उत्तराखंड
त्रिवेंद्र सरकार ने विभागों के खर्चे पर कर दी ‘सर्जिकल स्ट्राइक’
UT-उत्तराखंड में विकास कार्यों को अंजाम देने के लिए त्रिवेंद्र सरकार ने फिजूलखर्ची पर सर्जिकल स्ट्राइक की है। सभी विभागों को फरमान जारी कर दिया गया है कि वे नए पद मंजूर नहीं करेंगे। विभागों में खाली पदों पर नियत वेतन, दैनिक वेतन व संविदा भर्ती पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है। विभागों में चतुर्थ श्रेणी के अलावा कुछ अन्य विशिष्ट स्तर के पदों पर यदि कोई कार्मिक सेवानिवृत्त होगा तो वह पद समाप्त हो जाएगा।
सुरक्षा मामलों को छोड़कर नए वाहनों की खरीद पर रोक लगा दी गई है। जरूरी होने पर वाहन आउटसोर्स कराए जाएंगे। विभागों, बोर्डों व निगमों में नियुक्त होने वाले सलाहकारों, अध्यक्षों व सदस्यों के लिए अलग से पद सृजित करने पर भी रोक लगा दी गई है। इस संबंध में मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह ने सभी अपर मुख्य सचिवों, प्रमुख सचिवों, सचिवों व सभी विभागाध्यक्षों को विस्तृत दिशा निर्देश जारी कर दिए हैं।
20 बिंदुओं वाले ये दिशा निर्देशों में जारी वित्तीय वर्ष और आगामी वित्तीय वर्ष के मद्देनजर किए गए हैं। ये सरकारी विभागों और कार्यालयों के अलावा सार्वजनिक उपक्रमों, स्थानीय निकायों, स्वायत्तशासी संस्थाओं, प्राधिकरणों, राज्य विश्वविद्यालयों पर भी लागू होंगे।
यूं बरतनी होगी मितव्ययिता
-वाहन चालक, माली, वायरमैन, इलेक्ट्रीशयन, प्लंबर, मिस्त्री, लिफ्टमैन, एसी मैकेनिक व अन्य पद पर नहीं होगी कोई नियुक्ति
-अफसर-कर्मियों को तय भत्तों से इतर दिए जा रहे लाभ पर तत्काल प्रभाव से रोक
-प्राथमिक शिक्षा में सरप्लस शिक्षकों का रिक्त पदों पर हो समायोजन, हर तीन माह में समीक्षा
-जरूरी होने पर ही सरकारी यात्राएं की जाएं, हवाई यात्रा इकनामी क्लास में ही हो
-पदधारक के बदलने पर कार्यालय व आवास की साज सज्जा व फर्नीचर में बदलाव पर रोक
-मुख्यालयों पर नए कार्यालयों व आवासीय भवनों के निर्माण पर रोक लगाई जाए
-सम्मेलन, सेमिनार, कार्यशालाओं के आयोजन होटलों के स्थान सरकारी भवनों व परिसरों में हों
-राजकीय भोज पांच सितारा होटलों में न किया जाए, विशेष परिस्थितियों में सीएस से मंजूरी जरूरी
-सरकारी खर्च पर बधाई संदेशों को भेजने, कैलेंडर, डायरी तथा निजी पत्रों के प्रकाशन व वितरण पर तत्काल प्रभाव से रोक
-वित्तीय वर्ष के आखिरी महीनों में उपकरण, मशीन व स्टेशनरी की खरीद पर भी रोक लगाई जाए
गड़बड़ हैं वित्तीय हालात
प्रदेश सरकार के वित्तीय हालात ठीक नहीं हैं। सरकार ने वर्ष 2019-20 के लिए 48663.90 करोड़ का बजट बनाया है। उसे 6798.15 करोड़ रुपये का राजकोषीय घाटा होने का अनुमान है। राजकोषीय घाटे को बढ़ने से रोकना और विकास कार्यों को पूरा करना सरकार के लिए सबसे बड़ी चुनौती है। बड़े और लघु निर्माण के लिए सरकार के पास बजट का सिर्फ 12.38 फीसदी है। इससे कहीं अधिक यानी 43.41 फीसदी उसे कर्मचारियों के वेतन, मजदूरी, भत्ते व पेंशन पर खर्च करने पड़ रहे हैं।
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