उत्तराखंड
शासन के सर्वोच्च केंद्र सचिवालय के दर पर दम तोड़ रही स्वच्छता
UT-सरकार भले ही स्वच्छता पर जोर दे रही हो, मगर शासन के सर्वोच्च केंद्र सचिवालय के दर पर स्वच्छता दम तोड़ रही है। अपर मुख्य सचिव राधा रतूड़ी की अगुआई में सचिवालय के गेट पास और सोसायटी कार्यालय के निरीक्षण के दौरान वह इस सच से रूबरू हुईं। गेट पास कार्यालय में गेट से प्रवेश करने पर दीवारें गंदी मिली तो रास्ते में सीवर लाइन व ड्रेनेज व्यवस्था खराब होने के कारण दुर्गंध से सामना हुआ। कार्यालय के कमरे छोटे और छत की हालत खराब मिली, जिनसे पानी टपक रहा था। कार्यालय की दीवारें भी गंदी पाई गईं।
निरीक्षण में बात सामने आई कि गेट पास कार्यालय के आगंतुक स्थान पर ड्रेनेज सिस्टम खराब है। सफाई व्यवस्था भी ठीक नहीं है। आगंतुकों के लिए बैठने का पर्याप्त स्थान नहीं है। शौचालय की स्थिति भी ठीक नहीं पाई गई। पास ही आरटीआइ कार्यालय में भी छत से पानी रिसता मिला, जबकि दीवारों में सीलन मिली। अपर मुख्य सचिव ने गेट पास कार्यालय को असुरक्षित करार देते हुए नए भवन का निर्माण होने तक छतों व दीवारों की मरम्मत, लीकेज बंद कराने, सफाई व्यवस्था सुनिश्चित करने, बैठने को जगह का विस्तारीकरण व सौंदर्यीकरण कराने के मद्देनजर अपर सचिव सचिवालय प्रशासन प्रताप सिंह शाह को लोनिवि के अधिकारियों के साथ बैठक के निर्देश दिए।
उत्तराखंड सचिवालय वेतनभोगी सहकारी समिति लि.के सोसायटी कार्यालय की छत भी जर्जर हालत में मिली। अपर मुख्य सचिव ने कार्यालय की खराब स्थिति को देखते हुए वैकल्पिक व्यवस्था के तहत इसे शीघ्र ही अन्यत्र शिफ्ट करने के निर्देश दिए। यह भी निर्देश दिए कि नए बनने वाले भवन में गेट पास कार्यालय, आरटीआई कार्यालय व सोसायटी कार्यालय को शिफ्ट किया जाए।
सचिवालय में प्लास्टिक पूरी तरह प्रतिबंधित
देर से ही सही, मगर अब राज्य में शासन के सर्वोच्च केंद्र सचिवालय में प्लास्टिक और उससे बनी वस्तुओं के उपयोग पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया है। मुख्यमंत्री की घोषणा के क्रम अपर मुख्य सचिव ने इस संबंध में आदेश जारी किए हैं और इस पर गुरुवार से अमल भी शुरू हो गया है। वहीं, चिंता की बात यह है कि प्रदेश में पॉलीथिन कैरीबैग व प्लास्टिक पर प्रतिबंध होने के बावजूद शासन में इस तरह की पहल अब जाकर हुई है, जबकि यह सबसे पहले यहीं होनी चाहिए थी।
दूसरी तरफ, देहरादून शहर समेत राज्यभर में धड़ल्ले से पॉलीथिन व प्लास्टिक का इस्तेमाल हो रहा है। पर्यावरणीय दृष्टि से बेहद संवेदनशील उत्तराखंड में पॉलीथिन कैरीबैग और प्लास्टिक का इस्तेमाल यहां के पर्यावरण के लिए बड़ी मुसीबत बनकर उभरा है। पूर्व में पॉलीथिन कैरीबैग व प्लास्टिक पर प्रतिबंध की कवायद हुई, मगर यह परवान नहीं चढ़ पाई। इसके बाद यह मसला हाईकोर्ट में पहुंचा तो कोर्ट ने भी इस दिशा में सख्ती से कदम उठाने के निर्देश सरकार को दिए। लंबे इंतजार के बाद मौजूदा सरकार ने पॉलीथिन-प्लास्टिक पर प्रतिबंध की दिशा में कदम उठाए हैं।
हाल में मुख्यमंत्री ने एक अगस्त से राज्य में पॉलीथिन- प्लास्टिक के उत्पादों पर प्रतिबंध का एलान किया था। इसी कड़ी में अब जाकर सचिवालय में प्लास्टिक विशेषकर माइक्रोप्लास्टिक के उपयोग पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया गया है। अपर मुख्य सचिव राधा रतूड़ी की ओर से इस संबंध में आदेश जारी किए गए हैं। इसके मुताबिक राज्य सचिवालय में होने वाली किसी भी बैठक व कार्यशाला आदि में प्लास्टिक से निर्मित वस्तुओं का प्रयोग नहीं किया जाएगा। पीने के पानी के लिए प्लास्टिक की बोतलों को पूर्ण रूप से वर्जित किया गया है।
इसके स्थान पर वाटर डिस्पेंसर और वाटर पेपर ग्लास का प्रयोग किया जाएगा। आदेश में कहा गया है कि सचिवालय के विभिन्न अनुभागों व कार्यालयों में प्लास्टिक से बनी वस्तुओं के प्रयोग से बचा जाए। इनकी जगह वैकल्पिक साधनों का प्रयोग करने की सलाह दी गई है। अधिकारियों व कर्मचारियों को सलाह दी गई है कि यदि वे अपने साथ पीने का पानी लाते हैं तो इसके लिए प्लास्टिक बोतल की जगह मेटल अथवा कांच की बोतलों का उपयोग करें।
सचिवालय व विधानसभा में प्रवेश को गाइडलाइन जारी
सचिवालय और विधानसभा में प्रवेश के लिए शासन ने गाइडलाइन जारी कर दी है। अपर मुख्य सचिव राधा रतूड़ी की ओर से इस संबंध में आदेश निर्गत कर दिए गए हैं। अब सचिवालय में आने वाले आगंतुकों को सुबह 11 से शाम पांच बजे के बीच दो घंटे के लिए दैनिक प्रवेश पत्र अपर सचिव एवं उससे उच्च स्तर के अधिकारियों की संस्तुति पर ऑनलाइन जारी किए जाएंगे। दूरभाष अथवा मौखिक आधार पर प्रवेश पत्र निर्गत नहीं किए जाएंगे। गाइडलाइन में यह भी कहा गया है कि सूचना का अधिकार अधिनियम से संबंधित कार्यों के लिए आने वाले लोगों को संबंधित जन सूचना अधिकारी अथवा अपीलीय अधिकारी के नोटिस व सूचना पत्रों के आधार पर दैनिक प्रवेश पत्र निर्गत किया जाएगा। राज्य के ब्लाक प्रमुखों को वार्षिक प्रवेश पत्र निर्गत किए जाएंगे।
मंत्रियों को उनका अनुरोध प्राप्त होने पर उनके कार्यकाल की अवधि तक सचिवालय परिचय पत्र निर्गत किया जाएगा। उनके जनसंपर्क अधिकारियों के प्रवेश पत्र सचिवालय प्रशासन जारी करेगा। कैबिनेट मंत्री की संस्तुति पर 20 गैर सरकारी व्यक्तियों और राज्यमंत्री की संस्तुति पर 10 गैर सरकारी लोगों के फोटोयुक्त वार्षिक प्रवेश पत्र जारी किए जाएंगे। वाहनों के लिए भी गाइडलाइन जारी की गई है। बताया गया कि गाइडलाइन के अनुपालन के मद्देनजर सचल दस्ता सचिवालय परिसर में सक्रिय रहेगा।
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