देहरादून
उत्तराखंड: नई आबकारी नीति को मंजूरी, 20 फीसदी महंगी हुई शराब। ई-टेंडरिंग से 2 साल के लिए आवंटन…
देहरादून: उत्तराखंड कैबिनेट ने नई आबकारी नीति को मंजूरी प्रदान कर दी है। इसके तहत शराब की कीमतों में तकरीबन 18 से 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी होगी। अब उत्तराखंड में भी शराब महंगी हो गई है। प्रदेश में देशी और विदेशी दोनों तरह की शराब महंगी हो गई हैं और बियर की कीमत में पांच प्रतिशत की कमी की जा सकती है।
अब दुकानों का आवंटन ई-टेंडरिंग के माध्यम से किया जाएगा जबकि पहले ई-लाटरी सिस्टम से किया जाता था। ई-टेंडरिंग के जरिए किए जाने वाले आवेदनों का शुल्क भी दस हजार रुपये बढ़ा दिया गया है। शराब की दुकानों का अधिभार भी बढ़ाया जाएगा। सभी दुकानें आवंटित हों इसके लिए दुकानों से मिलने वाले राजस्व में भी कटौती की गई है। अब ई-टेंडरिंग में संबंधित दुकान के लिए निर्धारित शुल्क से सबसे ज्यादा रकम लगाने वाले व्यक्ति के नाम पर छूटेगी। पहले आवेदन शुल्क 40 हजार था जिसे अब 50 हजार रुपये कर दिया है।
शनिवार को उत्तराखंड कैबिनेट की अहम बैठक हुई, जिसमें नई आबकारी नीति को मंजूरी दी गई है। शराब के दाम बढ़ाने के साथ ही शराब की दुकानों के आवंटन को लेकर भी अहम फैसला हुआ है। अब शराब ठेकों का आवंटन ई-टेंडरिंग से होगा। इसके अलावा देशी शराब के सभी ठेकों में बीयर अनिवार्य रूप से बिकेगी।
सरकार ने राजस्व बढ़ाने के लिहाज से देशी शराब के ठेकों में बीयर बेचने की अनुमति दी गई है। मौजूदा वित्तीय वर्ष में सरकार को राजस्व का नुकसान हुआ है। मौजूदा वित्तीय वर्ष के लिए सरकार ने 3460 करोड़ राजस्व का टारगेट रखा गया था। लेकिन कोविड के चलते सरकार इस लक्ष्य के पास तक नहीं पहुंच पाई। पिछले साल दिसंबर तक 2287 करोड़ का राजस्व जुट पाया है।
इसके अलावा शराब की दुकानें अब दो साल के लिए आवंटित की जाएंगी। पहले शराब की दुकानें एक साल के लिए दी जाती थीं। शराब की दुकानें खोलने के समय में बदलाव नहीं हुआ है। शहरी क्षेत्रों में शराब की दुकानें सुबह 10 बजे से रात 11 बजे तक खुलेंगी, जबकि पहाड़ी इलाकों में दुकानें खोलने और बंद करने का समय सुबह 10 बजे से रात 10 बजे तक निर्धारित है।
बीते वर्ष दुकानों के पूरी तरह आवंटन न होने के कारण इस बार इनकी संख्या कम कर 619 की गई है। बीते वर्ष इनकी संख्या 659 थी। इस बार देशी शराब की दुकानों से बियर बेचने की व्यवस्था भी की गई है। प्रदेश में यह व्यवस्था बीते दो वर्ष से बंद चल रही थी। इसके साथ ही अंग्रेजी शराब के गोदाम के लाइसेंस की फीस 12 लाख से बढ़ाकर 15 लाख और ब्रांड की लाइसेंस फीस 10 लाख से बढ़ाकर 15 लाख रुपये की गई है। वहीं देशी शराब के गोदामों का शुल्क भी पांच लाख रुपये निर्धारित किया गया है। इसके साथ ही नीति में दुकानों में ओवर रेटिंग व अवैध शराब की तस्करी को लेकर भी जुर्माने की व्यवस्थाएं बरकरार रखी गई हैं।

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