उत्तरकाशी
रोष: क्या धर्म से बड़ी हैं राजनेताओं की जनसभा, पंचकोसी वारुणी यात्रा पर रोक.. जनसभा को मंजूरी….
उत्तरकाशी: कोरोना वायरस के फैलते संक्रमण को देखते हुए प्रशासन ने पौराणिक और एतिहासिक पंचकोसी वारुणी यात्रा पर इस वर्ष भी रोक लगा दी है। पिछले वर्ष भी कोरोना महामारी के चलते इस यात्रा पर रोक लगाई गई थी। इस पौराणिक पंचकोसी यात्रा पर रोक लगाने के बाद स्थानीय निवासियों में काफी रोष है। भटवाड़ी तहसील के मजिस्ट्रेट और एसडीएम देवेंद्र नेगी ने इस बाबत आदेश जारी किए हैं। साथ ही यात्रा के संचालकों और श्रद्धालुओं से भी यात्रा में शामिल न होने की अपील की है। इस बार यह यात्रा आठ अप्रैल को होनी तय थी, जिसके लिए छह गांवों में तैयारियां चल रही थी। इस आदेश के जारी होने के बाद स्थानीय लोगों में रोष व्यक्त किया और कहा कि एक तरफ जहां जिला प्रशासन ने पंचकोसी वारुणी यात्रा पर रोक लगा रही, वहीं दूसरी तरफ बीजेपी की रैली को अनुमति दे रही है, जिसके बाद जिला प्रशासन की प्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। आपको बता दें कि पंचकोसी वारुणी यात्रा 8 अप्रैल को होनी है जिसको लेकर 6 गांवों में पूरी तैयारी हो चुकी है। अब जिला प्रशासन ने यह कहकर रोक लगा दी कि कोरोना संक्रमण के चलते वह किसी भी प्रकार का खतरा लेना नहीं चाहते और इस यात्रा में कोविड-19 दिशा-निर्देशों का पालन करवाना मुश्किल है। साथ ही आपको बता दें कि वहीं 6 तथा 7 अप्रैल को उत्तरकाशी में भारतीय जनता पार्टी का कार्यकर्ता मिलन समारोह है, जिसके लिए बीजेपी उत्तरकाशी संगठन की पूरे जोर-शोर से तैयारी चल रही है। जिसमें बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक 6 व 7 अप्रैल को उत्तरकाशी पहुंचने वाले हैं। 7 अप्रैल को बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक जिला मुख्यालय में जनसभा प्रस्तावित भी है। वहीं उत्तरकाशी बीजेपी जिला प्रवक्ता ने इस रैली में करीब 4000 लोगों के मौजूद होने का दावा किया है। अब लोगों में रोष व्याप्त होना भी लाजिम है कि राजनीतिक पार्टियां जनसभाएं कर सकती हैं परंतु हम अपनी पौराणिक और एतिहासिक पंचकोसी वारुणी यात्रा नहीं कर सकते। सवाल ये उठता है कि राजनीतिक जनसभाएं हो सकती हैं तो धार्मिक गतिविधियों पर रोक क्यों?… ऐसे में तो प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठता है कि धार्मिक यात्रा नेताओं की रैली जैसी महत्वपूर्ण नहीं है… क्या बीजेपी के जन समारोह से कोरोना नहीं फैलेगा। इस तरह के कई सवालों के जवाब जनता जानना चाहती है। आपको बता दें कि वारुणी पंचकोसी यात्रा यानी वरुणावत परिक्रमा का विशेष धार्मिक और पौराणिक महत्व माना जाता है। 15 किलोमीटर किमी पैदल चलकर वरुणावत पर्वत की परिक्रमा कर यात्रा पूरी होती है। वारुणी पंचकोसी यात्रा चैत्र माह में कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी के दिन हर वर्ष होती आ रही है। इस बार यह यात्रा आठ अप्रैल को तय थी। यात्रा मार्ग पर व्यासकुंड, गोतम गंगा, तपलिनी ऋषि की गुफा और कई देव स्थल विराजमान हैं। मान्यताओं के अनुसार कहा जाता है कि महर्षि वेदव्यास और आदि शंकराचार्य के बीच जो शास्त्रार्थ हुआ था वह इस यात्रा मार्ग पर पड़ने वाले व्यास कुंड के निकट हुआ था। यहीं आदि शंकराचार्य ने महर्षि वेदव्यास द्वारा रचित बह्मसूत्र की व्याख्या की थी। इसलिए इस यात्रा मार्ग पर हर पड़ाव महत्वपूर्ण हैं। अनादिकाल से यह यात्रा चली आ रही है। इस यात्रा में हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है, लेकिन इस बार भी कोरोना वायरस संक्रमण होने की आशंका के चलते भटवाड़ी तहसील के मजिस्ट्रेट और एसडीएम देवेंद्र नेगी ने यात्रा पर रोक के आदेश जारी किए। उपजिलाधिकारी देवेंद्र नेगी ने सभी ग्रामीणों से अपील की है कि सामूहिक कार्यों को टालने और भीड़-भाड़ में जाने से बचने का प्रयास करें। कोरोना से निपटने के लिए सर्तकता और सफाई पहली जरूरत है। कोरोना वायरस से बचाव ही सबसे बड़ा उपचार है।

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