देहरादून
अजब गजब राजनीति: जो थे ऐतिहासिक फैसले वो नेतृत्व परिवर्तन होते ही विवादित लगने लगे…
देहरादून: प्रदेश में तीरथ सरकार ने अपना एक महीना पूरा कर लिया है। तीरथ सिंह रावत के मुख्यमंत्री बनने के बाद ऐसे कई बयान और फैसले हुए हैं जो त्रिवेंद्र नेतृत्व वाली सरकार के फैसलों के ठीक उलट हुए हैं। जो त्रिवेंद्र सरकार के दौरान लिए गए फैसलों को ऐतिहासिक बताते थे वही अब उन फैसलों को विवादित बता रहे हैं। उत्तराखंड की कमान संभालने के बाद मुख्यमंत्री तीरथ ने पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र के एक नहीं बल्कि कई फैसले बदले हैं। आपको बता दें कि ग़ैरसैण बजट सत्र के दौरान विधायक व भाजपा प्रदेश अध्यक्ष के तौर पर शामिल होने वाले बंसीधर भगत ने पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र के फैसलों की जमकर तारीफ की थी। वह पूर्व मुख्यमंत्री की तारीफ करते हुए नहीं थकते थे।
लेकिन वही बंसीधर भगत अब तीरथ सरकार में कैबिनेट मंत्री की भूमिका निभा रहे हैं। और अब बंशीधर भगत को उन्हीं फैसलों में विवाद दिख रहा है। बंसीधर भगत का कहना है कि मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र के उन्हीं फैसलों को पलटा है, जो विवादित रहे हैं। विगत दिवस कैबिनेट मंत्री बंसीधर भगत काशीपुर में पत्रकारों से रूबरू हुए। उनसे पूछा गया कि मुख्यमंत्री तीरथ ने गैरसैंण में कमिश्नरी के प्रस्ताव को स्थगित कर दिया है, क्या कारण रहा जिसके चलते पूर्व मुख्यमंत्री के फैसले को पलटा गया है। इस पर बंसीधर भगत ने कहा कि जनता और विधायकों के दबाव में ऐसा किया गया है। इस मुद्दे पर पहले भी विवाद था। उनसे यह पूछा गया कि गैरसैंण कमिश्नरी के अलावा कई अन्य फैसले भी बदले जा रहे हैं, इस पर उन्होंने कहा कि वहीं फैसले बदले जा रहे हैं, जिन पर पहले से ही विवाद था। उस वक़्त विधायकों को किसी तरह से संतुष्ट कर दिया गया था, लेकिन अब फिर से विवाद उठ रहा था। इसी वजह से मुख्यमंत्री तीरथ उन फैसलों को पलट रहे हैं। सोचने वाली बात यह है कि आज कैबिनेट मंत्री बंसीधर भगत पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र के जिन फैसलों को विवादित बता रहे हैं, प्रदेश अध्यक्ष रहते हुए बंसीधर भगत ने उन्हीं फैसलों को सरकार की बड़ी उपलब्धि बताया था।
प्रदेश में नेतृत्व परिवर्तन के बाद पलटे गये फैसले:-
1- तीरथ सिंह रावत ने मुख्यमंत्री बनने के बाद गैरसैंण को कमिश्नरी बनाए जाने के निर्णय पर पुनर्विचार करने की बात कही।
2- कोटद्वार में मेडिकल कॉलेज पर त्रिवेंद्र नेतृत्व वाली सरकार ने विराम लगाया तो तीरथ सिंह रावत ने इसके लिए बजट आवंटित कर दिया।
3- कर्मकार कल्याण बोर्ड में त्रिवेंद्र सिंह रावत ने नया अध्यक्ष और सचिव बैठाया, तो तीरथ सिंह रावत ने आते ही सचिव और अध्यक्ष को ही हटा दिया।
4- त्रिवेंद्र सरकार के दौरान अहम पदों पर बैठे अधिकारियों को हटाकर दूसरे अधिकारियों को लाया गया।
5- त्रिवेंद्र सिंह रावत के करीबी माने जाने वाले दायित्वधारियों को भी तीरथ सरकार में बदल दिया गया है।
6- देवस्थानम बोर्ड के गठन पर भी तीरथ साफ कर दिया है कि 51 मंदिर जो बोर्ड में शामिल किए गए थे, उनको मुक्त कर दिया जाएगा।
7- कर्मकार कल्याण बोर्ड श्रम मंत्री के अधीन आ गया है। तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के जो कर्मचारी हटाए गए थे।उनकी हटाने के दिन से वापसी कर ली गई है।
8- मुख्यमंत्री तीरथ ने कोविड काल में करीब साढ़े चार हजार लोगों पर दर्ज किए गए मुकदमे वापस लेने के आदेश कर दिया।
9- चमोली के घाट क्षेत्र के आंदोनकारियों पर दर्ज मुकदमे न सिर्फ वापस किए बल्कि त्रिवेंद्र रावत जिस सड़क की मांग को नियम विरुद्ध बताते हुए ग्रामीणों पर लाठीचार्ज तक करवा चुके थे। तीरथ ने उस सड़क को डेढ़ लेन बनाने के आदेश जारी करने में देर नहीं लगाई।

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