरादून वासियों को आरामदायक सफर मिलेगा। जहां-जहां से मेट्रो दौड़ेगी वहां के आसपास के इलाके को नये सिरे से विकास किया जाएगा। जिसमें रेजिडेंशियल, कार्मिशियल, एजुकेशनल सोसाइटी डेवलप की जाएगी। जिससे लोगों की ट्रेवल डिमांड कम रहेगी और बाहर जाने के लिए घर के बाहर पर ही मेट्रो स्टेशन होगा।
ऐसे होंगे कोच, जानें खासियत
बताया जा रहा कि ये मेट्रो नियो सिस्टम रेल गाइडेड सिस्टम है। इसके कोच स्टील या एल्युमिनियम के बने होंगे। मेट्रो नियो के कोच दो तरह की लंबाई के होंगे। एक कोच 12 मीटर लंबा। इसमें अधिकतम 90 यात्री सफर कर सकेेंगे। दूसरा कोच 24 से 25 मीटर लंबा होगा। इसमें 225 यात्री सफर कर सकेंगे। कोच की चौड़ाई ढाई मीटर होगी। हर स्टेशन की लंबाई 60 मीटर तक होगी। इसमें इतना पावर बैकअप होगा कि बिजली जाने पर भी ट्रेन 20 किमी चल सकेगी। इसमें ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम होगा। टिकट का सिस्टम क्यू आर कोड या सामान्य मोबिलिटी कार्ड से होगा। इसके ट्रैक की चौड़ाई आठ मीटर होगी। जहां ट्रेन रुकेगी, वहां 1.1 मीटर का साइड प्लेटफॉर्म होगा। आईसलैंड प्लेटफॉर्म चार मीटर चौड़ाई का होगा।
पूरे प्रोजेक्ट को तैयार होने में इतना होगा खर्च
बताया जा रहा है कि इस पूरे प्रोजेक्ट को तैयार होने में करीब 1600 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान लगाया जा रहा है इस प्रोजेक्ट के लिए सरकार लोन लेगी। जबकि एलिवेटेड मेट्रो को बनाने में प्रति किलोमीटर का खर्च 300-350 करोड़ रुपये आता है। अंडरग्राउंड में यही लागत 600-800 करोड़ रुपये तक पहुंच जाती है। जबकि मेट्रो नियो या मेट्रो लाइट के लिए 200 करोड़ तक का ही खर्च आता है। इस मेट्रो की लागत परंपरागत मेट्रो की निर्माण लागत से 40 फीसदी तक कम आती है। साथ ही इसमें स्टेशन के लिए ज्यादा बड़ी जगह की जरूरत भी नहीं पड़ती। यह सड़क के सरफेस या एलिवेटेड कॉरिडोर पर चल सकती है। क्योंकि इसमें लागत कम आएगी, इसलिए यात्रियों के लिए सफर सुविधाजनक होने के साथ ही किफायती भी होगा।

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