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राजनीति: उत्तराखंड कांग्रेस में निष्कासन और वापसी का खेल, 6 साल के लिए निष्कासित और तीन साल में वापसी, पढ़े रिपोर्ट…

देहरादून: उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव 2022 में सियासी हलचल तेज है टिकट न मिलने की वजह से बागी हुए नेताओं को राजनीतिक दल छह-छह साल के लिए निष्कासित कर तो रहे हैं, लेकिन यह कार्रवाई कभी प्रभावी नहीं रही। चुनाव के कुछ समय बाद ही सभी बागियों को दोबारा से आसानी से पार्टी में एंट्री हो जाती है। और पहले से ज्यादा मजबूत पोजिशन भी। कांग्रेस में हाल में कांग्रेस के पांचवे कार्यकारी अध्यक्ष बनाए गए पूर्व काबीना मंत्री शूरवीर सिंह सजवाण वर्ष 2017 में बगावत कर देवप्रयाग सीट से चुनाव लड़ गए थे। लेकिन दो साल बाद ही वो फिर से कांग्रेस में शामिल हो गए। वर्तमान में सहसपुर से कांग्रेस के उम्मीदवार आर्येंद्र शर्मा की वर्ष 2017 की बगावत काफी चर्चा में रही।

आपको बता दें कि पार्टी अनुशासन का उल्लंघन करने पर नेताओं को छह साल के लिए प्राथमिक सदस्यता से निष्कासित करने का प्रावधान है। लेकिन यदि कोई व्यक्ति अपनी भूल को स्वीकार कर ले तो उसे मौका अवश्य दिया जाना चाहिए। कांग्रेस एक लोकतांत्रिक पार्टी है। यदि कोई क्षमा मांगता है तो उसे क्षमा भी किया जाता है। यदि वह सक्षम हैं तो पार्टी उसे उम्मीदवार भी बनाती है। कांग्रेस ने इस सीट पर तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय को मैदान में उतार दिया था। टिकट कटने से नाराज आर्येंद्र के समर्थकों ने कांग्रेस मुख्यालय में जमकर तोड़फोड़ की थी। निष्कासन होने के ढाई साल बाद ही आर्येंद्र की भी कांग्रेस में दोबारा एंट्री हो गई थी। इस वक्त वो कांग्रेस के प्रदेश कोषाध्यक्ष और उपाध्यक्ष भी हैं।

धनोल्टी से कांग्रेस उम्मीदवार जोत सिंह बिष्ट वर्ष 2012 में बगावत कर चुनाव लड़ चुके हैं। वर्ष 2014 में लोकसभा चुनाव के दौरान उनकी दोबारा एंट्री हो गई थी। कांग्रेस ने उन्हें उपाध्यक्ष बनाते हुए संगठन की जिम्मेदारी दी। कालाढुंगी में महेश शर्मा और रुप्रद्रयाग के पूर्व जिलाध्यक्ष प्रदीप थपलियाल का नाम भी इसी लिस्ट में है। वर्ष 2016-17 में कांग्रेस को छोड़कर भाजपा में चले गए नेताओं को भी कांग्रेस ने दोबारा सिरमाथे बिठाया है। पूर्व काबीना मंत्री यशपाल आर्य इस वक्त बाजपुर से चुनाव लड़ रहे हैं। जबकि उनके बेटे नैनीताल के विधायक संजीव आर्य नैनीताल सीट से इस बार कांग्रेस से उम्मीदवार है। हाल में दोबारा कांग्रेस में लौटे पूर्व काबीना मंत्री हरक सिंह रावत ने इस बार अपनी राजनीतिक विरासत अपनी बहू अनूकृति गुसाईं को सौंप दी है। अनुकृति लैंसडौन सीट से कांग्रेस की प्रत्याशी हैं। हरक लैंसडौन के साथ दूसरी सीटों पर कांग्रेस के लिए प्रचार कर रहे हैं।

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